आयुर्वेद एवं समन्वित चिकित्सा से रूमेटॉइड आर्थराइटिस में बेहतर परिणाम : अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित
लखनऊ स्थित आयुर्वेद-अर्थराइटिस ट्रीटमेंट एंड एडवांस्ड रिसर्च सेंटर तथा किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न एक महत्वपूर्ण शोध
लखनऊ स्थित आयुर्वेद-अर्थराइटिस ट्रीटमेंट एंड एडवांस्ड रिसर्च सेंटर तथा किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न एक महत्वपूर्ण शोध अध्ययन में यह पाया गया है कि रूमेटॉइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis) के उपचार में आयुर्वेदिक चिकित्सा तथा आयुर्वेद एवं आधुनिक चिकित्सा के समन्वित प्रयोग से केवल आधुनिक चिकित्सा की तुलना में बेहतर परिणाम प्राप्त हुए हैं।
यह शोध हाल ही में प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल Journal of Ayurveda and Integrative Medicine (2026) में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन का शीर्षक है —
“Integrated and Ayurveda standalone interventions compared with standalone modern care in Rheumatoid arthritis”
अध्ययन में ऐसे रोगियों को शामिल किया गया जो पहले आधुनिक चिकित्सा ले चुके थे तथा बाद में या तो केवल आयुर्वेदिक चिकित्सा की ओर आए अथवा आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुर्वेद को जोड़ा गया। शोध में रोग की सक्रियता (Disease Activity), दर्द, सूजन, ESR तथा DAS-28 जैसे मानकों का तुलनात्मक मूल्यांकन किया गया।
शोध के प्रमुख निष्कर्षों के अनुसार:
- केवल आधुनिक चिकित्सा लेने वाले समूह में उल्लेखनीय सुधार नहीं देखा गया।
- आयुर्वेदिक चिकित्सा लेने वाले समूह में दर्द, सूजन एवं रोग सक्रियता में सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण सुधार पाया गया।
- आयुर्वेद एवं आधुनिक चिकित्सा के संयुक्त (Integrative) प्रयोग से सबसे बेहतर परिणाम प्राप्त हुए।
- अध्ययन के दौरान किसी गंभीर दुष्प्रभाव की सूचना नहीं मिली।
शोधकर्ताओं के अनुसार यह अध्ययन भारत में “Integrative Rheumatology” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा यह दर्शाता है कि आयुर्वेद आधारित समग्र चिकित्सा पद्धति रूमेटॉइड आर्थराइटिस जैसे जटिल रोगों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अध्ययन में प्रयुक्त आयुर्वेदिक उपचार में अमावात के पारंपरिक सिद्धांतों के अनुसार औषधियाँ, स्वेदन, आहार-विहार एवं जीवनशैली सुधार सम्मिलित थे।
शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि भविष्य में बड़े स्तर पर नियंत्रित अध्ययनों की आवश्यकता है ताकि आयुर्वेद एवं समन्वित चिकित्सा की प्रभावशीलता को और अधिक वैज्ञानिक रूप से स्थापित किया जा सके।
यह अध्ययन न केवल आयुर्वेद की संभावनाओं को रेखांकित करता है बल्कि “एक राष्ट्र – एक समन्वित स्वास्थ्य प्रणाली” की अवधारणा को भी बल प्रदान करता है।


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