हल्द्वानी बनभूलपुरा मामला: सुप्रीम कोर्ट की 2 दिसंबर की सुनवाई से पहले शहर में अलर्ट, प्रशासन–पुलिस ने कसे पेंच

हल्द्वानी का बनभूलपुरा इलाका एक बार फिर बड़े फैसले की दहलीज़ पर खड़ा है। 2 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट इस बहुचर्चित रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले की सुनवाई करेगा और

हल्द्वानी बनभूलपुरा मामला: सुप्रीम कोर्ट की 2 दिसंबर की सुनवाई से पहले शहर में अलर्ट, प्रशासन–पुलिस ने कसे पेंच

हल्द्वानी का बनभूलपुरा इलाका एक बार फिर बड़े फैसले की दहलीज़ पर खड़ा है। 2 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट इस बहुचर्चित रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले की सुनवाई करेगा और कयास लगाए जा रहे हैं कि इसी दिन फैसला भी आ सकता है। ऐसे में प्रशासन और पुलिस दोनों पूरी तरह चौकन्ने मोड पर हैं। साफ है—इस बार कोई कोताही नहीं चलेगी।

मामला हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के पास की लगभग 30 एकड़ विवादित भूमि से जुड़ा है, जिस पर रेलवे और नगर निगम दोनों स्वामित्व का दावा ठोंकते रहे हैं। इसी जमीन पर बने करीब 4,365 घरों को अतिक्रमण की श्रेणी में रखा गया है। 2023 में हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे, लेकिन भारी तनाव की आशंका के चलते कार्रवाई अटक गई और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया।

अब जबकि शीर्ष अदालत फैसला सुनाने की स्थिति में है, प्रशासन ने मानो पूरा सिस्टम हाई-अलर्ट पर डाल दिया है। रविवार को जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये एक अहम समन्वय बैठक हुई। बैठक में रेलवे, नगर निगम, वन विभाग और उत्तर-पूर्वी रेलवे के अधिकारियों को साफ-साफ निर्देश दिए गए कि फैसले के बाद किसी भी कीमत पर कानून व्यवस्था चरमरानी नहीं चाहिए।

इधर पुलिस भी पूरी तैयारी में जुट चुकी है। एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने दो-टूक कहा है कि फोर्स पूरी क्षमता में खड़ी है—बॉडी प्रोटेक्टर, हेलमेट, टीमें, रिजर्व फोर्स—सब कुछ तैयार। शहर के संवेदनशील इलाकों में सघन चेकिंग शुरू कर दी गई है, गश्त बढ़ा दी गई है, और सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। साइबर टीम को भी सख्ती से निगरानी में लगाया गया है।

एसएसपी ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि सरकारी कार्य में बाधा डालने वाले, तनाव फैलाने वाले या भीड़ को भड़काने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। हालात बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर कड़ी कार्रवाई तय है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला अब शहर की अगली दिशा तय करेगा। लेकिन जितना बड़ा विवाद, उतनी ही बड़ी तैयारी इस बार दिखाई दे रही है। हल्द्वानी फिलहाल शांत है, लेकिन सभी की नज़रें 2 दिसंबर पर टिकी हैं—क्योंकि इसके बाद हालात किस ओर मुड़ेंगे, इसका असर सिर्फ बनभूलपुरा पर नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की प्रशासनिक प्रणाली पर पड़ेगा।