गांधी पार्क में सरस आजीविका मेला: विद्यालयी गायन प्रतियोगिता एवं रंगमंच प्रशिक्षण से निखरती प्रतिभाएं

रूद्रपुर 19 फरवरी, 2026 (सू0वि0)- गांधी पार्क में आयोजित सरस आजीविका मेला में गुरूवार को विद्यालयी शिक्षा विभाग की गायन प्रतियोगिता सम्पन्न हुई।

गांधी पार्क में सरस आजीविका मेला: विद्यालयी गायन प्रतियोगिता एवं रंगमंच प्रशिक्षण से निखरती प्रतिभाएं

रूद्रपुर 19 फरवरी, 2026 (सू0वि0)- गांधी पार्क में आयोजित सरस आजीविका मेला में गुरूवार को विद्यालयी शिक्षा विभाग की गायन प्रतियोगिता सम्पन्न हुई। गायन प्रतियोगिता में विकासखण्ड रूद्रपुर, गदरपुर एवं सितारगंज के विभिन्न विद्यालयों की टीमों के द्वारा प्रतिभाग किया गया। विभिन्न विद्यालयों के छात्र छात्राओं द्वारा गायन प्रतियोगिता के दौरान देशभक्ति गीत, प्रेरणा गीत एवं लोक गीतों का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया गया। निर्णायक मण्डल द्वारा प्राप्त अंकों के आधार पर गायन प्रतियोगिता में गुरूकुल इण्टर कॉलेज ट्रांजिट कैम्प रूद्रपुर की टीम ने प्रथम स्थान, रा०बा०इ०का० पन्तनगर की टीम ने द्वितीय स्थान एवं गुरूनानक बालिका इण्टर कॉलेज रूद्रपुर की टीम ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। गायन प्रतियोगिता की नोडल अधिकारी शुभा रावत प्रधानाचार्या रा०बा०इ०का० फाजिलपुर महरौला ने सभी विजयी टीमों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दी। प्रतियोगिता की समाप्ति के पश्चात् प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त टीमों को पुरस्कृत किया गया तथा समस्त प्रतिभागी छात्र छात्राओं को प्रतिभागिता प्रमाण पत्र वितरित किये गये।
        राष्ट्रपति पुरुस्कार प्राप्त रंग कर्मी ललित पोखरिया ने बताया कि रंगमंच अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम तो है ही यह बच्चों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास का भी अतुलनीय माध्यम है। एक व्यक्ति के गुणात्मक विकास में यह साहित्य, संगीत, नृत्य, चित्रकला आदि माध्यमों से कई गुना अधिक परिणामपरक कार्य कर सकता है। इसीलिए बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए अभिनय के प्रशिक्षण को पाठ्यक्रम का अंग बनाने की बात की जाती है। 

मनुष्य के व्यक्तित्व के चार आयाम होते हैं -वाणी और शरीर भौतिक आयाम है तथा मन और मस्तिष्क अभौतिक आयाम। अभिनय प्रशिक्षण से जुड़े अनेक अभ्यास व्यक्तित्व के इन चारों आयामों को अभिनयपरक बनाने के साथ-साथ एक आदर्श व्यक्तित्व का भी निर्माण भी तैयार करते हैं। शरीर को स्वस्थ रखने और वाणी को प्रभावशाली बनाने के साथ-साथ उच्चारण की शुद्धता और स्पष्टता का विकास करते हैं। धैर्य, एकाग्रता, अनुशासन, एकता, समानता, चिन्तनशीलता, विश्लेषण शक्ति, तर्क शक्ति, कल्पनाशीलता, रचनात्मकता और नेतृत्व क्षमता का विकास करते हैं। अभिनय का कार्य आनन्ददायक होने के कारण बच्चे पूर्ण मनोयोग से उसका प्रशिक्षण प्राप्त करते हुए उपरोक्त समस्त गुणों का विकास कर सकते हैं। उपरोक्त उद्देश्यों को ध्यान में रखकर आज बच्चों को रंगमंच कला का सामाजिक महत्व बताने के साथ-साथ उससे जुड़े अभ्यासों का सैद्धान्तिक और क्रियात्मक परिचय कराया गया। 
       इस अवसर पर पी डी हिमांशु जोशी,जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नन्दिनी तोमर, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी हेमन्त मौर्य, गायन प्रतियोगिता के कार्यक्रम समन्वयक देवेन्द्र सिंह चौहान, निर्णायक नंदिता सरकार व इशिता सरकार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारीगण उपस्थित रहे। प्रतियोगिता का संचालन संयुक्त रूप से विभु कृष्णा,हरीश दनाई एवं संजीव बुधौरी द्वारा किया गया।