भारत को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का राष्ट्रीय संकल्प हर नागरिक बने बदलाव का प्रहरी– ज्यूडिशियल काउंसिल
नई दिल्ली (न्यूज़ वार्ता): ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन श्री राजीव अग्निहोत्री ने देशव्यापी स्तर पर भ्रष्टाचार के विरुद्ध भारत का सबसे बड़ा जन अभियान प्रारंभ करने की घोषणा
नई दिल्ली (न्यूज़ वार्ता): ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन श्री राजीव अग्निहोत्री ने देशव्यापी स्तर पर भ्रष्टाचार के विरुद्ध भारत का सबसे बड़ा जन अभियान प्रारंभ करने की घोषणा करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार आज देश के विकास, सुशासन और सामाजिक न्याय के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बन चुका है। उन्होंने कहा कि यदि भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है तो भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रत्येक नागरिक को आगे आना होगा। यह केवल किसी एक संस्था, सरकार या विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
श्री अग्निहोत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार का सबसे अधिक दुष्प्रभाव देश के मध्यम वर्ग तथा वंचित एवं कमजोर वर्गों पर पड़ता है। मध्यम वर्ग अपनी मेहनत की कमाई पर कर अदा करता है और जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संघर्ष करता है, वहीं गरीब और हाशिए पर खड़े लोगों को सरकारी योजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा न्याय जैसी मूलभूत सुविधाओं तक पहुँचने में भ्रष्टाचार के कारण अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि जब किसी सरकारी कार्यालय में रिश्वत मांगी जाती है, किसी गरीब की फाइल बिना कारण रोकी जाती है, किसी पात्र व्यक्ति को उसका अधिकार नहीं मिलता या किसी ईमानदार नागरिक को अनावश्यक परेशान किया जाता है, तब सबसे बड़ी कीमत आम जनता चुकाती है। भ्रष्टाचार केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि यह सामाजिक अन्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी सीधा आघात है।
उन्होंने कहा कि ज्यूडिशियल काउंसिल का उद्देश्य किसी व्यक्ति, दल या संस्था को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि समाज में ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही की संस्कृति को मजबूत करना है। संस्था देशभर में जन-जागरूकता कार्यक्रम, सेमिनार, जनसंवाद, युवा सम्मेलन, स्वयंसेवक अभियान तथा सामाजिक सहभागिता के माध्यम से लोगों को भ्रष्टाचार के विरुद्ध संगठित करेगी।
श्री अग्निहोत्री ने देश के युवाओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा आबादी है। यदि युवा ईमानदारी, नैतिकता और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे तो आने वाली पीढ़ियों को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी व्यवस्था मिलेगी। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल दर्शक नहीं, बल्कि परिवर्तन का नेतृत्व करने वाला नागरिक बनना होगा।
उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक राज्य, जिले, नगर और गांव तक इस अभियान का विस्तार किया जाएगा। समाजसेवी, अधिवक्ता, शिक्षक, विद्यार्थी, सेवानिवृत्त अधिकारी, व्यापारी, महिलाएं तथा सभी जागरूक नागरिक इस अभियान का हिस्सा बन सकते हैं। ज्यूडिशियल काउंसिल का विश्वास है कि जब जनता एकजुट होकर भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाती है, तब व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है।
श्री अग्निहोत्री ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष केवल शिकायत करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि प्रत्येक नागरिक को स्वयं भी ईमानदारी का पालन करना चाहिए। रिश्वत न देना, नियमों का पालन करना, सार्वजनिक संसाधनों की रक्षा करना और अनियमितताओं के विरुद्ध आवाज उठाना एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है।
उन्होंने कहा कि भारत के विकास का मार्ग केवल आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों और पारदर्शी प्रशासन से होकर गुजरता है। यदि देश भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में सफल होता है तो शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचा, रोजगार, न्याय और निवेश जैसे सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
ज्यूडिशियल काउंसिल ने देशभर के नागरिकों से इस जन अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार-मुक्त भारत का सपना तभी साकार होगा जब प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे। संस्था ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य जन-जागरूकता बढ़ाना, ईमानदार नागरिकों को प्रोत्साहित करना तथा भ्रष्टाचार के विरुद्ध संवैधानिक और शांतिपूर्ण जन सहभागिता को मजबूत करना है।
अंत में श्री राजीव अग्निहोत्री ने कहा, "भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की लड़ाई है। जब प्रत्येक नागरिक ईमानदारी को अपना संकल्प बनाएगा, तभी हम एक भ्रष्टाचार-मुक्त, न्यायपूर्ण, पारदर्शी और विकसित भारत का निर्माण कर सकेंगे।"


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