सच्ची स्वतंत्रता बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि मन की आजादी से आती है : आचार्य प्रशांत

रायपुर/संवाददाता। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में आयोजित मेगा टेक्निकल फेस्ट ‘अनंत 2026’ के समापन समारोह में  मुख्य वक्ता प्रख्यात चिंतक एवं दार्शनिक

सच्ची स्वतंत्रता बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि मन की आजादी से आती है : आचार्य प्रशांत

खुद की नजरों में उठे बिना नहीं मिलता सम्मान

रायपुर/संवाददाता। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में आयोजित मेगा टेक्निकल फेस्ट ‘अनंत 2026’ के समापन समारोह में  मुख्य वक्ता प्रख्यात चिंतक एवं दार्शनिक आचार्य प्रशांत ने छात्रों को संबोधित करते हुए जीवन, करियर और आत्मसम्मान से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला तथा कहा कि बाहरी प्रभाव, बाहरी विषय मन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। अध्यात्म कोई मुक्ति का विषय नहीं बल्कि हमें  आत्मज्ञान से सवाल करना सिखाता है।

आचार्य प्रशांत ने कहा कि आज का युवा अक्सर समाज, फैशन और बाहरी दिखावे के दबाव में अपने निर्णय लेता है, जिससे वह अपने वास्तविक लक्ष्य से भटक जाता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि व्यक्ति को समाज में सम्मान चाहिए तो सबसे पहले उसे अपनी ही नजरों में उठना होगा। जब तक इंसान स्वयं को ईमानदारी से नहीं देखता और अपने भीतर मजबूती विकसित नहीं करता, तब तक बाहरी सम्मान टिकाऊ नहीं हो सकता।

उन्होंने  कहा कि सच्ची स्वतंत्रता बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि मन की आजादी से आती है। व्यक्ति को अपने विचारों और कर्मों में स्पष्टता रखनी चाहिए, तभी वह आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ सकता है। दूसरों से तुलना करने के बजाय स्वयं के विकास पर ध्यान केंद्रित करना ही सफलता की कुंजी है।

कार्यक्रम के दौरान आचार्य प्रशांत ने असफलता के महत्व पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि असफलता की कहानियां व्यक्ति को अधिक गहराई से सिखाती हैं,असफलता हमें अपनी कमियों को पहचानने और उन्हें सुधारने का अवसर देती है, जबकि सफलता अक्सर हमें आत्ममुग्ध बना देती है।

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आज युवा वर्ग लाइक्स और फॉलोअर्स की दुनिया में उलझता जा रहा है, जिससे उनका आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित  हो रहा है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे दिखावे की बजाय वास्तविक सीख और अनुभव को महत्व दें।