पत्रकारों की स्वतंत्रता और सम्मान: लोकतंत्र की असली कसौटी संतोष यदु

 रायपुर छत्तीसगढ़ : हर वर्ष 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ—पत्रकारिता

पत्रकारों की स्वतंत्रता और सम्मान: लोकतंत्र की असली कसौटी संतोष यदु

राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ ने विश्व प्रेस दिवस पर लिए बडा निर्णय

 दिल्ली के जंतर मतंर मे विरोधी  प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति को दिए है ज्ञापन 

 रायपुर छत्तीसगढ़ : हर वर्ष 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ—पत्रकारिता—की स्थिति और चुनौतियों पर गंभीर चिंतन का अवसर है।

आज जब देश तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है, तब यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या हमारे पत्रकार वास्तव में स्वतंत्र, सुरक्षित और सम्मानित हैं?

पत्रकार समाज का वह वर्ग है जो बिना किसी स्वार्थ के सच को सामने लाने का कार्य करता है। सत्ता से सवाल पूछना, आम जनता की आवाज को मंच देना और व्यवस्था की कमियों को उजागर करना—यही पत्रकारिता का मूल धर्म है। लेकिन विडंबना यह है कि जो पत्रकार समाज को जागरूक करता है, वही आज कई जगह असुरक्षित और उपेक्षित महसूस करता है।

देश में आज भी पत्रकारों के लिए एक समान नीति का अभाव है। अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियम लागू हैं, जिससे पत्रकारों को कई प्रकार की प्रशासनिक और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि “वन नेशन, वन इलेक्शन” जैसे विषय पर चर्चा हो सकती है, तो पत्रकारों के लिए “वन नेशन, वन पॉलिसी” क्यों नहीं?

सबसे बड़ी चिंता का विषय पत्रकारों की सुरक्षा है। कई मामलों में पत्रकारों पर हमले होते हैं, उन्हें धमकाया जाता है, लेकिन उनके संरक्षण के लिए ठोस और प्रभावी कानून का अभाव साफ नजर आता है। ऐसी स्थिति में निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता करना आसान नहीं रह जाता।

इसके साथ ही, देश के कई हिस्सों में पत्रकारों के लिए बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। पत्रकार भवन, बीमा, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की कमी उनके जीवन को और कठिन बना देती है।

समय की मांग है कि सरकार पत्रकारों को केवल “चौथा स्तंभ” कहकर सम्मानित करने के बजाय उन्हें वास्तविक अधिकार और सुरक्षा भी प्रदान करे। पत्रकारों को संवैधानिक दर्जा देने, एक समान राष्ट्रीय नीति लागू करने और उनकी सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

क्योंकि जब पत्रकार सुरक्षित और स्वतंत्र होंगे, तभी लोकतंत्र मजबूत होगा। और जब लोकतंत्र मजबूत होगा, तभी देश सही मायनों में प्रगति करेगा।

संतोष कुमार यदु
संपादक, खोज खबर छत्तीसगढ़ एवं 
राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश संयोजक