सह्याद्री की चोटी पर प्रकृति महोत्सव; सैकड़ों की उपस्थिति, बीज-भंडारे की उड़ान
पाटण/पुरंदर (प्रतिनिधि): राज्य के प्रख्यात तीर्थक्षेत्र जेजुरी (जयाद्री) से हर वर्ष परंपरागत रूप से निकलने वाली ‘जयाद्री से सह्याद्री’ पदयात्रा इस वर्ष भी श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुई।
परंपरा और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी संदेश
पाटण/पुरंदर (प्रतिनिधि): राज्य के प्रख्यात तीर्थक्षेत्र जेजुरी (जयाद्री) से हर वर्ष परंपरागत रूप से निकलने वाली ‘जयाद्री से सह्याद्री’ पदयात्रा इस वर्ष भी श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुई। श्री जानाई देवी अन्नदान पदयात्रा पश्चिमी सह्याद्री पर्वतमाला की पर्वतश्रृंखलाओं में, पाटण घाटी के सडावाघापुर–काऊदरा क्षेत्र में, समुद्र तल से लगभग 1300 मीटर ऊँचाई पर मंगलवार को पहुंचते ही सामूहिक प्रकृति पूजा का शुभारंभ हुआ।
करीब डेढ़ सौ किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे जेजुरीवासियों के साथ पाटण, सातारा और कराड क्षेत्र के स्थानीय श्रद्धालु व प्रकृति प्रेमियों ने पर्वतशिखर पर भंडारा, गुलाल और विभिन्न वृक्षों के बीजों की उड़ान कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। “विश्व का पर्यावरण सुरक्षित रहे और समस्त सृष्टि समृद्ध बने,” इस प्रार्थना के साथ प्रकृति को नारियल अर्पित किया गया। सैकड़ों प्रकृति प्रेमी इस वन महोत्सव में सहभागी बने।
इस अवसर पर पाटण के युवा भाजपा नेता याज्ञसिंह पाटणकर, तारळे के युवा कार्यकर्ता ओंकार भस्मे, सह्याद्री सखी मंच राष्ट्रवादी जेजुरी शहर अध्यक्ष रमेश लेंडे, नम्रता निरगुडे, अर्चना क्षीरसागर, नगरसेवक रोहित खोमणे, समीर मोरे सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।
श्री जानाई देवी निःशुल्क अन्नदान ट्रस्ट के माध्यम से संपूर्ण पालखी समारोह तथा प्रकृति पूजा स्थल पर पंचक्रोशी के पर्वतवासी बंधुओं को मिष्ठान्न भोजन कराया गया। पर्वतीय महिलाओं को साड़ी-चोली भेंट कर सम्मानित किया गया। जेजुरी ग्रामस्थ, गुरव पुजारी, वीर, कोळी, घडशी, खान्देकरी, मानकरी, सेवेकरी, श्री मार्तंड देवस्थान ट्रस्ट समिति सदस्य तथा संत नागू माली के वंशजों सहित समस्त माली समाज बड़ी संख्या में उपस्थित रहा। विदेशों में नौकरी-व्यवसाय के कारण स्थायिक हुए जेजुरीवासी भी इस यात्रा में शामिल हुए।
इस अवसर पर पाटण, कराड और तारळे के प्रकृति प्रेमी, वन विभाग के अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, वन्यजीव अभ्यासक और पक्षीमित्रों ने भी सहभागिता दर्ज की। संपूर्ण परिसर भक्तिमय और प्रकृतिमय वातावरण से सराबोर हो गया। पारंपरिक धार्मिक आरती और ‘वसुंधरा आरती’ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ तथा पालखी समारोह निवकणे मुकाम पर अपने मूल स्थान पर विश्राम हेतु पहुंचा।
हाल के समय में पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति संवर्धन के प्रति जागरूकता सुदृढ़ करने के लिए ऐसी सामुदायिक प्रकृति पूजा को विशेष महत्व प्राप्त हुआ है। आध्यात्मिक आस्था और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक यह आयोजन समाज में एकता और प्रकृति से जुड़ाव को और मजबूत करता दिखाई दिया।
पदयात्रा में श्रद्धालुओं को निःशुल्क सुविधाएं
‘जयाद्री से सह्याद्री’ पदयात्रा में पिछले बत्तीस वर्षों से हजारों श्रद्धालुओं को निःशुल्क अन्नदान सेवा श्री जानाई देवी अन्नदान ट्रस्ट द्वारा प्रदान की जा रही है। जेजुरी नगर के उद्यमी, व्यापारी, गुरव पुजारी, मानकरी, खान्देकरी और ग्रामस्थ इस सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
इस पदयात्रा का आयोजन राजेंद्र बारभाई, देविदास कुंभार, संजय निरगुडे, रत्नाकर मोरे, अक्षय गोडसे, औदुंबर शिंदे, शेखर बारभाई, संदीप कुतवळ, बापू वीरकर, रवी सावित्रे, सुरेश सातभाई, सतीश कदम, दिलीप बारभाई, शब्बीर तांबोळी, संजय शेवाळे, सोनाली दोडके, खोमणे बंधु, शरद फडतरे, रमेश बयास, विजय झगडे, मोहन आचारी आदि के परिश्रम से संपन्न होता है। साथ ही श्री मार्तंड देवस्थान के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनमें डॉ. प्रमोद वाघ, डॉ. पोटे, डॉ. नितीन केंजळे, डॉ. लव्हे, डॉ. गुळवे और सुधीर ताम्हाणे आदि का सहयोग रहता है।


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