नगर पालिका में कथित भ्रष्टाचार! पहले से बनी सड़क पर फिर टेंडर, उठे सवाल
गदरपुर। गदरपुर नगर पालिका एक बार फिर विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में है। इस बार मामला वार्ड नंबर-
गदरपुर। गदरपुर नगर पालिका एक बार फिर विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में है। इस बार मामला वार्ड नंबर-3 स्थित पुरातन चामुंडा मंदिर के पास इंटरलॉकिंग टाइल्स निर्माण कार्य की निविदा से जुड़ा है, जहां पहले से बेहतर स्थिति में इंटरलॉकिंग टाइल्स मौजूद होने के बावजूद दोबारा निर्माण कार्य के लिए टेंडर जारी किए जाने पर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस मामले का खुलासा कांग्रेस नगर अध्यक्ष सिद्धार्थ भुसरी ने पत्रकार वार्ता के दौरान किया। उन्होंने संबंधित स्थल की तस्वीरें भी साझा कीं, जिनमें प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि उक्त स्थान पर तत्काल किसी नए निर्माण कार्य की आवश्यकता नहीं दिखाई देती। मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, नगर पालिका गदरपुर द्वारा 7 मई को विभिन्न समाचार पत्रों में 93 विकास कार्यों की निविदाएं प्रकाशित कराई गई थीं। इन निविदाओं में क्रम संख्या-28 पर वार्ड नंबर-3 स्थित पुरातन चामुंडा मंदिर के पास इंटरलॉकिंग टाइल्स निर्माण कार्य का उल्लेख किया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित स्थान पर पहले से ही इंटरलॉकिंग टाइल्स अच्छी स्थिति में मौजूद हैं और वहां किसी नए निर्माण कार्य की आवश्यकता नहीं है। इसके बावजूद उसी स्थान के लिए दोबारा निविदा जारी होने से नगर पालिका की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता और बिना आवश्यकता वाले कार्यों को भी टेंडर में शामिल किया जा रहा है।
गौरतलब है कि नगर पालिका अध्यक्ष मनोज गुंबर मिंटू पहले भी नगर की सफाई व्यवस्था को लेकर विवादों में घिर चुके हैं। विपक्ष पूर्व में सफाई व्यवस्था से जुड़े टेंडरों में पक्षपात और अनियमितताओं के आरोप लगा चुका है। अब करीब 8 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की निविदाओं को लेकर भी कई गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
विपक्षी नेताओं और स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन स्थानों पर पहले से कार्य पूरे हैं, वहां दोबारा निर्माण कार्य दिखाकर सरकारी धन खर्च करने की तैयारी की जा रही है। इससे पूरी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
स्थानीय नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि जब सड़क और इंटरलॉकिंग पहले से अच्छी स्थिति में है तो आखिर नए निर्माण कार्य की आवश्यकता क्यों पड़ी। लोगों का कहना है कि यदि विकास कार्यों की वास्तविक जरूरतों का सर्वे कर प्राथमिकता तय की जाए, तो नगर के कई अन्य क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सकता है।
अब पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सभी विकास कार्यों और निविदाओं की तकनीकी जांच कराई जाए, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।


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