भाषा साहित्य संस्कृति की पहचान बनाने के लिए महिलाओं का अहम योगदान
जम्मू अखनूर "नमें लिखारी नमी सोच" की प्रधान श्रीयांका जमवाल ने एक कार्यक्रम में अपने ग्रुप की साथियों के साथ विचार विमर्श करते हुए कहा कि आज के इस समय
मोहन सिंह
जम्मू अखनूर "नमें लिखारी नमी सोच" की प्रधान श्रीयांका जमवाल ने एक कार्यक्रम में अपने ग्रुप की साथियों के साथ विचार विमर्श करते हुए कहा कि आज के इस समय महिलाएं हर फील्ड में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही हैं और हमारी डुग्गर भाषा साहित्य संस्कृति को आगे लाने के लिए इसको बचाने के लिए महिलाओं का अहम योगदान है क्योंकि कोई भी भाषा जो है वह मां से शुरू होती है अपने बच्चों के पालन पोषण के समय जो भी भाषा-बच्चा सीखता है मैं अपनी मां से सीखना है इसलिए अपनी भाषा संस्कृति को पहचान दिलवाने के लिए महिलाओं का हम जोरदार रहता है इस मौके पर उपप्रधान नेहा वर्मा ने कहा कि हम अपनी भाषा की सेवा के लिए डोगरी भाषा को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा आगे रहती है और ज़्यादातर हमारे ग्रुप में लड़कियां है जो हमारा सहयोग कार्य हमारे साथ चल रही है उनको भी हम अपनी भाषा अपनी संस्कृति के लिए लिखने का बोलने का काम करवा रहे हैं।
इस मौके पर ग्रुप की जनरल सेक्रेटरी दीपिका ठाकुर ने कहा कि हमारे इस संगठन का मकसद है कि युवा लिखारियों को मंच देना, उन्हें आगे आने का मौका देना ताकि वो अपनी प्रतिभा को दर्शकों तक पहुंचा सके। मां बोली डोगरी केवल एक भाषा ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, हमारी परंपरा और हमारी पहचान की अमूल्य धरोहर है। यह हमारे पूर्वजों की विरासत है, जिसे हमें आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना है।
आज के समय में नए लेखकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि युवा पीढ़ी डोगरी में कविता, कहानी, गीत और लेख लिखेगी, तो ही हमारी भाषा और अधिक समृद्ध होगी। हमें नए लिखारियों को मंच, सम्मान और प्रोत्साहन देते है ताकि वे निडर होकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। हर नई रचना डोगरी साहित्य में एक नया अध्याय जोड़ती है। युवा लेखकों के विचार समाज को नई दिशा देते हैं। यदि हम अपनी मातृभाषा का सम्मान करेंगे, तभी हमारी संस्कृति और परंपराएँ जीवित रहेगी। हमारा यह संगठन नए लेखकों को प्रेरित करता है और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करता है । यही माँ डोगरी के प्रति हमारी सच्ची निष्ठा है ।
वही ग्रुप की सदस्य मिस राधिका पवार ने कहा कि इस ग्रुप से जुड़कर मुझे बहुत अच्छा लगा मैं एक छोटी सी राइटर हूं जो कि लिखती हूं पर मेरी वो कविताएं मेरी लेखनी सिर्फ मेरी डायरी तक ही सीमित रहकर रह जाती सिर्फ मैं ही नहीं मेरे जैसे और भी युवा लिखारी जिनको कोई प्लेटफॉर्म नहीं मिल पाता है उनकी लेखनी सिर्फ डायरी तक ही सीमित रहकर वही पर खत्म हो जाती है परंतु मैं बहुत शुक्रगुजार हूं श्री मोहन सिंह जम्वाल सर का जिनके राईटर ग्रुप के साथ जुड़कर मैं अपनी लेखनी को आगे तक ले पाई हूं मुझे एक प्लेटफॉर्म मिला और यह ग्रुप सिर्फ स्टेज ही नहीं देता बल्कि प्रोत्साहित भी करता है
यह ग्रुप अपनी भाषा अपनी संस्कृति के लिए काम कर रहा है मैं इसकी सराहना करती हूं ।
वही इस ग्रुप की अन्य सदस्य सुगम शर्मा जी ने कहा कि मुझे इस ग्रुप से बहुत कुछ सीखने को मिला यह ग्रुप मेरा पूरा सहयोग करता है मैं डांसर के साथ साथ एक राइटर भी हूं और मुझे इस ग्रुप में मेरी पहचान मिली। इस ग्रुप के सदस्य हमेशा मेरा सहयोग करते है, मैं इस ग्रुप के मेंबर्स का आभार व्यक्त करती हूँ ।


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