दक्षिण भारत को नुकसान नहीं, फायदा होगा: परिसीमन विधेयक 2026 पर अमित शाह का लोकसभा में बड़ा बयान
नई दिल्ली, 16 अप्रैल 2026। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने लोकसभा में परिसीमन विधेयक 2026, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और संघ
नई दिल्ली, 16 अप्रैल 2026। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने लोकसभा में परिसीमन विधेयक 2026, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान साफ कहा कि नए परिसीमन से किसी भी राज्य, खासकर दक्षिण भारत के राज्यों के साथ कोई अन्याय नहीं होगा। उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि दक्षिण भारत की राजनीतिक ताकत घटेगी।
अमित शाह ने कहा कि यह “झूठा नैरेटिव” फैलाया जा रहा है कि परिसीमन से दक्षिण भारत कमजोर होगा, जबकि हकीकत उलटी है। अभी दक्षिण भारत के पांच राज्यों के कुल 129 सांसद हैं, जो इस विधेयक के बाद बढ़कर 195 हो जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने Delimitation Commission Act में कोई बदलाव नहीं किया है, बल्कि पुराने कानून को ज्यों का त्यों दोहराया है।
उन्होंने बताया कि लोकसभा सीटों की अधिकतम सीमा 850 रखी गई है, लेकिन वास्तविक संख्या 816 होगी। जैसे अभी संवैधानिक सीमा 550 है, जबकि वर्तमान लोकसभा में 543 सीटें हैं, उसी तरह यह भी एक ऊपरी सीमा है।
दक्षिण राज्यों को कितना लाभ?
तमिलनाडु: 39 से बढ़कर 59 सीटें
कर्नाटक: 28 से बढ़कर 42 सीटें
आंध्र प्रदेश: 25 से बढ़कर 38 सीटें
तेलंगाना: 17 से बढ़कर 26 सीटें
केरल: 20 से बढ़कर 30 सीटें
अमित शाह ने विशेष रूप से तमिलनाडु को आश्वस्त करते हुए कहा, “मैं तमिलनाडु की जनता को भरोसा दिलाता हूं कि आपकी शक्ति कम नहीं, बल्कि बढ़ रही है।”
2029 से पहले लागू नहीं होगा असर
गृह मंत्री ने साफ कहा कि 2029 तक होने वाले सभी चुनाव पुरानी सीटों और पुरानी व्यवस्था के तहत ही होंगे। अभी तमिलनाडु या पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में चल रहे चुनावों पर इस कानून का कोई असर नहीं पड़ेगा।
जाति जनगणना पर भी स्पष्टता
उन्होंने जनगणना प्रक्रिया समझाते हुए कहा कि जनगणना दो चरणों में होती है—पहले घरों की गणना, फिर व्यक्तियों की। अभी पहला चरण चल रहा है, जिसमें घरों की गणना हो रही है और घरों की कोई जाति नहीं होती, इसलिए फॉर्म में जाति का कॉलम नहीं है। जब व्यक्तियों की गणना शुरू होगी, तब जाति जनगणना का प्रश्न शामिल होगा।
यह बयान ऐसे समय आया है जब परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत में राजनीतिक चिंता बढ़ रही थी। सरकार अब यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि नई व्यवस्था में प्रतिनिधित्व घटेगा नहीं, बल्कि बढ़ेगा।


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