आईजी रिद्धिम अग्रवाल ने पुलिस लाइन में की समीक्षा बैठक, लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश

रुद्रपुर। कुमाऊं परिक्षेत्र की पुलिस महानिरीक्षक रिद्धिम अग्रवाल ने पुलिस लाइन रुद्रपुर में परिक्षेत्रीय मासिक गोष्ठी आयोजित कर जनपद प्रभारियों के साथ कानून-व्यवस्था,

आईजी रिद्धिम अग्रवाल ने पुलिस लाइन में की समीक्षा बैठक, लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश

रुद्रपुर। कुमाऊं परिक्षेत्र की पुलिस महानिरीक्षक रिद्धिम अग्रवाल ने पुलिस लाइन रुद्रपुर में परिक्षेत्रीय मासिक गोष्ठी आयोजित कर जनपद प्रभारियों के साथ कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और विवेचना से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा की। बैठक में लंबित प्रकरणों के शीघ्र, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर विशेष जोर देते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
गोष्ठी के दौरान अपराध एवं विवेचना से संबंधित मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई। वर्ष 2015 से पूर्व के एनडीपीएस एक्ट के मामलों के विधिक निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। वहीं वर्ष 2024 एवं उससे पूर्व से दाखिल वाहनों के निस्तारण में धीमी प्रगति पर असंतोष जताते हुए अधिकारियों को शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। 2 से 3 वर्ष और उससे अधिक समय से लंबित विवेचनाओं को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश भी दिए गए।

लैण्ड फ्रॉड से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए आईजी ने साक्ष्य संकलन और विवेचना की पारदर्शिता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश या बिना संस्तुति दर्ज अभियोगों में अंतिम रिपोर्ट की वैधानिकता का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार की त्रुटि न रहे।

विशेष अभियानों के तहत ऑपरेशन स्माइल की प्रगति की समीक्षा करते हुए गुमशुदा और लापता व्यक्तियों की बरामदगी में तकनीकी संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए गए। अज्ञात शवों की शिनाख्त के लिए अंतरजनपदीय समन्वय बढ़ाने और वांछित व इनामी अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए सघन अभियान चलाने पर जोर दिया गया। आवश्यकतानुसार कुर्की और घोषणा की कार्रवाई सुनिश्चित करने को भी कहा गया।

तकनीकी एवं विधिक कार्यवाहियों की समीक्षा में NAFIS और MCU सिस्टम के बेहतर उपयोग पर बल दिया गया। धारा 107 बीएनएसएस, गैंगस्टर एक्ट, एनडीपीएस और अन्य धाराओं के तहत संपत्ति जब्तीकरण की कार्यवाही को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए। वर्ष 2025 और 2026 में की गई विधिक कार्रवाई की प्रगति का भी मूल्यांकन किया गया।

बैठक में पुलिस कर्मियों से संबंधित मामलों—ऑनलाइन एसीआर, जीपीएफ और चिकित्सा प्रतिपूर्ति की स्थिति की भी समीक्षा की गई। आईजी ने कहा कि कार्मिकों से जुड़े मामलों का समयबद्ध निस्तारण भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना अपराध नियंत्रण।
आईजी रिद्धिम अग्रवाल ने बीट पुलिसिंग को पुलिस व्यवस्था की रीढ़ बताते हुए इसे और अधिक सशक्त बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बीट आरक्षी नियमित रूप से अपने क्षेत्रों में भ्रमण करें, स्थानीय लोगों से संवाद बढ़ाएं और संवेदनशील व्यक्तियों की पहचान व सत्यापन पर ध्यान दें। मजबूत बीट सूचना तंत्र से अपराधों की रोकथाम में मदद मिलेगी।

न्यायालयीय पैरवी को लेकर केस ऑफिसर स्कीम के तहत लंबित महत्वपूर्ण मामलों की नियमित मॉनिटरिंग और अभियोजन तंत्र के साथ बेहतर समन्वय के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि प्रभावी पैरवी से दोषियों को शीघ्र सजा दिलाना संभव होगा, जिससे आमजन का न्याय व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होगा।

आईजी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनसामान्य की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि पुलिस की छवि को बेहतर बनाने के लिए अधिकारियों को आपसी समन्वय, जवाबदेही और जनसेवा की भावना के साथ कार्य करना होगा।

गोष्ठी में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल डॉ. मन्जूनाथ टीसी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधमसिंहनगर अजय गणपति, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अल्मोड़ा चन्द्रशेखर घोड़के, पुलिस अधीक्षक पिथौरागढ़ अक्षय प्रहलाद कोंडे, पुलिस अधीक्षक चम्पावत रेखा यादव, पुलिस अधीक्षक बागेश्वर जितेन्द्र कुमार मेहरा, पुलिस अधीक्षक अपराध ऊधमसिंहनगर जितेन्द्र सहित अन्य जनपदों के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।