डीजे से न्याय योद्धा तक: 10 साल की लड़ाई के बाद डीजे युवा को ऐतिहासिक जीत

काठमांडू। कभी नेपाल के संगीत जगत में तहलका मचाने वाले मशहूर डीजे युवराज भंडारी उर्फ़ “डीजे युवा” एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं—

डीजे से न्याय योद्धा तक: 10 साल की लड़ाई के बाद डीजे युवा को ऐतिहासिक जीत

काठमांडू। कभी नेपाल के संगीत जगत में तहलका मचाने वाले मशहूर डीजे युवराज भंडारी उर्फ़ “डीजे युवा” एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं—लेकिन इस बार संगीत के कारण नहीं, बल्कि एक दशक लंबे दर्दनाक कानूनी संघर्ष में मिली ऐतिहासिक जीत के कारण।

कभी नेपाल में डीजे संस्कृति को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने वाले नामों में युवराज भंडारी अग्रणी थे। आकर्षक गेटअप, अलग अंदाज़ और ऊर्जावान प्रस्तुति के कारण उन्होंने न सिर्फ़ नेपाल में बल्कि विदेशों में भी डीजेइंग के ज़रिये अपार लोकप्रियता हासिल की।

म्यूज़िक वीडियो में उनके अभिनय और व्यक्तित्व ने लाखों युवाओं को आकर्षित किया। लगभग एक दशक तक उन्होंने संगीत और डीजे जगत पर राज किया।

लेकिन ज़िंदगी हमेशा एक ही लय में नहीं चलती।

नेपाल में डीजे संस्कृति के शुरुआती दौर में ही अपनी अनोखी शैली, आकर्षक व्यक्तित्व और संगीत के प्रति जुनून के कारण प्रसिद्धि पाने वाले डीजे युवा ने देश–विदेश में डीजेइंग करते हुए करीब एक दशक तक संगीत जगत पर राज किया। उनके उस दौर के गीत और म्यूज़िक वीडियो आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं। लेकिन जीवन में आए अप्रत्याशित कानूनी और घरेलू तूफ़ानों ने उनके करियर को गम्भीर रूप से प्रभावित किया।

घरेलू संकट और कानूनी जाल में फँसी ज़िंदगी

डीजे युवा के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उनकी पत्नी स्व. विवेक इट्ज़ेन मेयर का 2010 में काठमांडू स्थित टीचिंग अस्पताल में निधन हो गया। इसके बाद नॉर्वे में स्थित उनकी संपत्ति को लेकर उत्तराधिकार विवाद कानूनी रूप ले बैठा।

स्व. मेयर के पूर्व पति और उनके परिवार ने नॉर्वे की अदालत में दावा दायर करते हुए पूरी संपत्ति अपने नाम करने की माँग की।

इस दौरान नॉर्वे में निजी प्रोबेट प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, जिसमें डीजे युवा को बिना जानकारी दिए उत्तराधिकार सूची से हटा दिया गया, उनकी वैवाहिक स्थिति को ग़लत रूप से “तलाक़शुदा” दिखाया गया, विवाह और वसीयत से जुड़े तथ्यों को छिपाया गया।

डीजे युवा का आरोप है कि काठमांडू स्थित नॉर्वेजियन दूतावास की संलग्नता में अवैध दस्तावेज़ जुटाकर उनके ख़िलाफ़ संपत्ति दावे का मुकदमा दायर किया गया।

ज़िला और पुनरावेदन अदालत से हार के बाद वे लगभग निराशा की अंतिम सीमा तक पहुँच चुके थे।
उन्होंने भावुक होकर कहा,
“10 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ते-लड़ते मैंने जर्मनी और नॉर्वे में पसीना बहाकर कमाई हुई सारी संपत्ति गँवा दी।”

कभी आलीशान बंगले में रहने वाले डीजे युवा आज काठमांडू में किराए के एक साधारण कमरे में अकेले रहते हुए सादा जीवन जी रहे हैं।

संपत्ति के प्रति कभी लालच न रखने वाले, समाज सेवा को जीवन समर्पित करने वाले ये युवा सिर्फ़ एक व्यक्ति नहीं—बल्कि एक सोच, एक संस्कार और एक प्रेरणा हैं। नेपाल में समाज विकास के लिए उन्होंने निःस्वार्थ भाव से अपना समय, श्रम, सपने ही नहीं बल्कि करोड़ों रुपये की संपत्ति भी अर्पित की।

जिन लोगों ने उन पर मुकदमा किया, उनसे भी उन्होंने घृणा नहीं की। बदले की बजाय क्षमा को चुना; शत्रु नहीं, मानवता को देखा। महँगे उपहार देकर उन्होंने साबित किया—उनका दिल संपत्ति से कहीं बड़ा है।

लेकिन नियति ने एक ऐसा मोड़ लिया जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। आर्थिक रूप से समृद्ध देश नॉर्वे में, वह भी एक अरबपति परिवार द्वारा कुछ धन के लिए उन पर संपत्ति दावा मुकदमा दायर किया गया। जिस व्यक्ति ने कभी संपत्ति को महत्व नहीं दिया, उसी को संपत्ति के नाम पर अदालत के कटघरे में खड़ा किया गया।

न्याय के पक्ष में खड़े होते-होते उन्होंने अपनी सारी संपत्ति खर्च कर दी। संपत्ति खत्म हो गई, सुविधाएँ चली गईं, लेकिन आत्मसम्मान कभी नहीं झुका। आज वे साधारण जीवन जी रहे हैं—लेकिन उनकी आत्मा समृद्ध है, विचार उज्ज्वल हैं और संघर्ष अमर है।

उनकी कहानी हम सभी के लिए एक गहरा संदेश है—

धन इंसान को बड़ा नहीं बनाता, त्याग बनाता है।
सुख-सुविधाएँ क्षणिक होती हैं, लेकिन सत्य और ईमानदारी सदा अमर रहते हैं।

इसी कारण वे आज एक जीवित प्रेरणा हैं।

सर्वोच्च अदालत का ऐतिहासिक फ़ैसला

अंततः न्याय देर से ही सही, पर आया।
नेपाल की सर्वोच्च अदालत ने 17 फ़रवरी 2025 को दिए अपने फ़ैसले में युवराज भंडारी को स्व. मेयर की पूरी संपत्ति का एकमात्र उत्तराधिकारी घोषित किया।

अदालत ने मेयर की वसीयत को अमान्य ठहराते हुए नेपाली क़ानून के अनुसार मृतक की संपूर्ण संपत्ति पर पत्नी का अधिकार होने की बात स्पष्ट की।

फ़ैसले में कहा गया कि मेयर की मृत्यु के समय वे नेपाल में रह रही थीं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय निजी क़ानून के अनुसार भी नेपाली क़ानून ही लागू होता है। इस आधार पर नॉर्वे में आगे बढ़ाई गई निजी प्रोबेट प्रक्रिया को अवैध ठहराया गया।

नॉर्वे में नई कानूनी लड़ाई की तैयारी

ओस्लो स्थित रेनहोल्ड्ट एडवोकेटफ़र्मा एएस के वकील थॉमस रेनहोल्ड्ट ने मेयर के बच्चों और उनके कानूनी प्रतिनिधियों को औपचारिक पत्र भेजते हुए 14 दिनों के भीतर संपत्ति हस्तांतरण न होने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। नेपाल के अधिवक्ता देवेंद्र प्रधान के माध्यम से नोटिस भेजा जा चुका है।

वकील रेनहोल्ड्ट के अनुसार, अमान्य प्रोबेट प्रमाणपत्र के आधार पर यदि संपत्ति का बँटवारा किया गया है तो वह पूरी प्रक्रिया अवैध होगी और संपूर्ण संपत्ति पुनः भंडारी को लौटानी पड़ेगी। साथ ही लापरवाही और जालसाज़ी से हुए नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति की माँग भी की जाएगी।

अब डीजे युवा नॉर्वे के ओस्लो जिला अदालत में मेयर की नॉर्वे, इटली और स्पेन में स्थित संपत्तियों पर भी अपना अधिकार जताते हुए क्षतिपूर्ति दावा के साथ मुकदमा दायर करने की अंतिम तैयारी में हैं।

उनका कहना है कि उन्हें जानबूझकर फँसाया गया और उनके साथ अन्याय किया गया, इसलिए उस परिवार के ख़िलाफ़ जालसाज़ी और क्षतिपूर्ति का मुकदमा दायर किया जाएगा।

इस प्रक्रिया में नॉर्वे में रह रहे एनआरएन अभियंता कुमार पंडित और रोशन श्रेष्ठ महत्वपूर्ण सहयोग कर रहे हैं।

“मुझे न्याय मिला”

सर्वोच्च अदालत के फ़ैसले के बाद डीजे युवा ने राहत की साँस ली।
उन्होंने कहा,
“मुझे न्याय मिला। लेकिन इस न्याय की कीमत बहुत महँगी रही—10 साल का जीवन, मेरा करियर, मेरी संपत्ति और मानसिक शांति, सब कुछ खो दिया।”

एक दशक तक चले संघर्ष ने उन्हें शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ दिया, लेकिन अब वे फिर से संगीत जगत में सक्रिय रूप से लौटने की तैयारी में हैं।
उनका कहना है,
“अब शेष जीवन न्याय, संगीत और आत्मसम्मान के लिए समर्पित करूँगा।”

अंतरराष्ट्रीय कानूनी बहस का विषय

इस घटना ने नेपाल और नॉर्वे—दोनों देशों में अंतरराष्ट्रीय उत्तराधिकार क़ानून, वैवाहिक मान्यता, प्रोबेट प्रक्रिया और कूटनीतिक भूमिकाओं पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

एक कलाकार की व्यक्तिगत पीड़ा ने आज दो देशों के कानूनी अभ्यास पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।

डीजे युवा की कहानी सिर्फ़ एक कलाकार की कानूनी जीत नहीं है—
यह कहानी है इस विश्वास की कि न्याय देर से ही सही, अंततः सत्य की जीत होती है।