IIT दिल्ली ऐलुमनी मीट, बेंगलुरु में आचार्य प्रशांत का प्रेरक संवाद
बेंगलुरु। IIT दिल्ली ऐलुमनी एसोसिएशन के बेंगलुरु चैप्टर ने आचार्य प्रशांत को एक विशेष इंटरैक्शन सत्र के लिए आमंत्रित किया। कार्यक्रम की शुरुआत चैप्टर
वरिष्ठ उद्योगपतियों और स्टार्टअप नेताओं ने की खुलकर चर्चा
बेंगलुरु। IIT दिल्ली ऐलुमनी एसोसिएशन के बेंगलुरु चैप्टर ने आचार्य प्रशांत को एक विशेष इंटरैक्शन सत्र के लिए आमंत्रित किया। कार्यक्रम की शुरुआत चैप्टर अध्यक्ष के स्वागत भाषण से हुई, जहां बड़ी संख्या में IIT ऐलुमनी, उद्यमी, टेक लीडर्स और वरिष्ठ प्रोफेशनल मौजूद रहे।
जैसे ही आचार्य प्रशांत मंच पर पहुँचे, कई इंडस्ट्री लीडर्स, स्टार्टअप फाउंडर्स, बुद्धिजीवी और अनुभवी प्रोफेशनल उनसे मिलने के लिए आगे आए। औपचारिक अभिवादन कुछ ही मिनटों में आत्मीय मुलाकात में तब्दील हो गया।
कार्यक्रम में 1970 और 1980 के दशक के वरिष्ठ आईआईटी पासआउट भी मौजूद थे, जो उम्र में आचार्य प्रशांत से कई वर्ष बड़े थे। एक बुज़ुर्ग ऐलुम्नस भावुक होकर बोले, “मैं चालीस साल बड़ा हूँ, लेकिन वरिष्ठ आप हैं। मुझे आपको आशीर्वाद देने दीजिए।” वहीं एक अन्य प्रतिभागी ने कहा, “आप IIT ने भारत को जो सबसे बड़ा उपहार दिया है।”
कार्यक्रम में शामिल अधिकांश लोग पहली बार आचार्य प्रशांत से आमने-सामने मिल रहे थे। सभी के मन में एक समान जिज्ञासा थी — “आपको यह सब करने की प्रेरणा कहाँ से मिलती है और यह ऊर्जा आती कहाँ से है?”
इसके बाद औपचारिक पैनल चर्चा शुरू हुई जिसमें करियर, लक्ष्य, अर्थव्यवस्था, किताबें और clarity पर चर्चा हुई। आचार्य प्रशांत के एक पुराने मित्र, जो अब एक सफल टेक स्टार्टअप चला रहे हैं, ने पैसे, प्रगति और सीमाओं पर महत्वपूर्ण सवाल रखा। एक अन्य प्रतिभागी ने वेगन जीवनशैली से जुड़े सामाजिक विरोध का अनुभव साझा किया और मार्गदर्शन मांगा।
आचार्य प्रशांत ने सभी प्रश्नों का सहजता, सरलता और गहनता से उत्तर दिया।
कार्यक्रम के दौरान आचार्य प्रशांत के बैचमेट्स के बच्चों ने उन्हें हाथ से बनी वेगन मोमबत्तियाँ भी भेंट कीं। अंत में प्रतिभागियों को स्मृति के रूप में Truth Without Apology पुस्तक प्रदान की गई।
इस कार्यक्रम ने IIT दिल्ली समुदाय में नए दृष्टिकोण, ऊर्जा और विचार की ताज़गी भर दी। उपस्थित लोगों का कहना था कि इस चर्चा का असर लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।


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