विधायक अरविन्द पांडेय के लेटर बम से उत्तराखंड में सियासी भूचाल
देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में इन दिनों एक पत्र ने ऐसा भूचाल ला दिया है, जिसकी गूंज देहरादून से लेकर दिल्ली तक सुनाई दे रही है। कांग्रेस प्रदेश
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच कराए
सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रदेश में तरह तरह की अटकलें
प्रदीप फुटेला
देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में इन दिनों एक पत्र ने ऐसा भूचाल ला दिया है, जिसकी गूंज देहरादून से लेकर दिल्ली तक सुनाई दे रही है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल द्वारा उठाए गए इस मुद्दे ने भाजपा सरकार को सीधे कठघरे में खड़ा कर दिया है। मामला गदरपुर विधायक अरविन्द पांडेय के उस कथित पत्र से जुड़ा है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
वायरल पत्र के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे “लेटर बम” करार देते हुए सरकार पर हमला बोल दिया है। गणेश गोदियाल ने कहा कि यह सिर्फ एक पत्र नहीं, बल्कि सत्ता के भीतर चल रही खींचतान और दबाव की राजनीति का खुला सबूत है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सत्ताधारी दल के ही विधायक इस तरह के आरोप लगा रहे हैं, तो आम जनता किस पर भरोसा करे?
पत्र में विधायक अरविन्द पांडेय ने दावा किया है कि उन्हें और उनके परिवार को लगातार राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए। इतना ही नहीं, पत्र में यह भी उल्लेख है कि उनके परिवार के बुजुर्ग और बीमार सदस्यों तक को नहीं बख्शा गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पत्र में 2025 और 2026 की कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा गया है कि सुनियोजित तरीके से उन्हें राजनीतिक रूप से खत्म करने की कोशिश की जा रही है। विधायक का आरोप है कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे पूरी तरह फर्जी हैं और इन्हें दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मीडिया संस्थानों को विज्ञापन के जरिए प्रभावित कर उनके खिलाफ नकारात्मक खबरें चलाई जा रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह मामला सिर्फ व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्ता के भीतर की दरार को भी उजागर करता है। भाजपा के भीतर इस तरह की असहमति का सार्वजनिक होना अपने आप में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
कांग्रेस ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लेते हुए सरकार पर सीधा हमला बोला है। गणेश गोदियाल ने कहा कि अगर एक विधायक खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा, तो राज्य की आम जनता की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
वहीं भाजपा की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई ठोस आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि पार्टी के कुछ नेताओं ने इसे “आंतरिक मामला” बताते हुए ज्यादा तूल न देने की बात कही है। लेकिन सच्चाई यह है कि यह मामला अब पार्टी के दायरे से बाहर निकलकर सार्वजनिक बहस का मुद्दा बन चुका है।
सोशल मीडिया पर भी यह पत्र तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे सियासी ड्रामा बता रहे हैं, तो कुछ इसे सिस्टम की सच्चाई उजागर करने वाला दस्तावेज मान रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या इस “लेटर बम” के बाद उत्तराखंड की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा? क्या सरकार इन आरोपों की जांच कराएगी या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
फिलहाल इतना तय है कि इस पत्र ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इसका असर और गहराने वाला है।


News Desk 

