पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ डालेगी 2026 की गर्मी
जलवायु परिवर्तन को लेकर आई एक ताज़ा वैज्ञानिक रिपोर्ट ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है। फरवरी 2026 में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा जारी शोध के
प्रदीप फुटेला
जलवायु परिवर्तन को लेकर आई एक ताज़ा वैज्ञानिक रिपोर्ट ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है। फरवरी 2026 में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा जारी शोध के अनुसार, वर्ष 2026 भीषण गर्मी के नए रिकॉर्ड बना सकता है और यह अब तक के सबसे गर्म वर्षों में शामिल हो सकता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण प्रमुख ग्रीनहाउस गैस नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) वायुमंडल में पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज़ी से टूट रही है। यह गैस कार्बन डाइऑक्साइड से कहीं अधिक शक्तिशाली मानी जाती है और न केवल वैश्विक तापमान बढ़ाती है, बल्कि ओजोन परत को भी गंभीर नुकसान पहुंचाती है।
वैज्ञानिकों ने NASA के लगभग 20 वर्षों के सैटेलाइट डेटा का विश्लेषण किया है। अध्ययन में सामने आया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण स्ट्रैटोस्फियर में बड़े बदलाव हो रहे हैं, जिससे नाइट्रस ऑक्साइड की “लाइफटाइम” हर दशक में करीब 1.4 प्रतिशत कम हो रही है। इसका सीधा असर क्लाइमेट मॉडल्स पर पड़ रहा है और भविष्य के तापमान अनुमानों में अनिश्चितता लगातार बढ़ती जा रही है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि N₂O के व्यवहार में यह बदलाव आने वाले दशकों में तापमान के सटीक आकलन को और कठिन बना देगा। हालांकि, समग्र निष्कर्ष बेहद स्पष्ट है—दुनिया एक बार फिर रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की ओर बढ़ रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्ष 2026 संभवतः अब तक के शीर्ष चार सबसे गर्म वर्षों में से एक होगा।
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि ऑस्ट्रेलिया में तापमान 49 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जहां जंगलों में लगने वाली भीषण आग इस गर्मी को और भड़काएगी। वहीं अमेरिका में एक ओर पोलर वोर्टेक्स के कारण एक्सट्रीम कोल्ड वेव देखने को मिल सकती है, तो दूसरी ओर समुद्र की जलधाराओं में बढ़ती गर्मी का असर ज़मीन पर असामान्य तापमान के रूप में सामने आएगा।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह विरोधाभासी मौसमी घटनाएं—कहीं अत्यधिक ठंड, कहीं असहनीय गर्मी—दरअसल एक ही सच्चाई की ओर इशारा करती हैं। जलवायु प्रणाली असंतुलन की स्थिति में पहुंच चुकी है।
यह शोध एक कड़वा लेकिन ज़रूरी सच सामने रखता है कि क्लाइमेट चेंज अब कोई “भविष्य की समस्या” नहीं रह गई है। यह हमारी रोज़मर्रा की वास्तविकता बन चुकी है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।


News Desk 

