उत्तराखंड में हर्बल, पर्यावरण और औषधीय विकास को मिलेगा नया आयाम: पल्लवी मनुदेव गौड़ा

रुद्रपुर। पल्लव इंडिया हर्बल फाउंडेशन की डायरेक्टर एवं छत्तीसगढ़ की "लोखंडी महिला" के नाम से प्रसिद्ध श्रीमती पल्लवी मनुदेव गौड़ा ने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा

उत्तराखंड में हर्बल, पर्यावरण और औषधीय विकास को मिलेगा नया आयाम: पल्लवी मनुदेव गौड़ा

रुद्रपुर। पल्लव इंडिया हर्बल फाउंडेशन की डायरेक्टर एवं छत्तीसगढ़ की "लोखंडी महिला" के नाम से प्रसिद्ध श्रीमती पल्लवी मनुदेव गौड़ा ने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा, जड़ी-बूटियां और पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान पूरे देश ही नहीं, बल्कि विश्व के लिए भी अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने उत्तराखंड में सामाजिक, पर्यावरण अनुकूल निर्माण कार्य, जड़ी-बूटी आधारित जल विकास तथा राज्य वृक्ष बुरांश के औषधीय गुणों पर आधारित विकास कार्यों में सक्रिय सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई।

श्रीमती गौड़ा ने कहा कि आयुर्वेद और हर्बल उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक एवं टिकाऊ उपयोग समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पल्लव इंडिया हर्बल फाउंडेशन वर्षों से प्राकृतिक उपचार, औषधीय पौधों के संरक्षण और जन-जागरूकता के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।

उन्होंने कहा कि गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, झारखंड और राजस्थान सहित कई राज्यों में पिछले 36 वर्षों से सामाजिक सेवा, महिला सशक्तिकरण और उद्यमिता के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसी अनुभव के आधार पर अब उत्तराखंड में भी स्थानीय जड़ी-बूटियों, बुरांश सहित अन्य औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जाएगा।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्थानीय किसानों, स्वयं सहायता समूहों और युवाओं को हर्बल आधारित स्वरोजगार से जोड़कर रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखते हुए उत्तराखंड को उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक एवं आयुर्वेदिक उत्पादों का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा।