ग्रीष्मकालीन धान पर रोक लगाने से कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल सिंह भड़के ,भाजपा नेता की बयानबाजी को बताया बेतुका

गदरपुर। ऊधमसिंहनगर में ग्रीष्मकालीन धान पर प्रशासन की रोक और खेतों में बोई गई धान की पौध नष्ट किए जाने की कार्रवाई से आक्रोशित कांग्रेस नेता

ग्रीष्मकालीन धान पर रोक लगाने से कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल सिंह भड़के ,भाजपा नेता की बयानबाजी को बताया बेतुका

गदरपुर। ऊधमसिंहनगर में ग्रीष्मकालीन धान पर प्रशासन की रोक और खेतों में बोई गई धान की पौध नष्ट किए जाने की कार्रवाई से आक्रोशित कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल सिंह ने मीडिया के सामने तीखा बयान देते हुए कहा कि प्रशासन “कानून के नाम पर किसानों का उत्पीड़न” कर रहा है और यह अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

राजेंद्र पाल सिंह ने सवाल उठाया कि जब किसान अपनी जमीन पर मेहनत कर रहे हैं, तो उनके खेतों में खड़ी पौध को क्यों नष्ट किया जा रहा है,उन्होंने भाजपा नेता गुंजन सुखीजा के उस बयान पर भी पलटवार किया, जिसमें कहा गया था कि यदि किसानों ने ग्रीष्मकालीन धान लगाया तो पानी खत्म हो जाएगा। कांग्रेस नेता ने कटाक्ष करते हुए पूछा, “क्या पानी सिर्फ किसानों के खेतों में ही खर्च होता है? फैक्ट्रियों में जो पानी बह रहा है, उसका हिसाब कौन देगा?” राजेंद्र पाल सिंह ने कहा कि यदि तर्क यह है कि धान अधिक पानी लेता है, तो फिर उन उद्योगों पर भी समान सख्ती क्यों नहीं दिखाई जाती जो कई गुना अधिक जल उपयोग करते हैं। “नियम अगर हैं तो सब पर लागू हों, सिर्फ किसान ही निशाना क्यों?” उन्होंने यह भी कहा कि किसान पहले ही लागत, मौसम और बाजार की मार झेल रहा है, ऐसे में प्रशासनिक डंडा उसकी कमर तोड़ने जैसा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा के ही नेता अवैध खनन करने में लगे हैं नदियों को छलनी किया जा रहा है अगर वास्तव में उनको इसकी चिंता है तो खनन बंद करें, भाजपाई दूसरों को ज्ञान बांट रहे हैं खुद अवैध खनन करने में जुटे हैं।

इधर प्रशासन का पक्ष है कि ग्रीष्मकालीन धान पर रोक जल संरक्षण और भूजल स्तर को बचाने के लिए लगाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम दीर्घकालिक हित में है और जिन क्षेत्रों में अनुमति नहीं है, वहां कार्रवाई अनिवार्य है।