भारत का पहला परागणकर्ता उद्यान: तितलियों और मधुमक्खियों को बचाने की भारत की पहली ठोस पहल

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। जब दुनिया जैव विविधता संकट से जूझ रही है, उसी समय उत्तराखंड के हल्द्वानी में भारत का पहला परागणकर्ता उद्यान (Pollinator Park) आकार

भारत का पहला परागणकर्ता उद्यान: तितलियों और मधुमक्खियों को बचाने की भारत की पहली ठोस पहल

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। जब दुनिया जैव विविधता संकट से जूझ रही है, उसी समय उत्तराखंड के हल्द्वानी में भारत का पहला परागणकर्ता उद्यान (Pollinator Park) आकार ले चुका है। 29 दिसंबर 2020 को शुरू हुआ यह उद्यान तितलियों, मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले जीवों के संरक्षण के लिए देश की पहली संगठित और वैज्ञानिक पहल मानी जा रही है।
यह परागणकर्ता उद्यान सुशीला तिवारी स्मारक अस्पताल के पास स्थित फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट परिसर में विकसित किया गया है। उत्तराखंड वन विभाग के अनुसंधान प्रभाग द्वारा लगभग चार एकड़ क्षेत्रफल में निर्मित यह पार्क 40 से अधिक परागण प्रजातियों को प्राकृतिक और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराता है।

सिर्फ पार्क नहीं, एक जीवित पारिस्थितिकी मॉडल

यह उद्यान सामान्य गार्डन नहीं है। इसे इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि परागण करने वाले जीवों का पूरा जीवन चक्र — अंडा, लार्वा, प्यूपा और वयस्क अवस्था — बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के पूरा हो सके। यहां लगाए गए पौधे तितलियों और मधुमक्खियों को भोजन देने के साथ-साथ उनके विकास के लिए सुरक्षित वातावरण भी प्रदान करते हैं।
यहां कॉमन जेज़ेबेल, प्लेन टाइगर, कॉमन एमराल्ड, रेड पियरट और कॉमन सेटलर जैसी तितली प्रजातियों की नियमित मौजूदगी देखी जाती है। साथ ही मधुमक्खियों, परागण करने वाले पक्षियों और अन्य कीटों की विविध प्रजातियां इस उद्यान को जीवंत बनाती हैं।

परागणकर्ता क्यों हैं जीवन के लिए जरूरी

वैज्ञानिक आंकड़े बताते हैं कि पृथ्वी पर मौजूद लगभग 75 से 95 प्रतिशत फूलदार पौधे परागण पर निर्भर हैं। परागणकर्ता लगभग 1.8 लाख से अधिक पौधों की प्रजातियों को परागण सेवाएं प्रदान करते हैं। इनके बिना कृषि उत्पादन, फल-सब्ज़ी आपूर्ति, मिट्टी की उर्वरता और खाद्य सुरक्षा सीधे तौर पर प्रभावित होगी।

???? शोध, शिक्षा और भविष्य की तैयारी

यह परागणकर्ता उद्यान अब केवल संरक्षण स्थल नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और कीटनाशकों के प्रभाव पर अध्ययन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। स्कूली छात्रों, शोधार्थियों और पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए यह पार्क सीखने और समझने की खुली प्रयोगशाला के रूप में काम कर रहा है।

भारत के लिए एक मॉडल

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि हल्द्वानी का यह परागणकर्ता उद्यान भविष्य में देश के अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल साबित हो सकता है। यह दिखाता है कि यदि नीति, विज्ञान और इच्छाशक्ति एक साथ आएं, तो जैव विविधता को बचाया जा सकता है।