होली से पहले सियासी हलचल तेज, अरविंद पांडे की राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात के कई मायने

गदरपुर/देहरादून। प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। भाजपा विधायक अरविंद पांडे ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से लगभग 40 मिनट तक मुलाकात की।

होली से पहले सियासी हलचल तेज, अरविंद पांडे की राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात के कई मायने

गदरपुर/देहरादून। प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। भाजपा विधायक अरविंद पांडे ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से लगभग 40 मिनट तक मुलाकात की। दिलचस्प बात यह है कि इससे एक दिन पहले ही प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट अचानक गदरपुर स्थित पांडे के आवास पहुंचे थे, जहां बंद कमरे में लंबी चर्चा हुई थी।
एक महीने के भीतर राष्ट्रीय अध्यक्ष से यह दूसरी मुलाकात बताई जा रही है। आधिकारिक तौर पर इसे “शिष्टाचार भेंट” कहा गया है, लेकिन सियासी गलियारों में इसे सामान्य मुलाकात मानने को तैयार लोग कम हैं। खासकर तब, जब हाल ही में अतिक्रमण के मुद्दे पर विधायक पांडे और प्रशासन आमने-सामने नजर आए थे।
अतिक्रमण प्रकरण में प्रशासन ने नोटिस जारी कर कार्रवाई की बात कही थी, जबकि पांडे ने सार्वजनिक रूप से चुनौती देते हुए कहा था कि यदि उनके आवास या कार्यालय की भूमि सरकारी है तो प्रशासन स्वयं चिन्हित कर कब्जा ले। इस बयान को राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा गया। इसे केवल कानूनी विवाद नहीं, बल्कि सत्ता और संगठन के बीच खिंचाव के संकेत के रूप में भी लिया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रदेश अध्यक्ष की अचानक मुलाकात और उसके तुरंत बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष से लंबी बातचीत, घटनाक्रम को सामान्य नहीं रहने देती। सवाल उठ रहे हैं—क्या यह मतभेद सुलझाने की कवायद है या प्रदेश की राजनीति में किसी नए समीकरण की तैयारी?
गौरतलब है कि पहले भी विधायक पांडे के तेवर कई मौकों पर चर्चा में रहे हैं। अतिक्रमण विवाद के दौरान उनके बयानों ने विपक्ष को भी सरकार पर सवाल उठाने का मौका दिया था। ऐसे में पार्टी नेतृत्व की सक्रियता को डैमेज कंट्रोल या रणनीतिक संवाद के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, विधायक अरविंद पांडे का कहना है कि मुलाकात पूरी तरह संगठनात्मक और शिष्टाचार आधारित थी। उन्होंने किसी भी तरह की अटकलों को खारिज किया है।
लेकिन राजनीति में घटनाएं अक्सर संकेत देती हैं, बयान बाद में आते हैं। होली से पहले सियासत में रंग गहराते दिख रहे हैं। अब देखना होगा कि यह मुलाकातें केवल औपचारिक थीं या प्रदेश की राजनीति में कोई नया अध्याय लिखने की तैयारी। फिलहाल चर्चाओं का बाजार गर्म है और नजरें अगले कदम पर टिकी हैं।