संयुक्त राष्ट्र से इज़राइल–अमेरिका और ईरान युद्ध रोकने तथा परमाणु स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग

नई दिल्ली। ज्यूडिशियल काउंसिल ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को ईमेल के माध्यम से एक अत्यंत गंभीर और तात्कालिक पत्र भेजते हुए इज़राइल

संयुक्त राष्ट्र  से इज़राइल–अमेरिका और ईरान युद्ध रोकने तथा परमाणु स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग

नई दिल्ली। ज्यूडिशियल काउंसिल ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को ईमेल के माध्यम से एक अत्यंत गंभीर और तात्कालिक पत्र भेजते हुए इज़राइल - अमेरिका और ईरान के बीच तेजी से बढ़ते सशस्त्र युद्ध  पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

कड़े शब्दों में लिखे गए इस पत्र में ज्यूडिशियल काउंसिल ने चेतावनी दी है कि स्थिति अब अत्यंत गंभीर और खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है, जो न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि वैश्विक शांति, पर्यावरणीय सुरक्षा और मानव अस्तित्व के लिए सीधा खतरा है।

विशेष रूप से चिंताजनक वे विश्वसनीय रिपोर्टें हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि सैन्य अभियान संवेदनशील परमाणु स्थलों के अत्यंत निकट हमले हो चुके हैं। ज्यूडिशियल काउंसिल ने जोर देकर कहा कि ऐसे किसी भी परमाणु प्रतिष्ठान पर जानबूझकर या आकस्मिक हमला विनाशकारी परिणाम उत्पन्न कर सकता है, जिसमें रेडियोधर्मी प्रदूषण, व्यापक पर्यावरणीय विनाश और सीमाओं के पार करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक खतरे शामिल हैं।

ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन राजीव अग्निहोत्री ने रेखांकित किया कि परमाणु अवसंरचना को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन होगा। उन्होंने इसे एक अस्वीकार्य उकसावे की कार्रवाई बताया, जिसके मानवता और पृथ्वी पर दूरगामी और अपरिवर्तनीय परिणाम होंगे ।

बढ़ते संकट को देखते हुए, ज्यूडिशियल काउंसिल ने महासचिव से तुरंत और निर्णायक कदम उठाने की मांग  की है, जिनमें शामिल हैं: तत्काल युद्धविराम: सभी संबंधित पक्षों से बिना शर्त और तत्काल युद्धविराम लागू करने की अपील, ताकि जान-माल की और क्षति रोकी जा सके।

परमाणु स्थलों की सुरक्षा: परमाणु प्रतिष्ठानों पर किसी भी प्रकार के हमले पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने हेतु एक मजबूत और बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय निर्देश जारी किया जाए, तथा इन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत संरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाए। सुरक्षा परिषद की आपात बैठक: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तात्कालिक बैठक बुलाकर स्थिति पर विचार-विमर्श और ठोस तनाव-निरोधक कदम सुनिश्चित किए जाएं। विशेषज्ञ दल की तैनाती: परमाणु सुरक्षा और विकिरण विशेषज्ञों सहित अंतरराष्ट्रीय टीमों को तुरंत भेजा जाए, ताकि जोखिम का आकलन किया जा सके और वैश्विक सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित हो। कूटनीतिक संवाद को बढ़ावा: अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सम्मान के आधार पर शांतिपूर्ण समाधान के लिए तत्काल वार्ता शुरू की जाए और मध्यस्थता की जाए।

वैश्विक मानवीय और पर्यावरणीय आपदा की चेतावनी

महासचिव को संबोधित करते हुए, चेयरमैन श्री अग्निहोत्री ने चेतावनी दी कि वर्तमान युद्ध अभूतपूर्व मानवीय और पर्यावरणीय आपदा का रूप ले सकता है। परमाणु प्रतिष्ठानों को किसी भी प्रकार की क्षति तत्काल युद्ध विनाश से कहीं अधिक गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकती है, जिसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों और वैश्विक पारिस्थितिक संतुलन पर पड़ेगा।

ज्यूडिशियल काउंसिल ने विश्वास व्यक्त किया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा समय पर और निर्णायक हस्तक्षेप इस संकट को और बढ़ने से रोक सकता है तथा वैश्विक शांति और सुरक्षा बनाए रखने वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थाओं में विश्वास बहाल कर सकता है।

 ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन श्री राजीव अग्निहोत्री ने कहा कि “इस संकट की घड़ी में विश्व समुदाय आपकी नेतृत्व क्षमता की ओर देख रहा है, और महासचिव से अत्यधिक तात्कालिकता और दृढ़ता के साथ कार्रवाई करने का आग्रह किया  ताकि संघर्ष को रोका जा सके और हर हाल में परमाणु सुरक्षा  को बनाए रखा जा सके।”

श्री अग्निहोत्री ने यह भी उल्लेख किया कि इस मामले को अत्यंत तात्कालिक माना जाए, और दोहराया कि मानवता को अपरिवर्तनीय नुकसान से बचाने के लिए वैश्विक स्तर पर शीघ्र कार्रवाई आवश्यक है।