उत्तराखंड सहित उत्तर भारत में गॉलब्लैडर (पित्ताशय) कैंसर का बढ़ता खतरा, जागरूकता और समय पर जांच की आवश्यकता

रुद्रपुर/पंतनगर, 5 जुलाई 2026। हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों एवं राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार भारत विश्व के कुल गॉलब्लैडर (पित्ताशय) कैंसर के लगभग

उत्तराखंड सहित उत्तर भारत में गॉलब्लैडर (पित्ताशय) कैंसर का बढ़ता खतरा, जागरूकता और समय पर जांच की आवश्यकता

रुद्रपुर/पंतनगर, 5 जुलाई 2026। हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों एवं राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार भारत विश्व के कुल गॉलब्लैडर (पित्ताशय) कैंसर के लगभग 10% मामलों का योगदान देता है। सबसे अधिक चिंता का विषय यह है कि उत्तराखंड सहित सम्पूर्ण गंगा के मैदानी क्षेत्र (Gangetic Belt)—पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम एवं उत्तर-पूर्वी राज्यों—में इस कैंसर की दर देश के अन्य भागों की तुलना में कहीं अधिक है। वैज्ञानिक समीक्षाओं में उत्तराखंड को भी उच्च-जोखिम वाले भौगोलिक क्षेत्र का हिस्सा माना गया है।  

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड के लोगों को भी इस बढ़ते खतरे के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है, क्योंकि राज्य की भौगोलिक एवं जनसंख्या संबंधी विशेषताएँ उत्तर भारत के उसी उच्च-जोखिम क्षेत्र से जुड़ी हैं जहाँ गॉलब्लैडर कैंसर अपेक्षाकृत अधिक पाया जाता है।  

महिलाओं में अधिक खतरा

विगत दस वर्षों के शोध बताते हैं कि महिलाओं में यह कैंसर पुरुषों की तुलना में 2–3 गुना अधिक पाया जाता है। उत्तर-पूर्व भारत में महिलाओं में इसकी आयु-मानकीकृत दर (ASR) विश्व के सर्वाधिक स्तरों में शामिल है।

लगातार बढ़ रहा है बोझ

उपलब्ध राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार—

* वर्ष 2020 में भारत में लगभग 19,570 नए मामले दर्ज हुए।
* वर्ष 2022 में यह संख्या बढ़कर 21,780 हो गई।
* विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में भी इस रोग का बोझ बढ़ता रहेगा।  

किन लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए?

निम्न स्थितियाँ गॉलब्लैडर कैंसर का जोखिम बढ़ा सकती हैं—

* लंबे समय से पित्ताशय की पथरी
* बार-बार होने वाली पित्ताशय की सूजन
* मोटापा
* मधुमेह एवं मेटाबोलिक सिंड्रोम
* आनुवंशिक प्रवृत्ति
* उत्तराखंड सहित उत्तर भारत के उच्च-जोखिम क्षेत्रों में निवास

समय पर जांच से बच सकती है जान

यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से दाहिने ऊपरी पेट में दर्द, भोजन विशेषकर तैलीय भोजन के बाद तकलीफ, बार-बार पित्ताशय की पथरी की समस्या, वजन कम होना या पीलिया जैसे लक्षण हों, तो विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श लेना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान होने पर उपचार के परिणाम बेहतर होते हैं।

उत्तराखंड के लिए विशेष संदेश

उत्तराखंड में स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों एवं आम नागरिकों को गॉलब्लैडर कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने, पित्ताशय की पथरी वाले मरीजों की नियमित निगरानी तथा समय पर विशेषज्ञ जांच की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पर्वतीय और तराई दोनों क्षेत्रों में इस विषय पर जन-जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।

मुख्य संदेश

* भारत विश्व के लगभग 10% गॉलब्लैडर कैंसर मामलों का भार वहन करता है।
* उत्तराखंड भी उत्तर भारत के उस उच्च-जोखिम क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है जहाँ इस कैंसर की संभावना अपेक्षाकृत अधिक है।  
* महिलाओं में यह रोग पुरुषों की तुलना में 2–3 गुना अधिक पाया जाता है।
* पित्ताशय की पथरी इसका सबसे महत्वपूर्ण जोखिम कारक है।
* समय पर जांच, शीघ्र निदान और उचित उपचार से मृत्यु दर कम की जा सकती है।

“उत्तराखंड के लोगों के लिए संदेश है—यदि पित्ताशय की पथरी है या दाहिने ऊपरी पेट में बार-बार दर्द होता है, तो इसे सामान्य गैस या अपच समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर जांच जीवन बचा सकती है।”