कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, फलटण में IPR कार्यशाला: आइडिया से स्टार्ट-अप तक की पूरी राह
फलटण, 22 फरवरी 2026। College of Engineering Phaltan में “बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR)” विषय पर एक प्रभावशाली प्रशिक्षण कार्यक्रम
फलटण, 22 फरवरी 2026। College of Engineering Phaltan में “बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR)” विषय पर एक प्रभावशाली प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसने छात्रों और संकाय सदस्यों को आइडिया से पेटेंट, प्रोटोटाइप और स्टार्ट-अप तक की स्पष्ट दिशा दी। कार्यशाला का नेतृत्व देशभर में “पेटेंट गुरु” के नाम से प्रसिद्ध Dr. B. K. Sarkar ने किया।
???? विचार से पेटेंट तक
डॉ. सरकार ने समझाया कि सिर्फ अच्छा विचार होना काफी नहीं, उसे नवीन (Novel) और औद्योगिक रूप से उपयोगी (Industrial Application) साबित करना ही असली कसौटी है। उन्होंने पेटेंट ड्राफ्टिंग की बारीकियों को सरल उदाहरणों के साथ समझाते हुए बताया कि क्लेम (Claims) कैसे तैयार किए जाएँ ताकि कानूनी सुरक्षा मजबूत हो।
उन्होंने प्रतिभागियों को यह भी आगाह किया कि आधी-अधूरी जानकारी के साथ फाइल किया गया पेटेंट अक्सर खारिज हो जाता है—इसलिए तकनीकी स्पष्टता और पूर्व कला (Prior Art) की जांच बेहद जरूरी है।
????️ प्रोटोटाइप: आइडिया को जमीन पर उतारना
कार्यशाला में जोर दिया गया कि “कागज़ी नवाचार” से आगे बढ़कर कार्यशील प्रोटोटाइप विकसित करना अनिवार्य है। छात्रों को लैब-टू-मार्केट अप्रोच समझाई गई—यानी रिसर्च पेपर से आगे बढ़कर ऐसा मॉडल तैयार करना जो बाजार की जरूरतों को पूरा कर सके।
डॉ. सरकार ने कहा कि जब तक आपका उत्पाद हाथ में पकड़ा न जा सके, तब तक निवेशक गंभीरता से नहीं लेते।
???? फंडिंग और प्रोजेक्ट सपोर्ट
प्रतिभागियों को बताया गया कि किस तरह सरकारी संस्थाओं जैसे Department of Science and Technology, All India Council for Technical Education और Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises की योजनाओं के तहत अनुदान प्राप्त किया जा सकता है।
प्रोजेक्ट प्रस्ताव लिखने, बजट तैयार करने और मूल्यांकन मानकों को समझने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। छात्रों को यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि सही दस्तावेज़ीकरण और समयबद्ध आवेदन ही फंडिंग की कुंजी है।
???? 800+ पेटेंट का अनुभव
GEH Research के संस्थापक डॉ. सरकार, जिनके नाम 800 से अधिक पेटेंट दर्ज हैं, ने अपने अनुभव साझा करते हुए पेटेंट प्रक्रिया की जटिलताओं को आसान भाषा में समझाया। उन्होंने स्टार्ट-अप इकोसिस्टम में IPR की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “आज की प्रतिस्पर्धी दुनिया में बौद्धिक संपदा ही असली संपत्ति है।”
???? नवाचार को नई उड़ान
यह कार्यक्रम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, फलटण के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में अहम कदम साबित हुआ। छात्रों में स्टार्ट-अप और उद्यमिता को लेकर उत्साह स्पष्ट दिखाई दिया।
कार्यशाला ने एक साफ संदेश दिया—सिर्फ आइडिया मत सोचो, उसे सुरक्षित करो, विकसित करो और बाजार तक पहुँचाओ।


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