देहरादून: देश की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले उत्तराखंड के चार वीर सपूतों की स्मृति में शहीद स्मारक और शहीद द्वार बनाए जाएंगे. इनके निर्माण को लेकर प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति भी मिल गई है. वहीं, सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी का कहना है कि ये निर्माण आने वाली पीढ़ियों के लिए देशभक्ति और प्रेरणा के स्थायी केंद्र बनेंगे.
दरअसल, सैन्य भूमि के रूप में अपनी विशेष पहचान रखने वाले उत्तराखंड में धामी सरकार ने शहीदों के सम्मान और उनके सर्वोच्च बलिदान को स्मरणीय बनाए रखने के लिए एक अहम निर्णय लिया है. सरकार ने प्रदेश के चार वीर जवानों की स्मृति में शहीद स्मारक एवं शहीद द्वारों के निर्माण के लिए प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी है. सरकार के इस कदम से शहीदों के गांवों और परिजनों में खुशी की लहर है.

वहीं, सरकार का मानना है कि स्थानीय युवाओं में भी राष्ट्रसेवा के प्रति उत्साह का संचार होगा. इस महत्वपूर्ण निर्णय के सामने आने के बाद सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के वीरों के त्याग को सम्मान देने और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. सरकार की ओर से जारी स्वीकृति के मुताबिक, पौड़ी और टिहरी जिलों के चार अलग-अलग स्थानों पर इन स्मारकों एवं द्वारों का निर्माण किया जाएगा.
इन चार वीर शहीदों के गांवों में होगा निर्माण-
- केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के वीर शहीद विनोद पाल सिंह की स्मृति में उनके पैतृक गांव कैपर्स बारसार, बालगंगा (टिहरी) में शहीद स्मारक एवं शहीद द्वार का निर्माण किया जाएगा.
- देश की सुरक्षा में अपना योगदान देने वाले शहीद पैराट्रूपर अमित कुमार अग्रवाल की स्मृति में उनके गांव कोला-सिल्डी, कल्जीखाल (पौड़ी) में शहीद द्वार के निर्माण को मंजूरी दी गई है.
- सीआरपीएफ के शहीद नायक भरत सिंह के अदम्य साहस को नमन करते हुए उनके पैतृक स्थान ग्राम बूंगा मल्ला, रिखणीखाल, लैंसडाउन (पौड़ी) में शहीद स्मारक का निर्माण कराया जाएगा.
- भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के शहीद सहायक उपनिरीक्षक राजेंद्र सिंह की शहादत को नमन करते हुए ग्राम कोटी, देवप्रयाग (टिहरी) में शहीद स्मारक निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है.
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कही ये बात: सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि सीएम पुष्कर धामी के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के हित में लगातार ऐतिहासिक निर्णय ले रही है. ‘उत्तराखंड देवभूमि के साथ ‘वीर भूमि’ भी है. यहां ‘सैन्य धाम’ भी बनाया जा रहा है.
यहां के हर दूसरे परिवार से कोई न कोई सदस्य सेना या अर्धसैनिक बलों में रहकर देश की रक्षा कर रहा है. सीमा पार दुश्मनों से मुकाबला करना हो या देश के भीतर आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालना. उत्तराखंड के जवानों ने हमेशा अपने साहस और समर्पण से मिसाल कायम की है.
“शहीदों की याद में निर्मित होने वाले ये स्मारक और द्वार केवल पत्थरों की संरचनाएं नहीं होंगी. बल्कि, ये देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों के शौर्य, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का स्थायी प्रतीक होंगे. जब गांव और आसपास के क्षेत्र के युवा इन द्वारों एवं स्मारकों से गुजरेंगे, तो उन्हें शहीदों की गौरवगाथाओं के बारे में जानने का अवसर मिलेगा. इससे युवाओं के मन में राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति की भावना और ज्यादा मजबूत होगी.“- गणेश जोशी, सैनिक कल्याण मंत्री, उत्तराखंड
सरकार और समाज का दायित्व है शहीदों का स्मरण: मंत्री जोशी ने जोर देकर कहा कि शहीदों का बलिदान राष्ट्र की अमूल्य धरोहर है. शहीदों के परिवारजनों को यह महसूस कराना कि पूरा राज्य और देश उनके साथ खड़ा है. सरकार के साथ पूरे समाज का दायित्व है.
“प्रदेश सरकार शहीद परिवारों के सम्मान और कल्याण के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है. भविष्य में भी शहीदों की स्मृतियों को संजोने का यह कार्य प्राथमिकता के आधार पर जारी रहेगा.“- गणेश जोशी, सैनिक कल्याण मंत्री, उत्तराखंड


