उत्तराखंड कैबिनेट के बड़े फैसले: न्यायिक अधिकारियों को सस्ता लोन, पूर्व सैनिकों के लिए नई उद्यमी योजना
देहरादून। उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट बैठक में बुधवार को कई अहम फैसलों पर मुहर लगी। इन निर्णयों में न्यायिक अधिकारियों को वाहन खरीद के लिए सॉफ्ट लोन
किसानों से लेकर जवानों तक सभी को साधने का प्रयास
देहरादून। उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट बैठक में बुधवार को कई अहम फैसलों पर मुहर लगी। इन निर्णयों में न्यायिक अधिकारियों को वाहन खरीद के लिए सॉफ्ट लोन, पूर्व सैनिकों के लिए विशेष उद्यमी योजना, गेहूं खरीद पर MSP लागू करने सहित प्रशासनिक सुधार से जुड़े कई प्रस्ताव शामिल हैं।
सबसे चर्चित फैसलों में न्याय विभाग से जुड़ा निर्णय रहा, जिसके तहत राज्य के न्यायिक अधिकारियों को वाहन खरीदने के लिए 10 लाख रुपये तक का सॉफ्ट लोन दिया जाएगा। इसमें इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 4 प्रतिशत और अन्य वाहनों के लिए 5 प्रतिशत ब्याज दर तय की गई है।
ऊर्जा विभाग के अंतर्गत प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में भी राहत दी गई है। 31 मार्च 2025 तक जिन उपभोक्ताओं के सोलर संयंत्र लग चुके हैं, उन्हें राज्य सरकार की सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा।
उद्योग विभाग की ‘उत्तराखण्ड वीर उद्यमी योजना 2026’ को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है। इस योजना के तहत पूर्व सैनिकों और पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत लक्ष्य आरक्षित रहेगा। साथ ही, उन्हें अतिरिक्त 5 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ भी मिलेगा। पर्वतीय क्षेत्रों में 30 प्रतिशत तक और मैदानी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रस्ताव के तहत रबी विपणन सत्र 2026-27 में गेहूं खरीद के लिए 2585 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू किया जाएगा। राज्य ने 2.2 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। साथ ही गेहूं और धान खरीद पर मंडी शुल्क 2 प्रतिशत ही रखने का निर्णय लिया गया है।
गृह विभाग के अंतर्गत डिजिटाइजेशन और कंप्यूटर आधारित जांच व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षण देने हेतु नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञों की नियुक्ति को भी मंजूरी दी गई है। इसके अलावा होमगार्ड्स सेवा नियमावली में संशोधन कर पदोन्नति की राह भी साफ की गई है।
कार्मिक विभाग से जुड़े निर्णय में पुलिस और अन्य वर्दीधारी पदों की भर्ती के लिए पूर्व में लागू नियमावली को अगले तीन वर्षों तक यथावत रखने का फैसला लिया गया है।
वन विभाग में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पद के लिए न्यूनतम सेवा अवधि 25 वर्ष से घटाकर 22 वर्ष कर दी गई है। वहीं नियोजन विभाग में राज्य योजना आयोग की जगह ‘सेतु आयोग’ के गठन को मंजूरी दी गई है।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय से संबंधित प्रावधानों के नियमन हेतु परिनियम को भी कैबिनेट ने स्वीकृति दी है।
इसके अलावा, माध्यमिक शिक्षा विभाग के एक प्रस्ताव पर कैबिनेट ने उपसमिति गठित करने का निर्णय लिया है, जबकि विधानसभा सत्र 2026 के सत्रावसान को भी औपचारिक मंजूरी दे दी गई है।


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