गदरपुर में ग्रीष्मकालीन धान पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई
गदरपुर (ऊधमसिंह नगर)। जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर एवं मुख्य विकास अधिकारी द्वारा प्रदत्त निर्देशों के अनुपालन में ग्रीष्मकालीन धान की रोकथाम को लेकर प्रशासन
गदरपुर (ऊधमसिंह नगर)। जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर एवं मुख्य विकास अधिकारी द्वारा प्रदत्त निर्देशों के अनुपालन में ग्रीष्मकालीन धान की रोकथाम को लेकर प्रशासन ने तहसील गदरपुर क्षेत्र में सख्त कार्रवाई की। यह अभियान उपजिलाधिकारी ऋचा सिंह के नेतृत्व में चलाया गया, जिसमें तहसीलदार लीना चंद्रा धामी तथा राजस्व विभाग के कर्मचारी एवं कृषि विभाग की टीम मौके पर मौजूद रही।
प्रशासनिक टीम ने सबसे पहले मदनपुर क्षेत्र का निरीक्षण किया, जहां लगभग 0.151 हेक्टेयर भूमि पर तैयार की गई ग्रीष्मकालीन धान की नर्सरी को नष्ट किया गया। जांच में पाया गया कि बिना अनुमति नर्सरी तैयार की गई थी। इसके साथ ही आगे रोपाई के लिए रखे गए करीब एक कुंतल धान के बीज को भी जब्त कर लिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शासन के निर्देशानुसार ग्रीष्मकालीन धान की बुवाई पर रोक है और इसकी अनुमति केवल विशेष परिस्थितियों में ही दी जा सकती है।
इसके बाद टीम बरीराई क्षेत्र पहुंची, जहां लगभग 0.405 हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई धान की पौध को नष्ट करने की कार्रवाई की गई। इस दौरान कुछ किसानों ने कार्रवाई का विरोध भी किया। किसानों का कहना था कि वे पूर्व वर्षों की तरह खेती कर रहे हैं, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें समझाया कि इस बार जल संरक्षण और भूजल स्तर को ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
काफी संवाद और समझाइश के बाद किसानों ने सहायक कृषि अधिकारी श्री अनिल अरोड़ा को लिखित शपथ पत्र सौंपा। शपथ पत्र में उल्लेख किया गया कि यदि 7 मार्च तक शासन से ग्रीष्मकालीन धान की अनुमति प्राप्त नहीं होती है, तो वे स्वयं पौध को नष्ट कर देंगे या प्रशासन द्वारा की जाने वाली कार्रवाई पर कोई आपत्ति नहीं करेंगे। इसके बाद स्थिति शांत हुई।
उपजिलाधिकारी ऋचा सिंह ने स्पष्ट कहा कि ग्रीष्मकालीन धान की अनुमति केवल उन क्षेत्रों में दी जाएगी जहां भूमि अत्यधिक दलदली हो और अन्य कोई फसल उगाना संभव न हो। उन्होंने किसानों से अपील की कि बिना अनुमति धान की बुवाई न करें। तहसीलदार लीना चंद्रा धामी ने भी कहा कि शासनादेश का उल्लंघन करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि ग्रीष्मकालीन धान में अत्यधिक जल की आवश्यकता होती है, जिससे भूजल स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जल संरक्षण और फसल चक्र संतुलन को बनाए रखने के उद्देश्य से यह सख्त कदम उठाया जा रहा है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आगे भी ऐसे मामलों में लगातार निरीक्षण और कार्रवाई जारी रहेगी।


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