पैंक्रियाटिक कैंसर को पूरी तरह रोका जा सकता है : वैध बालेंदु प्रकाश
कोट्टकल (केरल): आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय सम्मेलन “आयुर्वेद फॉर कैंसर केयर : शास्त्रीय संकल्पनाओं से क्लिनिकल प्रमाण तक” वैद्यरत्नम पी.एस. वरियर
28 वर्षों के 2400 मरीजों का आयुर्वेदिक डेटा कोट्टकल में प्रस्तुत
कोट्टकल (केरल): आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय सम्मेलन “आयुर्वेद फॉर कैंसर केयर : शास्त्रीय संकल्पनाओं से क्लिनिकल प्रमाण तक” वैद्यरत्नम पी.एस. वरियर आर्य वैद्य शाला, कोट्टकल) में पद्मश्री वैद्य बालेंदु प्रकाश (संस्थापक, पद्माव स्पेशलिटी आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट सेंटर, देहरादून) ने सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के तुरंत बाद पहले तकनीकी सत्र में अपना शोध प्रस्तुत किया।
शोधपत्र में बताया गया कि 1997 से अब तक 2400पैनक्रियाटाइटिस (तीव्र एवं दीर्घकालिक) के मरीजों का व्यवस्थित आयुर्वेदिक उपचार किया गया मरीजों का प्रमाणित हर्बो-मिनरल औषधि प्रोटोकॉल के साथ पूर्ण उपचार किया गया। यह भी बताया गया कि 28 वर्षों के लंबे अनुवर्तन (फॉलो-अप) में एक भी मरीज में पैंक्रियाटिक एडिनोकार्सिनोमा (पैंक्रियाटिक कैंसर) नहीं हुआ वैद्य बालेंदु प्रकाश ने कहा, “यह डेटा सिद्ध करता है कि अगर पैनक्रियाटाइटिस का शुरुआती चरण में ही पूर्ण और व्यवस्थित आयुर्वेदिक उपचार कर लिया जाए, तो पैंक्रियाटिक कैंसर को 100 फीसदी रोका जा सकता है। हमें कैंसर होने की प्रतीक्षा करने की जरूरत नहीं है – हम उसे पैनक्रियाटाइटिस के स्तर पर ही रोक सकते हैं।”
आर्य वैद्य शाला कोट्टकल के प्रबंध न्यासी एवं मुख्य चिकित्सक डॉ. पी.एम. वरियर, संगठन समिति अध्यक्ष डॉ. पी.आर. रमेश एवं आयुष मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने वैद्य बालेंदु प्रकाश को स्मृति-चिह्न एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। यह अपने तरह का विश्व का सबसे बड़ा एकल-केंद्रीय कोहोर्ट अध्ययन है जो यह दर्शाता है कि आयुर्वेद न केवल कैंसर के बाद जीवन की गुणवत्ता बढ़ा सकता है, बल्कि कुछ कैंसर को होने से ही रोक सकता है।


News Desk 

