जिस दरवाज़े पर लगे आरोप, वहीं पहुंच गई ‘सरकार’
गदरपुर। गदरपुर की राजनीति ने बुधवार को एक बार फिर साबित कर दिया कि यहां बयान भले तल्ख़ हों, लेकिन दरवाज़े कभी बंद नहीं होते। जिन जमीन मामलों को लेकर
गदरपुर में सियासत का नया फॉर्मूला: मंच पर वार, ड्राइंग रूम में संवाद
गदरपुर। गदरपुर की राजनीति ने बुधवार को एक बार फिर साबित कर दिया कि यहां बयान भले तल्ख़ हों, लेकिन दरवाज़े कभी बंद नहीं होते। जिन जमीन मामलों को लेकर युवक कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुमित भुल्लर सरकार पर लगातार हमलावर थे, उसी घर पर अचानक भाजपा विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय की एंट्री हो गई।
प्रेस वार्ता चल रही थी, कैमरे चालू थे और आरोप हवा में थे—तभी ‘सरकार’ खुद दरवाज़े पर खड़ी दिखी। न कोई टकराव, न सवाल-जवाब, न सियासी गर्मी। चाय पी गई और मुलाकात को “सामान्य” बताकर कहानी वहीं खत्म कर दी गई।
यही गदरपुर की राजनीति है—जहां आरोप मंच के लिए होते हैं और संवाद ड्राइंग रूम में। जिस जमीन को लेकर घोटाले के आरोप लगाए जा रहे हैं, उसी प्रकरण से जुड़े नाम के साथ यह मुलाकात कई सवाल छोड़ गई है। अगर आरोप इतने गंभीर हैं तो मुलाकात इतनी सहज क्यों रही? और अगर सब सामान्य है, तो फिर रोज़ का सियासी शोर किस लिए?
युवक कांग्रेस आंदोलन की चेतावनी दे रही है, प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रही है, लेकिन इस मुलाकात ने पूरे नैरेटिव को ठंडा कर दिया। जनता अब यह पूछ रही है कि क्या सियासी लड़ाइयां वाकई सड़क पर लड़ी जाएंगी या फिर चाय की चुस्कियों में निपटाई जाएंगी?
भाजपा विधायक का कहना है कि मामला अदालत में है और आरोप बेबुनियाद हैं। मगर सवाल अब आरोपों से ज़्यादा इस तस्वीर पर टिक गया है—जहां सरकार और विरोध आमने-सामने नहीं, बल्कि आमने-सामने बैठकर मुस्कुरा रहे हैं।
गदरपुर ने एक बार फिर दिखा दिया कि यहां राजनीति संघर्ष की नहीं, संयोग की कहानी ज्यादा लगती है। मंच पर तल्ख़ बयान, कैमरे के बाहर सहज मुलाकात—और बीच में जनता, जो अब सच और सियासत का फर्क समझने की कोशिश कर रही है।


News Desk 

