दरबार साहिब श्री अमृतसर पर फौज के हमले में हुए शहीदों को पाठ एवं अरदास से किया नमन

गदरपुर। सन् 1984 में तत्कालीन सरकार के निर्देश पर दरबार साहिब श्री अमृतसर, श्री अकाल तख्त साहिब और 38 अन्य गुरुद्वारों पर की गई भारतीय सेना की बर्बर कार्रवाई

दरबार साहिब श्री अमृतसर पर फौज के हमले में हुए शहीदों को  पाठ एवं अरदास से किया नमन

गदरपुर। सन् 1984 में तत्कालीन सरकार के निर्देश पर दरबार साहिब श्री अमृतसर, श्री अकाल तख्त साहिब और 38 अन्य गुरुद्वारों पर की गई भारतीय सेना की बर्बर कार्रवाई में शहीद हुए निर्दोष महिला पुरुष एवं बच्चों के हत्याकांड पर रोष जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई । बच्चों द्वारा रैली निकालकर गुरुद्वारा साहिब में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में सतनाम वाहेगुरु एवं मूल मंत्र का जाप किया गया । धर्म प्रचार कमेटी के उत्तराखंड काशीपुर प्रचारक भाई हरजिंदर सिंह ने कहा कि यह कार्रवाई तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा बर्बरता का एक नमूना पेश करती है ।

हजारों श्रद्धालु जिनमें महिला,पुरुष, बच्चे व वृद्ध लोग भी शामिल थे । जिन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए मूल मंत्र का जाप करवाया गया एवं सर्वत्र सुख शांति की अरदास की गई। सिख मिशनरी कॉलेज देवेंद्र सिंघ ने कहा कि 1984 की तत्कालीन सरकार द्वारा की गई कार्रवाई एक वहशियाना सबूत है जबकि सिख समुदाय द्वारा हमेशा समाज भलाई कार्यो में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया जाता है ,1947 से पूर्व भारत की आजादी के लिए अंग्रेजी साम्राज्य के दौरान 82% शहीदियां देकर देश को आजाद करने में महत्वपूर्ण सहयोग पंजाबी सिख समुदाय द्वारा दिया गया ।

समय-समय पर आ रही आपदाओं में भी सिख समुदाय द्वारा अपनी मेहनत की कमाई से अधिक से अधिक हिस्सा लोगों की सहायता के लिए लगाया गया 1947 के नरसंहार में भी सिख समुदाय का ही अधिक नुकसान हुआ जिसकी भरपाई आज तक नहीं हो सकी। कई लोगों को,जो अपना कारोबार,घर एवं जमीन आदि छोड़कर आए उसके बदले में कुछ भी मुआवजा तक नहीं मिला जिसका अभी तक रोष बना हुआ है । इस दौरान बच्चों द्वारा बोले स निहाल सत श्री अकाल के जयकारे लगाने के साथ मूल मंत्र का जाप किया गया। स्त्री सत्संग सभा की सविंदर कौर रोजी ने बच्चों को नित्य प्रति गुरबाणी पाठ करने एवं गुरु की शिक्षाओं को ग्रहण करने का आह्वान करने के साथ शहीदों को श्रद्धांजलि दी।