शाही कऱ्हा नदी मूर्ति स्नान, मध्यरात्रि पालकी प्रस्थान एवं नगर परिक्रमा के साथ त्रिकाल सोमवती यात्रा उत्सव संपन्न

जेजुरी (प्रतिनिधि): महाराष्ट्र के कुलदैवत भगवान खंडोबा की नगरी जेजुरी में दीर्घ अंतराल के बाद आयोजित सोमवती अमावस्या यात्रा उत्सव श्रद्धा और भक्ति के वातावरण

शाही कऱ्हा नदी मूर्ति स्नान, मध्यरात्रि पालकी प्रस्थान एवं नगर परिक्रमा के साथ त्रिकाल सोमवती यात्रा उत्सव संपन्न

जेजुरी (प्रतिनिधि): महाराष्ट्र के कुलदैवत भगवान खंडोबा की नगरी जेजुरी में दीर्घ अंतराल के बाद आयोजित सोमवती अमावस्या यात्रा उत्सव श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। मध्यरात्रि पालकी प्रस्थान, प्रातःकाल कऱ्हा नदी में शाही मूर्ति स्नान तथा नगर परिक्रमा के साथ त्रिकाल दर्शन का लाभ लाखों श्रद्धालुओं ने प्राप्त किया।

शनिवार से ही देश के विभिन्न राज्यों एवं महाराष्ट्र के अनेक जिलों से श्रद्धालुओं का जेजुरी आगमन शुरू हो गया था। सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर मध्यरात्रि में देऊळवाड़ा से भगवान खंडोबा की पालकी को पारंपरिक विधि से प्रस्थान कराया गया। स्थानीय इनामदार, सरदार एवं पेशवा मानकरियों की परंपरा के अनुसार संकेत मिलने के बाद रात्रि दो बजे पालकी यात्रा कऱ्हा नदी की ओर रवाना हुई।

प्रातः सूर्योदय के समय श्री मार्तंड भैरव की पवित्र मूर्तियों का कऱ्हा नदी में विधिवत शाही स्नान कराया गया। “सदानंदाचा येळकोट” के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा। गुरव, पुजारी, वीर कोळी एवं गडशी समाज द्वारा धार्मिक विधियां संपन्न की गईं। इसके पश्चात ग्रामस्थों, खांदेकरी, मानकरी एवं सेवाकार्यों से जुड़े श्रद्धालुओं ने परंपरा अनुसार पालकी को कंधा देकर सेवा का सौभाग्य प्राप्त किया।

शाही स्नान के बाद पालकी नगर परिक्रमा के लिए रवाना हुई और विभिन्न मार्गों से होते हुए पुनः जेजुरी गढ़ की ओर प्रस्थान किया। लाखों श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक यात्रा के दर्शन किए। पालकी मार्ग पर अनेक स्थानों पर पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं ने भगवान खंडोबा का स्वागत किया।

इस वर्ष मिलावटी भंडारे पर प्रतिबंध होने के कारण सीमित मात्रा में ही शुद्ध भंडारे का उपयोग किया गया, जिससे श्रद्धालुओं ने संतोष व्यक्त किया। महंगाई, ईंधन मूल्य वृद्धि तथा वर्षा की प्रतीक्षा जैसी परिस्थितियों के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु यात्रा में शामिल हुए।

पालकी मार्ग पर रंभाऊशी पिंपळ, फुलाई माळ, जयाद्री शक्तिपीठ, जानाई मंदिर, होळकर वाडा, गोसावी मठ एवं छत्री मंदिर जैसे प्रमुख स्थानों पर पालकी का पारंपरिक स्वागत किया गया। कऱ्हा नदी के पवित्र जल में अपने आराध्य देव का स्नान दर्शन कर श्रद्धालुओं ने स्वयं को धन्य माना।

श्री मार्तंडदेव संस्थान ट्रस्ट, जेजुरी पुलिस प्रशासन, नगरपालिका तथा स्थानीय नागरिकों के संयुक्त प्रयासों से यह विशाल यात्रा उत्सव शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित एवं भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। “सदानंदाचा येळकोट” के जयघोष से संपूर्ण जेजुरी नगरी भक्तिरस में सराबोर हो गई