क्या आपका नाश्ता पित्ताशय (Gallbladder) को जगा रहा है या सुला रहा है?
आज अधिकांश लोग सुबह का नाश्ता या तो छोड़ देते हैं, या केवल चाय, कॉफी, बिस्कुट अथवा अत्यंत कम वसा वाला भोजन करके दिन की शुरुआत करते हैं।
आज अधिकांश लोग सुबह का नाश्ता या तो छोड़ देते हैं, या केवल चाय, कॉफी, बिस्कुट अथवा अत्यंत कम वसा वाला भोजन करके दिन की शुरुआत करते हैं। आधुनिक शरीर-विज्ञान बताता है कि यह आदत हमारे पाचन तंत्र पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।
रातभर लगभग 10–12 घंटे के उपवास के दौरान पित्ताशय में पित्त (Bile) एकत्रित होकर गाढ़ा हो जाता है। सुबह का पहला भोजन इस संग्रहित पित्त को बाहर निकालने का प्राकृतिक संकेत देता है।
यदि नाश्ते में थोड़ी मात्रा में स्वस्थ वसा (Healthy Fat) हो, तो छोटी आँत से कोलेसिस्टोकाइनिन (CCK) नामक हार्मोन निकलता है। यही हार्मोन पित्ताशय को संकुचित करता है, जिससे पित्त आँत में पहुँचता है और अग्न्याशय भी पाचन एंजाइम छोड़ना प्रारम्भ करता है।
वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार लगभग 10–15 ग्राम स्वस्थ वसा अधिकांश लोगों में पर्याप्त पित्ताशय संकुचन उत्पन्न कर सकती है।
यह वसा निम्न स्रोतों से प्राप्त हो सकती है—
* दो अंडे
* मूंगफली
* तिल
* अलसी
* मिश्रित मेवे
* सीमित मात्रा में घी या मक्खन (15 ग्राम )
पित्त स्वयं पेट के अम्ल को पूरी तरह निष्क्रिय नहीं करता। आधुनिक विज्ञान के अनुसार यह कार्य मुख्यतः अग्न्याशय द्वारा बनने वाले बाइकार्बोनेट द्वारा किया जाता है। पित्त और अग्न्याशयी स्राव मिलकर छोटी आँत में ऐसा वातावरण बनाते हैं जहाँ भोजन का उचित पाचन हो सके।
विगत लगभग पाँच दशकों के अपने चिकित्सकीय अनुभव में हमने पाया है कि दीर्घकालिक अग्नाशयशोथ (Chronic Pancreatitis) के अनेक रोगियों में देर रात तक जागना, सुबह का नाश्ता छोड़ना तथा अनियमित भोजन अत्यंत सामान्य जीवनशैली का हिस्सा रहा है। यह एक महत्वपूर्ण चिकित्सकीय अवलोकन है।
हालाँकि यह अभी वैज्ञानिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं है कि केवल नाश्ता छोड़ने से अग्नाशयशोथ होता है, फिर भी यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण शोध प्रश्न अवश्य है कि क्या वर्षों तक पित्ताशय का पर्याप्त संकुचन न होना, पित्त का ठहराव तथा अनियमित पाचन आगे चलकर पित्त-पथरी अथवा अग्नाशय संबंधी रोगों में योगदान दे सकते हैं।
आयुर्वेद भी समय पर भोजन करने पर विशेष बल देता है। नियमित समय पर संतुलित नाश्ता केवल ऊर्जा ही नहीं देता, बल्कि सम्पूर्ण पाचन तंत्र की दैनिक जैविक घड़ी (Digestive Rhythm) को पुनः सक्रिय करता है।
लेखक
वैद्य बालेन्दु प्रकाश
पद्मश्री (1999)
पाँच दशकों के चिकित्सकीय अनुभव एवं अवलोकनों पर आधारित
वैद्य चन्द्र प्रकाश कैंसर रिसर्च फाउंडेशन (VCPCRF)


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