उत्तराखंड में आठ भाजपा विधायकों का कट सकता है टिकट
देहरादून। आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अभी से अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी के भीतर कराए गए आंतरिक
गदरपुर विधायक अरविन्द पांडेय का नाम भी शामिल
देहरादून। आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अभी से अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी के भीतर कराए गए आंतरिक सर्वे में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार भाजपा के आठ मौजूदा विधायक जनता की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पाए हैं, जिसके चलते उनकी टिकट पर खतरा मंडराने लगा है।
बताया जा रहा है कि पार्टी हाईकमान की ओर से अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से दो स्तरों पर सर्वे कराया गया। इन सर्वे में विधायकों की लोकप्रियता, जनता के बीच सक्रियता, विकास कार्यों की स्थिति और संगठन के साथ तालमेल को प्रमुख आधार बनाया गया। रिपोर्ट में कई सीटों पर जनता की नाराजगी साफ दिखाई दी है। कुछ विधायकों के खिलाफ क्षेत्र में निष्क्रियता और जनसमस्याओं की अनदेखी जैसे आरोप भी सामने आए हैं।
भाजपा संगठन अब किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रहा है। लगातार दो बार सत्ता में रहने के बाद पार्टी तीसरी बार भी सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। ऐसे में 10 साल की सत्ता विरोधी लहर को रोकना भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इसी वजह से संगठन हर सीट पर “जिताऊ उम्मीदवार” की रणनीति पर काम कर रहा है।
सूत्रों का कहना है कि कमजोर प्रदर्शन वाले विधायकों को संगठन की ओर से स्पष्ट संदेश दे दिया गया है कि वे तुरंत जनता के बीच सक्रियता बढ़ाएं और लंबित विकास कार्यों को तेजी से पूरा करें। पार्टी यह भी देख रही है कि किस विधायक की क्षेत्र में पकड़ मजबूत है और कौन जनता के बीच लगातार संपर्क बनाए हुए है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष Mahendra Bhatt ने भी साफ संकेत दिए हैं कि पार्टी चुनाव में केवल उसी उम्मीदवार को टिकट देगी जिसकी जीत की संभावना सबसे अधिक होगी। उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन और जनता के फीडबैक के आधार पर फैसला करेगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा इस बार टिकट वितरण में बड़े बदलाव कर सकती है। पार्टी एंटी-इंकम्बेंसी से बचने के लिए नए चेहरों और मजबूत जनाधार वाले नेताओं पर दांव लगाने की तैयारी में दिखाई दे रही है।


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