केंद्रीय बजट मे आम आदमी को कोई राहत नहीं: रुना शर्मा
रायपुर। केंद्रीय बजट 2026 को सरकार “विकासोन्मुख” और “भविष्य की नींव” बता रही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि यह बजट आम आदमी, मध्यम वर्ग और किसानों
रायपुर। केंद्रीय बजट 2026 को सरकार “विकासोन्मुख” और “भविष्य की नींव” बता रही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि यह बजट आम आदमी, मध्यम वर्ग और किसानों की परेशानियों को नज़रअंदाज़ करता दिखता है। बजट के कई ऐसे नकारात्मक पहलू हैं, जो सीधे तौर पर सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करते हैं।
सबसे बड़ा सवाल मध्यम वर्ग को लेकर है। महंगाई के इस दौर में आयकर स्लैब में कोई ठोस राहत न देकर सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि सैलरी क्लास उसकी प्राथमिकता में नहीं है। यही वर्ग सबसे ज़्यादा टैक्स देता है, लेकिन जब राहत की बात आती है तो सरकार का रवैया बेरुखा नज़र आता है। यह वर्ग चुनाव के समय याद आता है, बजट के समय नहीं।
दूसरा बड़ा मुद्दा महंगाई है। बजट में पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस और रोजमर्रा की ज़रूरतों पर कोई ठोस राहत नहीं दी गई। सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जब थाली महंगी होती जा रही हो, तब इंफ्रास्ट्रक्चर के आंकड़े आम आदमी को दिलासा नहीं देते। सवाल यह है कि क्या विकास सिर्फ काग़ज़ों तक सीमित रह गया है?
किसानों के लिए भी यह बजट उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता। हर साल किसानों की आय दोगुनी करने की बात होती है, लेकिन बजट में इसके ठोस उपाय नदारद हैं। MSP, फसल लागत, सिंचाई और कर्ज़ राहत जैसे मुद्दों पर सरकार की चुप्पी बताती है कि कृषि अभी भी हाशिये पर है।
गरीब वर्ग के लिए भी कोई नई बड़ी सामाजिक योजना सामने नहीं आई। शिक्षा, आवास और सीधी नकद सहायता जैसे मुद्दों पर बजट मौन है। इससे यह धारणा और मज़बूत होती है कि सरकार कल्याण से ज़्यादा आंकड़ों की बाज़ीगरी पर भरोसा कर रही है।
छोटे व्यापारी और परंपरागत व्यवसाय, जो अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, उनके लिए भी बजट निराशाजनक रहा। GST, महंगे कर्ज़ और घटती खरीद क्षमता से जूझ रहे इन वर्गों को कोई सीधी राहत नहीं दी गई।
कुल मिलाकर, बजट 2026 सरकार की प्राथमिकताओं को उजागर करता है—जहां बड़े प्रोजेक्ट्स और कॉरपोरेट सोच आगे है, वहीं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पीछे छूट गई है। यह बजट विकास का दावा तो करता है, लेकिन संवेदनशीलता की कसौटी पर सरकार को कठघरे में खड़ा करता है।


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