हजारीबाग में पत्रकारों पर हमला ,लोकतंत्र पर सीधा प्रहार : सिमरन
पाकुड़/रांची। हजारीबाग में पत्रकारों पर हुआ हमला केवल एक घटना नहीं, बल्कि लोकतंत्र की बुनियाद पर खुला वार है। वर्किंग जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया, झारखंड इकाई की उपाध्यक्ष
पाकुड़/रांची। हजारीबाग में पत्रकारों पर हुआ हमला केवल एक घटना नहीं, बल्कि लोकतंत्र की बुनियाद पर खुला वार है। वर्किंग जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया, झारखंड इकाई की उपाध्यक्ष सिमरन शुक्ला ने इस शर्मनाक कृत्य की तीखी निंदा करते हुए कहा है कि यह बर्दाश्त के बाहर है और इसके दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पत्रकार सवाल पूछते हैं, सत्ता से जवाब मांगते हैं और यही उनका धर्म है। अगर इस कर्तव्य को निभाने पर उन्हें पीटा जाएगा, धमकाया जाएगा या अपमानित किया जाएगा, तो यह साफ संकेत है कि कहीं न कहीं सच से डर बैठ चुका है। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के दौरे के दौरान जिस तरह पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार हुआ, वह सत्ता के अहंकार और असहिष्णुता का खतरनाक उदाहरण है।
सिमरन शुक्ला ने सवाल उठाया कि जब पुलिस प्रशासन मौके पर मौजूद था, तब भी ऐसी घटना कैसे हो गई? क्या यह लापरवाही है या फिर मौन सहमति? दोनों ही स्थितियां लोकतंत्र के लिए घातक हैं। उन्होंने कहा कि अगर प्रेस की आवाज को दबाने की कोशिश की जाएगी, तो यह देश के हर नागरिक की आवाज को कुचलने जैसा होगा।
उन्होंने पत्रकारों से भी आह्वान किया कि वे अब चुप न बैठें। जिन जनप्रतिनिधियों को प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान नहीं, उनका खुला बहिष्कार किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कलम पर वार होगा, तो जवाब सड़कों पर आंदोलन से दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह लड़ाई सिर्फ पत्रकारों की नहीं है, बल्कि हर उस नागरिक की है जो सच जानना चाहता है। सवाल पूछना अपराध नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है। इसे कुचलने की हर कोशिश का पुरजोर विरोध होना चाहिए।
सिमरन शुक्ला ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि हजारीबाग पुलिस बिना देरी के एफआईआर दर्ज करे और दोषियों को गिरफ्तार कर कड़ी सजा दिलाई जाए। उन्होंने दो टूक कहा अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ संदेश जाएगा कि सरकार खुद इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा दे रही है, जो किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।


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