आयुर्वेद, अनुसंधान एवं जनस्वास्थ्य को लेकर पद्मश्री वैद्य बालेन्दु प्रकाश ने की राज्यपाल से मुलाकात
रूद्रपुर। उत्तराखण्ड में आयुर्वेद आधारित अनुसंधान एवं जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत पद्मश्री सम्मानित आयुर्वेदाचार्य वैद्य बालेन्दु प्रकाश ने राजभवन, नैनीताल में उत्तराखण्ड
रूद्रपुर। उत्तराखण्ड में आयुर्वेद आधारित अनुसंधान एवं जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत पद्मश्री सम्मानित आयुर्वेदाचार्य वैद्य बालेन्दु प्रकाश ने राजभवन, नैनीताल में उत्तराखण्ड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सेवानिवृत्त गुरमीत सिंह से शिष्टाचार भेंट कर विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की।
इस अवसर पर वैद्य बालेन्दु प्रकाश ने ग्रामीण क्षेत्र में स्थित पड़ाव – स्पेशियलिटी आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट सेंटर, वैद्य चन्द्र प्रकाश कैंसर रिसर्च फाउंडेशन तथा शशि-चन्द्र रसशाला द्वारा संचालित अनुसंधान, उपचार एवं प्रशिक्षण गतिविधियों की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने विशेष रूप से अग्नाशय (पैंक्रियाज) संबंधी रोगों, विशेषकर क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस के आयुर्वेदिक प्रबंधन पर विगत लगभग तीन दशकों से किए जा रहे कार्यों का उल्लेख किया।
वैद्य बालेन्दु प्रकाश ने बताया कि वर्ष 1997 से अब तक देश एवं विदेश के हजारों पैंक्रियाटाइटिस रोगियों का व्यवस्थित चिकित्सकीय अभिलेखीकरण किया गया है। इस दीर्घकालिक अनुभव से प्राप्त आंकड़ों के स्वतंत्र वैज्ञानिक मूल्यांकन और विश्लेषण के लिए राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों की सहभागिता से एक विशेष पहल प्रारम्भ की जा रही है, जिससे आयुर्वेदिक उपचारों के परिणामों का वस्तुनिष्ठ परीक्षण किया जा सके।
बैठक के दौरान पारम्परिक भारतीय ज्ञान प्रणाली, विशेषकर रसशास्त्र, के वैज्ञानिक अध्ययन एवं मानकीकरण पर भी चर्चा हुई। वैद्य बालेन्दु प्रकाश ने बताया कि उनकी अनुसंधान टीम धातु एवं खनिज आधारित आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण के दौरान होने वाले भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तनों का आधुनिक विश्लेषणात्मक तकनीकों की सहायता से अध्ययन कर रही है। इस दिशा में किए जा रहे प्रयास आयुर्वेदिक औषध निर्माण प्रक्रियाओं को वैज्ञानिक दृष्टि से समझने और दस्तावेजीकृत करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
राज्यपाल से हुई चर्चा में आयुर्वेद, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान, विश्वविद्यालयों तथा अनुसंधान संस्थानों के मध्य सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श हुआ। वैद्य बालेन्दु प्रकाश ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि अनुभवजन्य ज्ञान को वैज्ञानिक परीक्षण एवं पारदर्शिता के साथ प्रस्तुत किया जाए, जिससे समाज को प्रमाण आधारित स्वास्थ्य विकल्प उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने राज्यपाल को फरवरी 2027 में प्रस्तावित इंटरनेशनल पैंक्रियाटाइटिस कॉन्क्लेव इंडिया (IPCI-2027) की रूपरेखा से भी अवगत कराया। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य विश्वभर के चिकित्सकों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर लाकर पैंक्रियाटाइटिस एवं अन्य अग्नाशय संबंधी रोगों पर नवीनतम वैज्ञानिक एवं चिकित्सीय दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान करना है।
वैद्य बालेन्दु प्रकाश ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे राज्य, जहाँ आयुर्वेद और पारम्परिक चिकित्सा की समृद्ध विरासत उपलब्ध है, वहाँ वैज्ञानिक अनुसंधान आधारित पहलें वैश्विक स्तर पर भारत की ज्ञान परम्परा को नई पहचान दिला सकती हैं। राज्यपाल से हुई यह भेंट आयुर्वेद, अनुसंधान और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में चल रहे प्रयासों को नई दिशा एवं प्रेरणा प्रदान करने वाली मानी जा रही है।


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