पाकिस्तान सरकार और फौज पर मौलाना का बड़ा हमला?
पाकिस्तान इन दिनों राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक बदहाली और आंतरिक अशांति के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। एक ओर बलूचिस्तान में बढ़ता हुआ खून खराबा ,
अश्वनी कुमार
पूर्व ब्यूरो चीफ आजतक, जम्मू
पाकिस्तान इन दिनों राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक बदहाली और आंतरिक अशांति के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। एक ओर बलूचिस्तान में बढ़ता हुआ खून खराबा , पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर(पीओजेके) में पाकिस्तान से आजादी लेने की बढ़ती मांग और खैबर पख्तूनख्वा (केपीके ) में सरकार विरोधी आंदोलन तेज़ हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के भीतर से भी सत्ता और सेना पर सवाल उठने लगे हैं।
इसी कड़ी में जमात- उलेमा-ए-इस्लाम (फज़ल) के प्रमुख और पाकिस्तान नेशनल असेंबली के सदस्य,मौलाना फज़लुर रहमान और बालोचिस्तान नेशनल पार्टी के चीफ और पूर्व मुख्यमंत्री, अख्तर मैंगाल ने शाबाज़ शरीफ सरकार और पाकिस्तान की सेना पर तीखा हमला किया है.
मौलाना फज़ल रहमान ने तीखे पन में कहा है कि पाकिस्तान की स्थिति दिन ब दिन लगातार बिगड़ती जा रही है और सरकार जनता की समस्याओं का समाधान करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है और फौज के अफसर बड़े बड़े बंगलौ में बैठकर हुकम जारी कर रहे है.
भारत - पाक विभाजन के बाद, पाकिस्तान में हमेशा फौज का हमेशा दबदबा रहा है. पाकिस्तान में जिस किसी की भी पार्टी की सरकार बने मगर दबदबा वहां आर्मी चीफ का ही चलता है. इसी लिए वहां करीब 33 साल तक फौज के तहतका पलट करने के बाद जनरल अयूब खान, जनरल जिया उल हक़, जनरल परवेज़ मुशार्राफ और जनरल यहया खान की हकुमते बनी.
पाकिस्तान में यह आम चीज हो गई है कि वहां प्रधानमंत्री चुने जाते है, हटाए जाते है, जेल भेज दिए जाते है और बाद में उनको देश निकाले का हुकम भी दिया जाता है. वहां पर राजनितिक पार्टियों का उबराना और कुछ समय के बाद खत्म हो जाना एक आम बात है. लेकिन आखिर में पाक फौज ही वहां सुप्रीम है.
राजनीतिक एक्सपर्टस का मानना है कि जबकि पाकिस्तान में सब को मालूम है कि वहां फील्ड मार्शल आसिफ मुनीर आजकल सबसे ज्यादा ताकतवर जनरल है तो मौलाना फज़ल उल रहमान ने क्यों आर्मी चीफ और प्रधानमंत्री, शाबाज़ शरीफ को ललकारा है ? क्या वह मुनीर और शाहबाज़ शरीफ से नाराज़ हैँ या बालोचिस्तान में लगी आग ,खयबर पाखंटूंखवा ( के पी के ) में पॉश्तो लोगो का रिवोल्ट , पाक -अधिकृत जम्मू कश्मीर में आजादी की मांग और पाकिस्तान - अफगान दुरांड लाइन बॉर्डर पर दोनों तरफ से हमलो से मौलाना परेशान है.
मौलाना ने क्यों पंजाब के कसूर इलाके में कहा कि फौज से 85 प्रतिशत बालोचिस्तान और पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर हाथ से निकाल चूका है?. मौलाना पिछले छह महीनों से शांत बैठा था और पिछले तीस सालो से पाक आर्मी के साथ अच्छे रिश्ते बनाकर रखे थे लेकिन एक दम फील्ड मार्शल आसिफ मुनीर को चैलेंज करने का क्या कारण ही सकता है? .
विशेषयज्ञयो का कहना है एक कारण यह हो सकता है कि हाल ही में पाकिस्तानी आर्मी चीफ, जनरल आसिफ मुनीर ने आह्वान किया था कि पाक - अफगान बॉर्डर, बालोचिस्तान और केपीके मेंउनके काफ़ी जवान मारे जा रहे है इस लिए इन इलाकों मे लड़ने के लिए नये लशकर तैयार किये जाये .
जनरल आसिफ मुनीर का यह बयान मोलाना को दिल में लगा जिस पर मौलाना फज़ल रहमान ने पाकिस्तानी जनरल पर अपना गुस्सा फोडा और उनको जवाब दिया कि आप पाकिस्तान में गैर नहीं हो. आप भी यही के हो. लेकिन आपको मुल्क के अन्दर रहना है. मेरे लिए भी एक दायरा है. पार्लियामेंट का भी एक धायरां है. फौज का भी एक धायरां है . आपको एक ज़िम्मेदारी दे के रखी हुईं है. मुल्क उजड़ रहा हैं.
मौलाना ने आर्य चीफ, आसिफ मुनीर को यहाँ तक कह दिया कि हमारे टेक्सो से आप तन्खा लेते हो और बच्चों को मरवाने के लिए हमें कहते हो कि लश्कर बनाओ . हम यह नहीं करेंगे, क्योंकि बेल्ट और वर्दी आपने पहनी है. तनख्वाह आप लेते हो. मैंने कोई तन्खा नहीं ली.आपको पाकिस्तान की सुरक्षा सोपी गयी है .क्या आपकी मर्ज़ी से पाकिस्तान में सरकारे बनेगी या टूटे गई . हम यह नहीं करने देंगे. सियासत किसी और से करो.अगर आपको सियासत ही करनी है तो वर्दी उतारो और चुनावों में उतरो. देखते है आपको कितने लोग वोट देते है .
ईरान और ukariane में हज़ारो फौजी लडते लडते मारे गये लेकिन उन्होंने सरकार को बनाने या गिराने में कोई रोल नहीं दिखाया. आपने नो महीने की फौज में ट्रेनिंग ली है. आप भी ईरान और ukrainine फौज की तरह लड़ो . हम क्यों पाकिस्तान में लस्कर तैयार करें. क्या हमें आने वाली नसल को खून खराबे में रखना है.
मौलाना ने पाकिस्तानी फौज को यहाँ तक यह भी बोल दिया है कि पाकिस्तान मकसूर बन कर रह गयी है और यहाँ के हुकमनाम भी मकसूर है. हम पाकिस्तान को अमेरिका और यूरोप के सामने बिकने नहीं देंगे और यह मै आर्मी चीफ को साफ करना चाहता हूँ.
राजनीतिक एक्सपर्टस का मानना है कि पिछले कुछ अरसे से पाकिस्तान के अधिकतर इलाकों के चल रहे खूनख़राबे से मौलना काफ़ी खफा है और साथ मे वह शाहबाज़ शरीफ सरकार और फौज से कुछ अरसे से काफ़ी दूर हो गये है. उनसे कोई राय नही ली जा रही है और ज़रुरत के वक़त मौलाना को इस्तेमाल किया जाता रहा है.
माना जा रहा है कि मौलाना ने आजकल एक अंडरस्टैंडिंग के तहत जेल नेता, इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-इ -इंसाफ पार्टी ( पी टी आई ) के साथ गठबंदन कर लिया है जिससे उनकी और पीटी आई फौज और शाहबाज़ शरीफ पर इकठे होकर हमला कर सके,क्योंकि इमरान खान भी तो फौज के पीड़ित है.
बालोचिस्तान नेशनल पार्टी के चीफ, अख्तर मैंगाल ने नेशनल असेंबली से त्याग पत्र दे कर बालोचिस्तान को आज़ाद करने की मांग कर दी है. उनका आरोप है कि बालोचिस्तान का मामला सियासी था. लेकिन इसको फौजी मामला बना दिया गया है और वहां ताकत का इस्तिमाल किया जा रहा है. बालोचिस्तान में फौज ने गांव के गाँव जला दिए है. लाशें जाला कर राख कर दी गई है.
जलते हुए, पाक - अधिकृत जम्मू कश्मीर विधानसभा के लिए 53 सीटों के लिए 27 जुलाई को चुनाव होने जा रहे है. मौलाना फज़ल -उल - रहमान की नज़र भी पीओ जेके चुनावों पर भी है क्योंकि उनकी पार्टी वहां से चुनाव लड़ने जा रही है. मुज़फराबाद, मीरपुर,बिम्बर, पलंदरी, रावलाकोट और कोटली पूरी तरह से फौज ने छावनी बनाकर रखा हुआ है.
पाक - अधिकृत जम्मू कश्मीर दूसरा बालोचिस्तान बन चूका है. पाकिस्तानी सरकार मासूम लोगो को गोलियों का निशाना बनाकर वहां दहशत का माहोल बना कर रखा है. उनको ऐसा लग रहा है कि जैसे कि फौज पर कोई बड़ा हमला होने वाला है. पाकिस्तान सरकार के लिए आज पीओजेके का हर sनागरिक आतंकवादी है क्योंकि वह अपने अधिकारों के लिए लड़ रहा है.
पाक -अधिकृत जम्मू कश्मीर की जॉइंट आवामी एक्शन कमिटी ने सरकार को अल्टीमेट दे रखा है कि 21 जुलाई की डेडलाइन से पहले अगर उनकी 38 मांगे मज़ूर नहीं की गई, तो इस बार सरकार के साथ उनकी आर पार की लड़ाई शुरू होगी . धरने और जलूस पिछले एक महीने से चल रहे है जिनमे 40 के करीब वहां के निहाते नागरिक मारे जा चुके है .
पीओजेके में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी ( पी पी पी ) की सरकार में इतना खौफ ज़दा हो चुकी है कि उन्होंने पाकिस्तान सरकार से हज़ारो की तादात में अतिरिक्त फेडरल कांस्टेबलरी (एफ सी ) के जवानों, पाकिस्तानी रेंजर्स और पंजाब पुलिस को वहां तैनात कर दिया है.
पाकिस्तानी फौज , पुलिस, एफसी और रेंजर आजकल रात को रावलाकोट, मीरपुर और मुज़फराबाद इलाकों में दहशत का माहौल बनाकर रखा हुआ है. हज़ारो की तादात में जॉइंट आवामी एक्शन कमिटी के कार्यकर्ताओं और युववो की पकड़ दकड़ जारी है. लोगो में दहशत फैलाने के लिए रात को आँसूगैस के गोले और गोलिया चलाई जा रही है.
सरकार ने इस सारे बवाल और अशांति के लिए जॉइंट आवामी एक्शन कमिटी को ज़िम्मेदार ठहरा रही है. लेकिन दूसरी तरफ सरकार उनकी ज़ायज़ अधिकारों को कुचलने के लिए क्रैक डाउन शुरू कर दिया है.
दरअसल, जॉइंट आवामी एक्शन कमिटी पिछले कई महीनों से पीओजेके में बिजली के भारी बिलो, आटे - दाल जैसी बुन्याधी चीज़ो की किलत, महगाई के खिलाफ, और यहाँ कि विधानसभा में 12 जम्मू कश्मीर के रिफ्यूजी के लिए रखी गई सीटों को खत्म किया जाये. जॉइंट आवामी एक्शन कमिटी का आरोप है कि पीओजेके सरकार उनकी डिमांड्स को एक तरफ पूरा नहीं कर पा रही और दूसरी तरफ उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन को कुचलने में लगी हुईं है.
जॉइंट आवामी एक्शन कमिटी का आरोप है कि सरकार ने 12 विधानसभा सीटों की वजह से पिछले 8 सालो में पीओजेके में पांच बार सरकार को बदल दिया. क्योंकि सरकार बनाने की चाबी जनता के पास नहीं बल्किन इस्लामाबाद के पास है.
पीओजेके की आवाम ने खुलेतौर पार पाकिस्तान सरकार से आजादी मांगी है और उनका इस्लामाबाद से कोई लेना देना नहीं है. यही हाल गिलगित - बाल्टीस्तान का भी है. वहां के लोग भी पाकिस्तान के साथ नहीं रहना चाहते और उनकी मांग है कि कारगिल की तरफ से पुराना बॉर्डर रूट खोला जाये जिससे वह अपने रिश्तेदारों से कारगिल में मिल सके..
आज जिस तरह से पिछले 78 सालो में हमारे यहाँ जम्मू कश्मीर में तरक्की हो रही है उसके मुक़ाबले में पीओ जेके में कुछ भी नहीं हुआ. हमारे यहाँ जम्मू कश्मीर में 13 मेडिकल कॉलेज है जबकि पीओजेके में केवल चार मेडिकल कॉलेज अभी तक बनाये गये है और उनमे केवल 600 एमबीबीएस के छात्रों का एडमिशन होता है. जबकि हमारे यहाँ जम्मू कश्मीर में करीब 1600 से भी ज्यादा एमबीबीएस के स्टूडेंट्स को हर साल दाखिला मिलता है जिनमे 50 प्रतिशत महिलाओ को एडमिशन होती है.
पीओजेके के सेल्फ स्टाइल प्रधानमंत्री, फैसल मोहम्मद राठौर फौज की कटपुतली सरकार बनकर रह गई है.
पाकिस्तानी एक्सर्ट का कहना है कि पाकिस्तान एक लाश रह गई है और पाकिस्तानी फौज के जनरल उसको गीदो की तरह खा रहे है. आज पाकिस्तान में फौजी जनरल की तुती चलती है. आज पाकिस्तान का फौजी अपने देश को चूस रहा है और गरीब का गरीब ही बनता जा रहा है.
ब्रिटिश सांसद, बॉब ब्लैकमेन ने भी सांसद में पीओजेके के ताज़ा हालातो बारे चिन्ता ज़ाहिर की है कि पाकिस्तान की फौज बेक़सूर लोगो को गोलियों का निशाना बना रही है. अब देखना यह है कि आने वाले दिनों मे पाकिस्तानी फौज, मौलाना फज़ल रहमान और अख्तर मैंगाल से कैसे निपटेगी और सभी सुभो में आजादी की मांग को रोक पाएगी या फिर वहां फौजी रूल होने वाला है.


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