उत्तराखंड: आखिर कांग्रेस क्यों मदनी का नाम लेने में हिचक रही है?
बीजेपी का आरोप है कि हरीश रावत सरकार के दौरान इसके लिए पुनः प्रयास हुए किंतु ट्रस्ट के मनसूबे आई एम ए की वजह से सफल नहीं हुए।
- शेखुल एजुकेशनल चेरिटेबल ट्रस्टी है महमूद असद मदनी,जो खोलना चाहते थे देहरादून में दारुल उलूम जैसी यूनिवर्सिटी
- प्रशासन के टीम पहुंची विवादित स्थल पर भूमि दस्तावेजों की पड़ताल करने
चित्र दारुल उलूम मदनी
देहरादून : सहसपुर क्षेत्र में भारतीय सैन्य अकादमी के पास शेखुल एजुकेशनल चेरिटेबल ट्रस्ट की 20 एकड़ भूमि का विवाद इन दिनों सुर्खियों में है।
उक्त भूमि ट्रस्ट द्वारा देवबंद की दारुल उलूम जैसा विशाल भव्य इस्लामिक शिक्षण संस्थान या यूनिवर्सिटी खोले जाने के लिए ली थी और इसकी एन ओ सी भारतीय सैन्य अकादमी की आपत्ति के बाद ठंडे बस्ते में चली गई।
उक्त ट्रस्ट के ट्रस्टी जमीयत उलेमा हिंद और दारुल उलूम देवबंद के स्कॉलर डॉ महमूद असद मदनी है, जोकि उत्तराखंड के विषय में दिए गए अपने बयानों की वजह से विवादों में रहे है।
बीजेपी का आरोप है कि हरीश रावत सरकार के दौरान इसके लिए पुनः प्रयास हुए किंतु ट्रस्ट के मनसूबे आई एम ए की वजह से सफल नहीं हुए।
बीजेपी ने 2022 में कांग्रेस द्वारा पछुवा दून यानी सहसपुर में मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाए जाने का मुद्दा चुनावी मुद्दा भी बना। जिसे लेकर हरीश रावत से लेकर सभी कांग्रेस खंडन करते रहे। किंतु ये मुद्दा अब प्रमाण सहित सामने आ जाने से कांग्रेस असहज की स्थिति में पहुंच गई है, बीजेपी लगातार कांग्रेस को इस मुद्दे पर घेर रही है। कांग्रेस नेता भी इस विषय को स्वीकार कर रहे है कि हां तिवारी सरकार के दाएं उक्त ट्रस्ट की भूमि पर विवाद उठे थे।
बीजेपी ने कांग्रेस पर किया प्रहार
भाजपा के प्रवक्ता और विधायक विनोद चमोली ने आज कांग्रेस से इस प्रकरण पर कई सवाल पूछे ,उन्होंने कहा कि कांग्रेस क्यों नहीं कहती शेखुल एजुकेशनल चेरिटेबल ट्रस्ट महमूद असद मदनी का है ?
जिसका पता 1 बहादुर शाह जफर मार्ग नई दिल्ली बताया गया है।
श्री चमोली ने पूछा कांग्रेस क्यों नहीं इस बात को स्वीकार करती कि देहरादून में 20 एकड़ भूमि पर कांग्रेस सरकार दारुल उलूम की तरह इस्लामिक शिक्षण संस्थान या मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोले जाने के लिए महमूद मदनी के प्रयासों का समर्थन किया ?
उन्होंने कहा कि कांग्रेस बताए कि क्या महमूद असद मदनी वो शख्स है जोकि हल्द्वानी बनभूलपुरा में सरकारी भूमि पर अब्दुल मलिक के अवैध कब्जे को मदरसा की भूमि बताता है ? क्या महमूद मदनी वही शख्स है जोकि बनभूलपुरा की अवैध कब्जे को मदरसा मस्जिद की भूमि पर कब्जा हटाने के विरोध में गृह मंत्री श्री अमित शाह को पत्र लिखता है ?
उन्होंने पूछा कि क्या महमूद असद मदनी वो ही व्यक्ति नहीं है जोकि जमीयत उलेमा हिंद का कर्ताधर्ता है और बनभूलपुरा हिंसा के आरोपियों को हाई कोर्ट में वकील पैरवी का खर्चा उठाता है ?
श्री चमोली ने कांग्रेस से सवाल कर पूछा कि क्या महमूद असद मदनी वो ही व्यक्ति है जोकि उत्तराखंड के कई मदरसों को अपनी संस्थाओं से फंडिंग करवाता है?
विहिप का बयान:- इस मामलेवमे अब विश्व हिंदू परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रविदेव आनंद ने भी सवाल उठाए है और ये कहा है जमीयत उलेमा हिंद के महमूद असद मदनी देवभूमि उत्तराखंड में हमेशा अशांति फैलाने वालों को संरक्षण देती आई है हल्द्वानी बनभूलपुरा हिंसा के आरोपियों को आर्थिक मदद देने वाले डॉ मदनी उत्तराखंड में डेमोग्राफी चेंज के जनक है। आई एम ए से लगी भूमि पर मदनी, दारुल उलूम की तरह इस्लामिक शैक्षिक संस्थान बनाने जा रहे थे जोकि उनकी यहां डेमोग्राफी चेंज का हिस्सा थी।
प्रशासन की टीम पहुंची:- सहसपुर धौलास ग्राम क्षेत्र डॉ मदनी के शेखुल ट्रस्ट की भूमि के दस्तावेजों की जांच और जमीनी नापजोख करने एसडीएम विकास नगर विनोद कुमार के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची। पुलिस के दल बल के साथ पहुंचे उप जिलाधिकारी ने पटवारियों ,कानूनगो आदि की मदद से जमीन पर फीते आदि लगाए। एसडीएम ने इस मामले में कहा कि डीएम के निर्देशों के तक अभी इस प्रकरण की जांच पड़ताल की जा रही है। इसकी रिपोर्ट उनके माध्यम से शासन को प्रेषित की जाएगी।
सीएम धामी का बयान
इस मामले में हमने प्रशासनिक जांच के आदेश दिए है,कांग्रेस की मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाए जाने की योजना का सच सामने आ गया है। हमारीब सरकार इस मामले में जो भी कानूनी पहलु होगा उसके अनुसार विधिपूर्वक कारवाई करेगी।


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