अफ्रीका बना भारत का नया ‘कतर’! युद्ध के बीच मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक, ऊर्जा संकट से बचा देश

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री रास्तों पर मंडराते खतरे के बीच भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा दांव खेल दिया है। Hormuz Strait और

अफ्रीका बना भारत का नया ‘कतर’! युद्ध के बीच मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक, ऊर्जा संकट से बचा देश

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री रास्तों पर मंडराते खतरे के बीच भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा दांव खेल दिया है। Hormuz Strait और Bab el-Mandeb Strait जैसे अहम समुद्री मार्गों पर संकट गहराने के बीच भारत ने अफ्रीका की ओर रुख कर लिया है।
जानकारी के मुताबिक भारत अब एलपीजी सप्लाई के लिए अफ्रीकी देश Angola पर दांव लगा रहा है। यहां की सरकारी कंपनी Sonangol से एलपीजी आयात शुरू करने की तैयारी है। अंगोला के पास करीब 11 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस भंडार हैं, जो भारत के लिए नए “ऊर्जा बैकअप” के रूप में सामने आए हैं।
दरअसल, Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव और Houthi Movement की सक्रियता ने वैश्विक शिपिंग रूट्स को अस्थिर कर दिया है। ऐसे में अगर बाब-अल-मंदेब मार्ग बाधित होता है, तो एशिया-यूरोप व्यापार पर भारी असर पड़ सकता है। भारत के लिए भी यह बड़ा खतरा था, क्योंकि ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा इन्हीं रास्तों से आता है।
इस चुनौती को भांपते हुए Narendra Modi सरकार ने ऊर्जा स्रोतों का तेजी से विविधीकरण किया है। अब भारत केवल खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं है, बल्कि Russia, United States, Norway, Argentina और अफ्रीकी देशों से भी तेल-गैस आयात बढ़ा दिया गया है।
हालांकि दूर-दराज देशों से सप्लाई आने में समय जरूर लग रहा है, लेकिन सरकार ने घरेलू आपूर्ति को नियंत्रित बनाए रखा है। रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। घबराहट के चलते बुकिंग बढ़ी है, लेकिन देश में कहीं भी गैस की किल्लत नहीं है।
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत ने रणनीतिक भंडारण भी मजबूत किया है। पिछले कुछ वर्षों में बड़े स्तर पर तेल भंडार तैयार किए गए हैं, जिससे वैश्विक संकट के बावजूद आपूर्ति बनी रहे। साथ ही, कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह पूरी रणनीति दिखाती है कि भारत अब केवल ऊर्जा आयातक नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा कूटनीति का सक्रिय खिलाड़ी बन चुका है। अफ्रीका जैसे नए साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करना इसी दिशा में बड़ा कदम है।
कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया के तनाव के बीच भारत ने जिस तरह वैकल्पिक रास्ते और नए ऊर्जा स्रोत तलाशे हैं, उसने संभावित संकट को काफी हद तक टाल दिया है। अब साफ है—ऊर्जा के खेल में भारत ने समय रहते अपनी चाल बदल दी है, और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही है।