भ्रष्ट अधिकारी राष्ट्र की जड़ों को खोखला करने वाली “सफेद दीमक” हैं – ज्यूडिशियल काउंसिल
नई दिल्ली। (न्यूज़ वार्ता) : ज्यूडिशियल काउंसिल ने देशभर में सार्वजनिक प्रशासन एवं सरकारी संस्थानों में बढ़ते भ्रष्टाचार पर गहरी चिंता व्यक्त की है। ज्यूडिशियल काउंसिल
नई दिल्ली। (न्यूज़ वार्ता) : ज्यूडिशियल काउंसिल ने देशभर में सार्वजनिक प्रशासन एवं सरकारी संस्थानों में बढ़ते भ्रष्टाचार पर गहरी चिंता व्यक्त की है। ज्यूडिशियल काउंसिल ने कहा है कि भ्रष्ट अधिकारी “सफेद दीमक” की तरह कार्य कर रहे हैं, जो चुपचाप और व्यवस्थित रूप से राष्ट्र की नींव को कमजोर कर रहे हैं, जनता के विश्वास को नष्ट कर रहे हैं, सुशासन को क्षति पहुंचा रहे हैं तथा भारत की प्रगति में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।
इस विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन श्री राजीव अग्निहोत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार आज राष्ट्र के समक्ष खड़ी सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बन चुका है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बाहरी खतरे दिखाई देते हैं और अक्सर तत्काल ध्यान आकर्षित करते हैं, लेकिन भ्रष्टाचार भीतर ही भीतर कार्य करता है तथा देश की संस्थाओं, अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को दीर्घकालिक क्षति पहुंचाता है।
श्री राजीव अग्निहोत्री ने कहा, “भ्रष्ट अधिकारी सफेद दीमक से कम नहीं हैं। जिस प्रकार दीमक सबसे मजबूत संरचनाओं को भीतर से धीरे-धीरे नष्ट कर देती है, उसी प्रकार भ्रष्ट अधिकारी शासन, न्याय व्यवस्था और जनकल्याण की नींव को कमजोर करते हैं। उनके कार्य नागरिकों से उनके अधिकार छीनते हैं, योग्य व्यक्तियों को अवसरों से वंचित करते हैं तथा कानून के शासन को कमजोर करते हैं।”
ज्यूडिशियल काउंसिल ने कहा कि भ्रष्टाचार केवल सरकार को आर्थिक हानि ही नहीं पहुंचाता, बल्कि व्यापक जन-पीड़ा भी उत्पन्न करता है। रिश्वतखोरी, पक्षपात, पद के दुरुपयोग तथा प्रशासनिक अनियमितताओं के कारण नागरिकों के लिए निर्धारित आवश्यक सेवाएं अक्सर उन लोगों तक नहीं पहुंच पातीं जिन्हें उनकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है। ईमानदार नागरिकों को अनावश्यक कठिनाइयों, देरी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, जबकि भ्रष्ट लोगों का एक छोटा वर्ग समाज की कीमत पर लाभ उठाता है।
श्री अग्निहोत्री ने आगे कहा कि भ्रष्टाचार लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार में खोया गया प्रत्येक रुपया जनकल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, आधारभूत संरचना और राष्ट्रीय विकास से चुराया गया रुपया है। भ्रष्टाचार योग्यता को नष्ट करता है, ईमानदारी को हतोत्साहित करता है और उन संस्थाओं में जनता के विश्वास को कमजोर करता है जो जनता की सेवा के लिए बनाई गई हैं।”
ज्यूडिशियल काउंसिल ने जोर देकर कहा कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई केवल जांच एजेंसियों और कानून-प्रवर्तन संस्थाओं पर नहीं छोड़ी जा सकती। इसके लिए प्रत्येक नागरिक, नागरिक समाज संगठनों, पेशेवर संस्थाओं और सार्वजनिक निकायों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। नागरिकों को भ्रष्टाचार की शिकायत करने, पारदर्शिता की मांग करने तथा प्रत्येक स्तर पर नैतिक और जवाबदेह शासन का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
ज्यूडिशियल काउंसिल ने मजबूत जवाबदेही तंत्र, व्हिसलब्लोअर्स की सुरक्षा, भ्रष्टाचार के मामलों की त्वरित जांच तथा निजी लाभ के लिए सार्वजनिक पद का दुरुपयोग करने वालों के लिए कठोर दंड की आवश्यकता पर भी बल दिया। काउंसिल के अनुसार, लोकसेवकों को यह स्मरण रखना चाहिए कि वे सार्वजनिक संसाधनों के संरक्षक हैं तथा ईमानदारी, निष्पक्षता और जवाबदेही के साथ कार्य करना उनका कर्तव्य है।
श्री राजीव अग्निहोत्री ने कहा, “एक ईमानदार अधिकारी राष्ट्र को मजबूत बनाता है, जबकि एक भ्रष्ट अधिकारी उसे कमजोर करता है। भारत का भविष्य केवल आर्थिक विकास और तकनीकी प्रगति पर ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक जिम्मेदारियां निभाने वाले व्यक्तियों के नैतिक चरित्र पर भी निर्भर करता है।”
ज्यूडिशियल काउंसिल ने शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और मीडिया से नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने तथा भ्रष्टाचार के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। काउंसिल का मानना है कि सत्यनिष्ठा और नैतिकता की संस्कृति का विकास बचपन से ही किया जाना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां भ्रष्टाचार के प्रत्येक स्वरूप को अस्वीकार करें।
अपने संकल्प को दोहराते हुए ज्यूडिशियल काउंसिल ने घोषणा की कि वह पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जन-जागरूकता अभियान, सेमिनार, विधिक साक्षरता कार्यक्रम तथा सामुदायिक संपर्क पहलें लगातार आयोजित करती रहेगी। काउंसिल ने नागरिकों से भ्रष्टाचार के विरुद्ध राष्ट्रव्यापी आंदोलन में एकजुट होने तथा स्वच्छ, पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था के निर्माण में सहयोग करने की अपील की।
अपने समापन वक्तव्य में श्री राजीव अग्निहोत्री ने कहा:
“भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि एक नैतिक और राष्ट्रीय कर्तव्य है। यदि हमें एक सशक्त, समृद्ध और न्यायपूर्ण भारत का निर्माण करना है, तो हमें सार्वजनिक जीवन के प्रत्येक स्तर से भ्रष्टाचार का उन्मूलन करना होगा। भ्रष्ट अधिकारी राष्ट्र की जड़ों को खोखला करने वाली सफेद दीमक हैं। समय आ गया है कि नागरिक, संस्थाएं और सार्वजनिक प्राधिकरण एकजुट होकर इस अभिशाप का हमेशा के लिए अंत करें।”


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