एसआईआर को लेकर रूद्रपुर में बवालः विधायक और पूर्व विधायक के बीच तीखी नोंक-झोंक

रुद्रपुर। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान एसआईआर को लेकर सोमवार को कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित सर्वदलीय बैठक उस समय हंगामे में बदल गई

एसआईआर को लेकर रूद्रपुर में बवालः विधायक और पूर्व विधायक के बीच तीखी नोंक-झोंक

रुद्रपुर। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान एसआईआर को लेकर सोमवार को कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित सर्वदलीय बैठक उस समय हंगामे में बदल गई, जब मतदाता सूची में दर्ज आपत्तियों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के नेता आमने सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक के बाद गालीगलौज शुरू हो गई और मामला हाथापाई की नौबत तक पहुंच गया। बैठक में मौजूद अधिकारियों ने किसी तरह दोनों पक्षों को शांत कराया। हंगामे के बीच विधायक शिव अरोरा और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के बीच भी तीखी बहस हुई। जानकारी के अनुसार कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत और जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया की मौजूदगी में कलक्ट्रेट सभागार में एसआईआर के तहत मतदाता सूची में दर्ज आपत्तियों की सुनवाई के लिए बैठक बुलाई गई थी। बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और संबंधित अधिकारी मौजूद थे। बताया गया कि आपत्तियों पर सुनवाई की प्रक्रिया चल रही थी, इसी दौरान भाजपा नेताओं की ओर से कुछ आपत्तिकर्ताओं को धमकाए जाने का आरोप लगाया गया। बताया जाता है कि पूर्व विधायक राजेश शुक्ला और विधायक शिव अरोरा ने आरोप लगाया कि कुछ आपत्तिकर्ताओं को डराने और धमकाने के लिए गुंडे भेजे जा रहे हैं। इस बात को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई। इसी बीच किसी बात को लेकर गालीगलौज शुरू हो गई। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच माहौल गरमा गया और एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए जाने लगे। पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सत्ता पक्ष के नेताओं के आरोपों पर कड़ी आपत्ति जताई। ठुकराल का कहना था कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गुंडा बताया जा रहा है और उनके साथ गालीगलौज की जा रही है। उन्होंने कहा कि बैठक में कांग्रेस कार्यकर्ता संख्या में भले ही कम हों, लेकिन उनका मनोबल ऊंचा है। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का मुक्की की स्थिति बन गई। हंगामे के दौरान विधायक शिव अरोरा और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल भी आमने सामने आ गए। दोनों के बीच काफी देर तक तीखी बहस होती रही। स्थिति बिगड़ती देख बैठक में मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया। एसडीएम मनीष बिष्ट, कौस्तुभ मिश्रा और तहसीलदार दिनेश कुटौला ने दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद अधिकारियों ने पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल और उनके समर्थकों को वहां से अलग किया। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल और उनके समर्थकों को जिलाधिकारी कार्यालय ले गए। वहां उनकी ओर से प्रस्तुत की गई आपत्तियों को सुना गया और संबंधित अधिकारियों के समक्ष उनकी बात रखी गई। अधिकारियों ने एसआईआर प्रक्रिया के तहत आपत्तियों पर नियमानुसार सुनवाई किए जाने की बात कही। बैठक के दौरान हुए हंगामे से कुछ समय के लिए कलक्ट्रेट सभागार में अफरा तफरी का माहौल बना रहा। प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने और एसआईआर की प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की। अधिकारियों का कहना था कि मतदाता सूची से संबंधित आपत्तियों की सुनवाई निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जा रही है। मामले में पूर्व विधायक ठुकराल ने कहा कि बीएलओ द्वारा किये गये पारदर्शी प्री एसआईआर का माखौल उड़ाते हुए आपत्तियां लगायी गयी हैं। उन्होंने कहा कि कई आपत्तिकर्ताओं के आपत्ति में हस्ताक्षर नहीं है, मोबाइल नंबर भी नहीं हे और आपत्तिकर्ता द्वारा कोई साक्ष्य या प्रमाण भी संलग्न नहीं किया गया है। जिनके विरूद्ध आपत्ति की गयी है उनका पक्ष सुनकर ही आपत्ति का निस्तारण किया जाना चाहिए। जिनके नाम पर आपत्ति है उन्हें फार्म-14 के अंतर्गत नोटिस अभी तक नहीं गया है जिसने आपत्ति की है आपत्ति करने वाले को फार्म 13 के अंतर्गत नोटिस तक नहीं भेजा जा सका। जिन मतदाताओं का अन्य प्रदेशों में वोट बन चुका है एवं मैपिंग हो चुकी है, उनका पुनः वोट उत्तराखण्ड में कैसे बन गया। जबकि बीएलओ के द्वारा व्यापक सूक्ष्म परीक्षण हो चुका है इसलिए फर्जी वोटों को रोकने के लिए एक मतदाता का एक स्थान पर ही वोट होना चाहिए। ठुकराल ने वोट चोरी का आरोप लगाते हुए कहा कि इस तरह धांधली किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जायेगी।