पहाड़ में ग्रामीणों को कैसे मिलेगी स्वास्थ्य सुविधा

हल्द्वानी, मुख्य संवाददाता : दूर-दराज से स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए लागू की गई प्रशासनिक प्रक्रिया और स्वास्थ्य विभाग से संबद्ध अस्पतालों के बजाय

पहाड़  में ग्रामीणों को कैसे मिलेगी स्वास्थ्य सुविधा

दराज के आयुष अस्पतालों में डॉक्टर नहीं, हल्द्वानी में जमावड़ा!
विभाग में चल रहा बड़ा खेल, मरीज कम डॉक्टर ज्यादा

 तैनात दुर्गम में जमे हैं सुगम क्षेत्र में, कैसे सुधरेगी व्यवस्था 

 सरकार के दावों की खुल गई पोल

हल्द्वानी, मुख्य संवाददाता : दूर-दराज से स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए लागू की गई प्रशासनिक प्रक्रिया और स्वास्थ्य विभाग से संबद्ध अस्पतालों के बजाय आयुष अस्पताल हल्द्वानी में जमावड़ा कर दिए गए हैं।
शहर के बीचों-बीच स्थित 50 बेड के आयुष अस्पताल हल्द्वानी में इन दिनों इलाज व्यवस्था बदहाल नहीं बल्कि “डॉक्टरों का खेल” चल रहा है। अस्पताल में औसतन प्रतिदिन मात्र 250 मरीजों की ओपीडी हो रही है, लेकिन उनके उपचार के लिए 12 डॉक्टर तैनात किए गए हैं।
जिनमें से नौ डॉक्टरों को दूरस्थ अस्पतालों से यहां संबद्ध किया गया है। हैरानी की बात यह है कि अधिकांश चिकित्सकों के निजी आवास हल्द्वानी शहर में हैं, ऐसे में वे चिकित्सकीय सेवा दूर-दराज जाकर करने को तैयार नहीं हैं।

मरीजों को लेकर मारामारी

अस्पताल में रोजाना करीब 250 मरीजों की ओपीडी होती है। ऐसे में दिन भर में एक डॉक्टर के हिस्से 20 से 25 मरीज आते हैं। अधिकांश मरीज पूर्व में उपचार लेने वाले मरीजों के कहने पर कुछ खास डॉक्टरों की ओपीडी में जाना पसंद करते हैं, जिसके चलते उनका दिन विवादों में ही गुजरता है।डॉक्टरों के निजी आवास हल्द्वानी में, शहर छोड़ने को तैयार नहीं पहाड़ों के अस्पतालों की कीमत पर शहर में डॉक्टरों की फौज खड़ी की जा रही है। बताया जाता है कि ग्रामीण, पर्वतीय और न्यूनतम सुविधा वाले क्षेत्रों के आयुर्वेदिक अस्पतालों को खाली कर  हल्द्वानी से संबद्ध किया गया है।

कर्मचारियों की भी संबद्धता

आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी को शिकायत पत्र भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि डॉक्टरों की कमी के कारण लोगों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। आयुष अस्पताल चिकित्सा के साथ दो फार्मासिस्ट, तीन सफाईकर्मी भी अस्पताल में संबद्ध किए गए हैं। जवाहर ज्योति में संचालित आयुर्वेदिक चिकित्सालय हल्द्वानी स्टाफ जिसमें डॉक्टर, फार्मासिस्ट, सफाईकर्मी, स्वागतकर्मी को भी आयुष अस्पताल से संबद्ध किया गया है।

बेस अस्पताल में एक डॉक्टर पर 150 मरीज

आयुष हॉस्पिटल से मात्र 50 मीटर की दूरी पर बेस अस्पताल स्थित है। इस अस्पताल में प्रतिदिन हड्डी रोग और वात रोग विभाग की ओपीडी में 150 से ज्यादा मरीज आते हैं। इन्हें एक डॉक्टर देखते हैं। वहीं नेत्र विभाग की ओपीडी में भी डॉक्टरों पर भारी दबाव है। पीआरडी चौकीदारों को चारधाम यात्रा के बजट पर रखा गया है। वहां सप्ताह में चार दिन ओपीडी देखी जाती है और बाकी दो दिन में करीब 6-8 ओपीडी की जाती है।

डॉ. एम.एस. गुंज्याल, जिला आयुर्वेदिक अस्पताल, नैनीताल ने कहा कि आयुष अस्पतालों में डॉक्टरों के पद सृजित किए गए थे। एक पद आयुर्वेदिक अस्पताल का भी सृजित होने के बाद कुछ तीन चिकित्सकों की नियमित तैनाती है। शेष न्यूनतम डॉक्टर-कर्मचारियों को संबद्ध किया गया है। नए पद सृजित करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।