आयुर्वेद के परंपरागत ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने की अनूठी पहल

गदरपुर। आयुर्वेद की प्राचीन परंपराओं को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बिलासपुर स्थित वैद्य चंद्र प्रकाश रसशाला ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

आयुर्वेद के परंपरागत ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने की अनूठी पहल

वैध चन्द्र प्रकाश रसशाला में  ‘अमर’ औषधि पर कार्यशाला आयोजित

गदरपुर। आयुर्वेद की प्राचीन परंपराओं को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बिलासपुर स्थित वैद्य चंद्र प्रकाश रसशाला ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यहां आयोजित विशेष कार्यशाला में पैनक्रियाज रोगों के उपचार में उपयोगी चर्चित आयुर्वेदिक औषधि “अमर” के निर्माण, प्रभाव और वैज्ञानिक परीक्षणों पर विस्तार से चर्चा की गई।

आयुर्वेद में पारा, गंधक, सोना, चांदी, तांबा और जस्ता जैसी धातुओं को जड़ी-बूटियों के साथ विशेष अग्नि-संस्कार और मर्दन प्रक्रियाओं द्वारा भस्म में परिवर्तित करने की परंपरा सदियों पुरानी है। रसशास्त्र में वर्णित इन्हीं सिद्धांतों पर आधारित “अमर” औषधि को पारा, तांबा, गंधक और विभिन्न जड़ी-बूटियों के मिश्रण से लगभग तीन वर्षों की सतत प्रक्रिया में तैयार किया जाता है।

इस औषधि के उपयोग से 1970 के दशक में पैनक्रियाज से जुड़े जटिल रोगों में उल्लेखनीय लाभ सामने आए थे। वर्ष 1997 से इसका व्यवस्थित और प्रलेखित उपचार प्रारंभ हुआ, और अब तक देश के विभिन्न राज्यों से आए 2675 से अधिक मरीज इससे लाभान्वित हो चुके हैं। भारत सरकार द्वारा इस औषधि को पैनक्रियाज रोगों की चिकित्सा हेतु पेटेंट भी प्रदान किया गया है, जो इस क्षेत्र में देश का पहला और विश्व का दूसरा पेटेंट माना जाता है।

इस औषधि के विकास का श्रेय पद्मश्री सम्मानित वैद्य बालेंदु प्रकाश को जाता है, जिन्हें यह ज्ञान अपने पिता स्वर्गीय वैद्य चंद्र प्रकाश से विरासत में मिला। पारंपरिक रूप से मिट्टी के चूल्हों और हांडियों में बनने वाली इस औषधि के निर्माण में अब आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों का सहारा लिया जा रहा है, ताकि गुणवत्ता और मानकीकरण सुनिश्चित किया जा सके।

रसशाला में अब एक्स-रे डिफ्रैक्टोमीटर, स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप, पार्टिकल साइज़ एनालाइज़र और पीएच मीटर जैसे अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग हो रहा है। इसी क्रम में आज कंप्यूटरीकृत क्लाउड-आधारित टेम्परेचर लॉगिंग सिस्टम स्थापित किया गया, जिससे भट्ठियों में पकाई जा रही हांडियों के भीतर तापमान की सटीक निगरानी संभव होगी। इस तकनीक के विकास में देहरादून स्थित UPES University के वैज्ञानिकों की अहम भूमिका रही।

इस आधुनिक उपकरण का उद्घाटन एसडीएम अरुण कुमार ने किया, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता बिलासपुर नगर निगम चेयरमैन चित्रक मित्तल ने की। उन्होंने कहा कि बिलासपुर जैसे क्षेत्र में हो रहा यह शोधकार्य पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।
कार्यक्रम में केएलए ग्रुप के एमडी अरुण अग्रवाल, UPES University की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अमृतांश, पीएचडी स्कॉलर हितेश सहित देश के 13 राज्यों से आए 25 पैनक्रियाज रोगी और उनके परिजन उपस्थित रहे। कार्यशाला में “अमर” औषधि के उपयोग, प्रभाव और रोगियों के अनुभवों पर विस्तार से चर्चा की गई।

अंत में रसशाला प्रबंधक सुनील शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। मंच संचालन वैद्य चंद्र प्रकाश कैंसर रिसर्च फाउंडेशन की वैज्ञानिक अधिकारी नेहा नेगी ने किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ उत्तराखंड के अध्यक्ष प्रदीप फुटेला, राजेश अग्रवाल, राजू गुंबर समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।