बढ़ते गॉल ब्लैडर कैंसर पर लग सकती है लगाम, जरूरत है रोकथाम पर फोकस की

नई दिल्ली। भारत, विशेषकर उत्तर भारत के कई राज्यों में गॉल ब्लैडर (पित्ताशय) कैंसर तेजी से एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। चिंताजनक बात यह है

बढ़ते गॉल ब्लैडर कैंसर पर लग सकती है लगाम, जरूरत है रोकथाम पर फोकस की

वैद्य बालेन्दु प्रकाश

नई दिल्ली। भारत, विशेषकर उत्तर भारत के कई राज्यों में गॉल ब्लैडर (पित्ताशय) कैंसर तेजी से एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश मामलों में इस बीमारी का पता तब चलता है, जब कैंसर काफी आगे बढ़ चुका होता है। ऐसे में उपचार जटिल, महंगा और सीमित सफलता वाला साबित होता है।

लेकिन क्या इस कैंसर को रोका जा सकता है? मेरा मानना है कि इसका उत्तर काफी हद तक "हाँ" है, यदि हम केवल उपचार पर नहीं, बल्कि रोकथाम पर भी समान गंभीरता से काम करें। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान मानता है कि गॉल स्टोन (पित्त की पथरी), पित्ताशय की लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन, मोटापा, कुछ संक्रमण और आनुवंशिक कारण गॉल ब्लैडर कैंसर के प्रमुख जोखिम कारक हैं। हालांकि एक महत्वपूर्ण सवाल अभी भी पर्याप्त रूप से नहीं पूछा गया है—आखिर गॉल स्टोन बनते क्यों हैं?

लगभग चार दशकों के अपने चिकित्सकीय अनुभव में मैंने अनेक मरीजों में कुछ समान जीवनशैली संबंधी आदतें देखी हैं। इनमें देर रात तक जागना, सुबह का नाश्ता छोड़ देना, कई घंटों तक खाली पेट रहना, दिन की शुरुआत केवल चाय या कॉफी से करना तथा अत्यधिक कम वसा वाला भोजन लेना शामिल है। यह मेरे नैदानिक अवलोकन हैं, जिनकी पुष्टि के लिए व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है।

पित्ताशय के स्वास्थ्य को समझना होगा

रातभर पित्ताशय में पित्त जमा होता है। सुबह जब हम भोजन करते हैं, विशेषकर संतुलित मात्रा में स्वस्थ वसा का सेवन करते हैं, तो शरीर में बनने वाला हार्मोन कोलेसिस्टोकाइनिन (CCK) पित्ताशय को संकुचित होने का संकेत देता है। इससे पित्त छोटी आंत में पहुंचता है और वसा के पाचन में सहायता करता है।यदि सुबह भोजन नहीं किया जाए या भोजन में वसा की मात्रा बहुत कम हो, तो कुछ परिस्थितियों में पित्ताशय का संकुचन पर्याप्त नहीं हो पाता। बार-बार ऐसा होने पर पित्त का ठहराव, बाइल स्लज और आगे चलकर गॉल स्टोन बनने की संभावना बढ़ सकती है। यदि यह स्थिति वर्षों तक बनी रहे, तो दीर्घकालिक सूजन विकसित हो सकती है, जो कुछ लोगों में कैंसर के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार कर सकती है।

हर वसा नुकसानदायक नहीं

आज "लो-फैट" भोजन को अक्सर स्वास्थ्य का पर्याय मान लिया गया है, जबकि शरीर को संतुलित मात्रा में स्वस्थ वसा की आवश्यकता होती है। यही वसा पित्ताशय के सामान्य कार्य, हार्मोन निर्माण, कोशिकीय स्वास्थ्य और कई महत्वपूर्ण विटामिनों के अवशोषण के लिए जरूरी है।इसका मतलब यह नहीं कि अत्यधिक तला-भुना भोजन लिया जाए, बल्कि यह कि संतुलित और गुणवत्तापूर्ण वसा हमारे दैनिक आहार का आवश्यक हिस्सा होनी चाहिए।

क्या करें, क्या न करें

गॉल ब्लैडर कैंसर की रोकथाम के लिए कुछ सरल लेकिन महत्वपूर्ण कदम अपनाए जा सकते हैं—

- प्रतिदिन समय पर पौष्टिक नाश्ता करें।

- भोजन में संतुलित मात्रा में स्वस्थ वसा शामिल करें।

- लंबे समय तक खाली पेट रहने से बचें।

- केवल चाय या कॉफी के सहारे सुबह न बिताएं।

- नियमित व्यायाम करें और स्वस्थ वजन बनाए रखें।

- दाहिने ऊपरी पेट में बार-बार दर्द, तैलीय भोजन के बाद परेशानी या गॉल स्टोन की स्थिति में विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें।

- जिन मरीजों को शल्य चिकित्सा की आवश्यकता हो, वे अनावश्यक विलंब न करें।

भारत को करना होगा नेतृत्व

भारत उन देशों में शामिल है जहां गॉल ब्लैडर कैंसर अपेक्षाकृत अधिक पाया जाता है। इसलिए हमें केवल इलाज ही नहीं, बल्कि रोकथाम संबंधी शोध में भी नेतृत्व करना होगा।जरूरत इस बात की है कि बड़े स्तर पर वैज्ञानिक अध्ययन किए जाएं, ताकि यह समझा जा सके कि क्या नियमित नाश्ता, स्वस्थ वसा का सेवन और बेहतर जीवनशैली गॉल स्टोन तथा आगे चलकर गॉल ब्लैडर कैंसर के जोखिम को कम कर सकती है।आज आवश्यकता केवल गॉल ब्लैडर कैंसर का उपचार करने की नहीं, बल्कि उसके बनने की प्रक्रिया को समझने की है। यदि हम पित्ताशय के सामान्य कार्य को सुरक्षित रखने वाली जीवनशैली को बढ़ावा दें, जोखिम वाले लोगों की समय रहते पहचान करें और गॉल स्टोन बनने की प्रक्रिया को समझ सकें, तो भविष्य में गॉल ब्लैडर कैंसर के अनेक मामलों को रोका जा सकता है।संभव है कि भविष्य का सबसे सफल कैंसर उपचार वही हो, जिसे होने ही न दिया जाए।रोकथाम ही चिकित्सा का सर्वोच्च स्वरूप है।

— वैद्य बालेन्दु प्रकाश

पद्मश्री, आयुर्वेद चिकित्सक एवं शोधकर्ता

संस्थापक, वीपीसी कैंसर रिसर्च फाउंडेशन एवं पड़ाव – विशिष्ट आयुर्वेदिक चिकित्सा केंद्र