गदरपुर में सियासी तापमान हाई: अरविंद पांडे के घर पहुंचे महेंद्र भट्ट

गदरपुर। उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों जो कुछ चल रहा है, वह सामान्य नहीं दिख रहा। सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण के मुद्दे के बीच प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र

गदरपुर में सियासी तापमान हाई: अरविंद पांडे के घर पहुंचे महेंद्र भट्ट

अतिक्रमण विवाद के बीच बंद कमरे में चर्चा

गदरपुर। उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों जो कुछ चल रहा है, वह सामान्य नहीं दिख रहा। सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण के मुद्दे के बीच प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का खुद विधायक अरविंद पांडे के आवास पर पहुंचना कई संकेत दे गया है। लगभग एक घंटे तक चली बंद कमरे की बैठक ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
अतिक्रमण पर टकराव
मामले की जड़ में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का मुद्दा है। विधायक अरविंद पांडे ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि प्रशासन पहले स्पष्ट रूप से उस भूमि को चिन्हित करे जो अतिक्रमण के दायरे में आती है। उनका तर्क है कि सीमांकन की प्रक्रिया पारदर्शी हो और यदि सरकारी भूमि पाई जाती है तो प्रशासन कार्रवाई करे।
वहीं प्रशासन का कहना है कि राजस्व अभिलेख स्पष्ट हैं और संबंधित पक्ष को स्वयं अतिक्रमण हटा देना चाहिए। अधिकारियों के अनुसार, कानून सब पर समान रूप से लागू होता है और प्रक्रिया पहले ही स्पष्ट है।
यहीं से विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया। एक ओर विधायक सीमांकन की मांग कर रहे हैं, दूसरी ओर प्रशासन स्वयं कार्रवाई की अपेक्षा जता रहा है।
   ऐसे संवेदनशील समय में प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का विधायक के आवास पर पहुंचना सिर्फ शिष्टाचार भेंट मान लेना आसान नहीं है। राजनीतिक गलियारों में इसे “डैमेज कंट्रोल” से लेकर “रणनीतिक संवाद” तक कई नजरियों से देखा जा रहा है।
हाल के महीनों में अरविंद पांडे अपने स्वतंत्र तेवरों को लेकर चर्चा में रहे हैं। प्रशासनिक मुद्दों पर खुली चुनौती और बयानबाजी ने संकेत दिया था कि वे अपनी राजनीतिक स्थिति को लेकर स्पष्ट संदेश दे रहे हैं। ऐसे में संगठन के शीर्ष नेतृत्व का खुद पहल करना यह दर्शाता है कि संवाद को प्राथमिकता दी जा रही है। बताते चलें कि विधायक अरविन्द पांडेय तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बीच छत्तीस का आंकड़ा चल रहा है। विधायक अरविन्द पांडेय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बेहद खफा हैं।
  यह मुलाकात संगठन और सरकार के बीच संतुलन साधने की कोशिश है? या फिर अतिक्रमण विवाद के बीच राजनीतिक समन्वय की रणनीति?दोनों नेताओं ने मुलाकात को सामान्य बताया है। पांडे ने प्रदेश अध्यक्ष को अपना नेता बताते हुए उनके आगमन को सौभाग्य कहा, जबकि भट्ट ने इसे नियमित संवाद करार दिया। लेकिन राजनीति में समय और स्थान दोनों बहुत कुछ कह देते हैं।
 गदरपुर क्षेत्र में यह घटनाक्रम चर्चा का केंद्र बना हुआ है। समर्थक इसे सकारात्मक संकेत बता रहे हैं, जबकि विरोधी खेमे में इसे राजनीतिक समीकरणों के पुनर्गठन के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल स्पष्ट तौर पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना तय है कि अतिक्रमण विवाद और शीर्ष नेतृत्व की यह मुलाकात मिलकर एक बड़े राजनीतिक संदेश की ओर इशारा कर रही है। आने वाले दिनों में यदि कोई बड़ा फैसला सामने आता है, तो इस बैठक को उसकी प्रस्तावना के रूप में देखा जाएगा।