मेरी आवाज़ ही पहचान है.....
आज 16 अप्रैल को World Voice Day यानि विश्व आवाज़ दिवस मनाया जाता है। आवाज़ का हमारे जीवन में कितना महत्व है यह तो हम सब जानते हैं। आप लोगों का पता
आज 16 अप्रैल को World Voice Day यानि विश्व आवाज़ दिवस मनाया जाता है। आवाज़ का हमारे जीवन में कितना महत्व है यह तो हम सब जानते हैं। आप लोगों का पता नहीं पर मैं ज़्यादा देर तक बिना बोले, बिना चले-फिरे नहीं रह पाती। कई व्यवसाय आवास पर निर्भर हैं। कॉल सेंटर प्रोफेशनल क्या शानदार बोलते हैं। बोलना भी एक प्रेक्टिस है। अनाप-शनाप हम कुछ भी बोल दें मगर आकर्षक आवाज़ में बोली गई बात का ही प्रभाव पड़ता है।
World Voice Day की इस बार की थीम है- Caring for our voices.
शरीर के दूसरे हिस्सों की तरह अपने गले का ध्यान रखना, इसे स्वस्थ रखना भी हमारी ज़िम्मेदारी और ज़रूरत है। आवाज़ हर इंसान की अलग-अलग होती है। रेडियो के ज़माने से आवाज़ के माध्यम से ही हम गायकों , कमेंट्रेटर्स, उद्घोषकों और कलाकारों को पहचानते हैं। हमारे पास अपनी बात को कहने का जज़्बा हो, इसके लिए यह ज़रूरी नहीं कि आवाज़ तेज हो, तीखी हो। हल्की आवाज़ में भी अपनी बात दमदार तरीके से रखी जा सकती है। कर्कश और तेज़ आवाज़ सुनने वाले पर नकारात्मक असर डाल सकती है और साथ ही वोकल कोर्ड्स के टूटने, उन्हें नुकसान होने का डर अलग।
किसी कहानी या कविता को अगर आवाज़ का साथ मिल जाए तो प्रभाव जमाने में ज्यादा सफल होती है।
माया एंजेलो कहती हैं- शब्दों का असली अर्थ तभी जीवंत होता है जब उनमें मानवीय आवाज़ की भावनाएं जुड़ती हैं।
लता मंगेशकर, आशा भोंसले, मुकेश, मोहम्मद रफी, तलत अज़ीज़, मन्ना डे, सुरैया, बेगम अख़्तर जैसी तमाम आवाज़ें हैं जो दिल का एहसास बन जाती हैं। महाभारत सीरियल के दौर में 'मैं समय हूं' कह कर एक चेतन डाल देने वाले हरीश भिमानी को कौन भूल सकता है। समाचार वाचक शम्मी नारंग जिन्हें हम दिल्ली मेट्रो में भी सुनते हैं, इसके अलावा कई नाम है जो प्रभाव छोड़ते हैं। अभी आशा भोंसले की मृत्यु के दिन रज़ा मुराद को टीवी पर सुन रही थी, क्या शानदार तरीका बोलने का। इसी तरह कई रेडियो कलाकार थे जिनमें अमीन सयानी और कई उद्घोषकों का नाम जेहन में आ रहा है।
आज से लगभग सौ साल पहले इकलौती आवाज़ गांधी की भी उठी थी जो बेशक तेज़ नहीं थी पर प्रभावशाली थी, जहां फिर अनेक स्वर मिल गए थे और जो भारत की आवाज़ बन गई थी।
मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा...
अमृता पांडे


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