हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेष

आज का दिन हम सभी कलमकारों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है और हर कोई अपने अपने स्तर से आज हिंदी पत्रकारिता दिवस को मनाते हुए उन महान कलमकारों

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेष

आज का दिन हम सभी कलमकारों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है और हर कोई अपने अपने स्तर से आज हिंदी पत्रकारिता दिवस को मनाते हुए उन महान कलमकारों को याद करते हैं जिनका इस क्षेत्र मैं महत्वपूर्ण योगदान रहा है और जरुरी है कि आज के दिन हम आज से पहले का इतिहास अपने पूर्वजों का त्याग बलिदान तपस्या को भी जानें और समझें तभी इस दिन को मनाने का असल मकसद पूरा होता है क्यो कि तीस तारीख हर साल हर महीने आतीं हैं लेकिन यह तारीख कलमकारों के लिए ही क्यों महत्वपूर्ण है इसको भी हमें जानना होगा ताकि भावी पीढ़ी का मार्ग दर्शन हो सके और किस तरह पहले अखबार निकाले गए और आज किस विष्म परिस्थितियों मैं अखबार निकाला जा रहा है और क्या चुनौतियां हैं हमें यह भी जानना जरूरी होगा बात इस दिन की यहां से शुरू करते हैं जब आज के दिन 1826मै कानपुर की धरती पर जन्मे पंडित जुगल किशोर ने अपनी कड़ी मेहनत से कलकत्ता की धरती से पहला अखबार हिंदी समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड अपने संपादन मैं प्रकाशित किया था और इसे हिंदी पत्रकारिता के इतिहास मैं पहला अखबार माना जाता है क्योंकि जब यह अखबार निकाला गया था तब अंग्रेजी हुकूमत का दौर था और उस भयंकर दौर मैं हिंदी समाचार पत्र निकाला जाना एक बड़ा फैसला था एक बड़ी चुनौती थी और अंग्रेज़ी ज़ुल्मो सितम के खिलाफ हिंदी समाचार पत्र मैं अपनी बात कहना भी बड़ी चुनौती थी लेकिन उस दौर में चूंकि कलकत्ता भारत की राजधानी हुआ करती थी और सभी मुख्य गतिविधियों का केंद्र बिन्दु भी कलकत्ता ही था लेकिन फिर भी चुनौतियों को स्वीकार करते हुए उद्धत मार्तण्ड बगदूत प्रजापति मार्तण्ड और सुधा वर्णन आदि का प्रकाशन किया गया तो अंग्रेजी हुकूमत की चूले हिल गई क्योंकि उस समय अंग्रेजी ऊर्दू बंगला फारसी भाषा मैं अखबार छपते थे तभी हिंदी भाषा मैं अखबार निकाला गया तो अंग्रेजी हुकूमत की नींदे हराम हो गई और उसके सभी नापाक इरादों को हिंदी पत्रकारिता ने जमीन पर लाने का काम किया और भारतीयों की आवाज और जुबान बनकर कलमकारों ने हिंदी समाचार पत्रों में भारतीय जनता की मूलभूत सुविधाओं जनभावनाओं को उजागर किया तो अंग्रेजी हुकूमत ने षड्यंत्र रचा और मात्र सोलह महीनों में यह अखबार बंद हो गया जबकि यह अखबार अवधि ब्रजभाषा का मिश्रण अखबार था जो तमाम भारतीयों की आवाज बना लेकिन अंग्रेजी हुकूमत के ज़ुल्मो सितम के कारणों से 79वा और आखिरी अंक 1827मै पांच सौ प्रतियां छपने के बाद बंद हो गया लेकिन हिंदी पत्रकारिता की कहानी भारतीय राष्ट्रीयता की कहानी है और हिंदी पत्रकारिता के आदि उन्नायक जातिय चेतना युग बोघ और अपने महत्वपूर्ण दायित्व के प्रति पुरी तरह सचेत थे कदाचित इसलिए अंग्रेज़ी हुकूमत की दमनकारी नीतियों का उन्हें शिकार होना पड़ा और उन्नीसवीं शताब्दी मैं हिंदी गघ निर्माण की चेष्टा और हिंदी प्रचार प्रसार आन्दोलन अत्यंत प्रतिकुल परिस्थितियों में भयंकर कठिनाइयों का सामना करते हुए हिन्दी पत्रकारिता जगत को एक बड़ा आघात लगा लेकिन कलम की धार की धारा बढ़ती गई और बंगाल से ही राजाराम मोहन राय के कुशल नेतृत्व में हिंदी पत्रकारिता की आगे शुरुआत हुई और सबसे पहले प्रेस और सामाजिक उद्देश्यों से जोड़ कर भारतीयों को धार्मिक राजनैतिक आर्थिक हितों का समर्थन करते हुए इंदौर से प्रकाशित समाचार पत्र नयी दुनिया हिंदी का पहला वेब पोर्टल वेब दुनिया के नाम से शुरू किया गया वहीं चेन्नई से दा हिन्दू पहला भारतीय समाचार पत्र भी माना गया जिसने इंटरनेट संस्करण 1995 मैं शुरू किया लेकिन हिंदी पत्रकारिता के इतिहास पर प्रारम्भिक जीवन की इतनी बातें हैं जो शब्दों की माला मैं पिरोकर भी पूरी नहीं हो सकती है लेकिन आज हिंदी पत्रकारिता दिवस और पत्रकारिता का जन्म दिन है और इस दिन विस्तार से वर्णन होना भी जरूरी है क्योंकि आजादी की लड़ाई में कलम की धार ही एक मजबूत और शक्तिशाली धार बनकर सामने आई थी और क्रांतिकारी वीर योद्धाओं की रगों में जोश उत्साह भरने का काम किया यही कारण था कि कलम की धार हर भारतीय की आवाज बनीं और हर भारतीय धर्म जाति भाषा क्षेत्र की बात छोड़ कर जंगे आजादी में कूद पड़ा और कलम की आवाज को अपनी आवाज मानते हुए वीर योद्धाओं ने आजाद भारत का सपना पूरा करने के लिए मिलकर काम किया और खुलीं सांस मैं जीने का अधिकार लेकर रहे तभी से प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माने जाने लगा क्यों कि कलम की धार ने आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका अदा किया था और कलम के सिपाहियों ने ही सच को सच साबित किया था और कलम के सिपाहियों ने ही अपने खून की सियाही से से देश और समाज का आईना बनकर अपने प्राणों की आहूति देकर देश को आजाद कराया था यही पत्रकारिता एक ऐसी विघा है जिसका क्षेत्र  अत्यन्त व्यापक है और पत्रकारिता के माध्यम से ही साहित्य विज्ञान शिक्षा राजनीति कला जनकल्याण सांस्कृतिक धर्म दर्शन आदि क्षेत्रों की गतिविधियां प्रसारित होती है और साम्प्रदायिक सौहार्द राष्ट्रीय एकता सद्भावना तथा समन्वयक की सूत्रधार स्तंभकार हिंदी पत्रकारिता ही है और इसके इतिहास को लेकर भी अलग अलग वर्णन किया गया है लेकिन विश्व में पत्रकारिता का आरम्भ 132/59ईसवी पूर्व रोम में हुआ था और पहला दैनिक समाचार पत्र जूलियस सीजर जो कि पत्थर की धातु की पट्टी पर शब्द अंकित होकर निकाला जाता था वहीं 1780मै कलकत्ता मैं जनरल एडवर्टाइजर से साथ मिलकर भारत का पहला अखबार बंगाल गजट निकाला गया था जो अंग्रेजी हुकूमत की मुखर आलोचनाओ के चलते दो साल मैं ही ज़ब्त कर लिया गया था लेकिन महात्मा गांधी के संपादक मैं राष्ट्रीय जागरण सत्याग्रह का संदेश यंग इंडिया का हिंदी संस्करण तरुण भारत प्रताप कर्मवीर वीणा चांद मतवाला सुधा माधुरी जागरण हंस विशाल भारत हिन्दू पंचगंगा हिमालय जैसी प्रथम श्रेणी की पत्रिका के प्रकाशन का कालखंड और गांधी युग का दर्शन है वहीं आज के दिन पंडित मदनमोहन मालवीय गणेश शंकर विद्यार्थी महावीर प्रसाद द्विवेदी देवकीनंदन खत्री माधव प्रसाद मिश्र अंबिका प्रसाद गुप्ता कालूराम जगन्नाथ रत्नाकर किशोरी लाल गोस्वामी महावीर प्रसाद मौलवी इकराम अली अब्दुल कलाम आज़ाद मौलाना मोहम्मद अली जौहर अल्लामा इनायत उल्ला खां मशरकी जैसे अनाम  कलम के सिपाहियों को याद रखना होगा और भावी पीढ़ी को इनके बारे मैं जानना और समझना होगा इनके योगदान कुर्बानियों को याद करना होगा क्योंकि वर्तमान समय में युवा वर्ग तेजी के साथ पत्रकारिता क्षेत्र में आगे तो बढ़ रहा है लेकिन बीते दिनों को याद नहीं कर रहा जिसके चलते पत्रकारिता का स्तर गिर रहा है जबकि हिंदी पत्रकारिता एक जोखिम भरा काम है एक अखबार को छपने मैं कितनी कठिनाई कितना समय कितना खर्च और कितने लोगों की कड़ी मेहनत लगती है इसे भी जानना और समझना होगा कि अखबार कितने पैसे मैं छपकर बिकता है इन सब बातों को ध्यान पूर्वक जानने के लिए भी इस दिन संकल्प लेकर हमें हिंदी पत्रकारिता को करना और समझना होगा तभी आज के दिन को मनाने का मकसद पूरा होगा क्योंकि अखबार ही एक ऐसा माध्यम है है जो आम आदमी की आवाज और घटनाओं की सही जानकारी सही समय पर देता है और यह सच्ची पत्रकारिता ही थी जो कोविड काल में जब लोग अपनों की अर्थी को कंधा तक नहीं दे रहे थे तब मिशनरी पत्रकारिता अपनी जान जोखिम में डालकर अपना धर्म निभा रहे थे वहीं गोदी मीडिया भोंपू मीडिया अपने स्तर से जनता को डरा रहे थे खौंफ पैदा कर रहे हैं और निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकार अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे थे तब भी आमजन अखबार पर ही भरोसा कर रहे थे वावजूद इसके की गोदी मीडिया अखबार की स्याही से आमजन को डरा रहे थे इसलिए आज के दिन फिर से हमें मिल कर संकल्प लेना होगा कि हम कलम की धार को किसी की गुलाम नहीं बनने देंगे और निष्पक्ष निर्भीक होकर अच्छी और सच्ची पत्रकारिता करते हुए समाज को आइना दिखाने का काम करेंगे और चाटुकारिता से दूर रहकर लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बनकर काम करेंगे क्योंकि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को धराशाई करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सोशल मीडिया गोदी मीडिया ऐसा जाल बिछा रहे हैं कि जिस के चलते अखबार मालिक और उनसे जुड़े लोगों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है और अनाप शनाप उलूल जलूल खबरें अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए किसी भी स्तर पर चले जाने और धर्म जाति भाषा के नाम पर दिन भर हंगामा खड़ा कर रहे हैं जबकि आर्थिक तंगी और मंदी के चलते फिर भी हिन्दी समाचार पत्र छप रहे हैं और हक़ और सच को लिख रहे हैं इस लिए आज के दिन हम हिंदी पत्रकारिता के इतिहास चुनौतियों त्याग बलिदान तपस्या समर्पण और अपने पूर्वजों की कहानियां जानने का महान दिन है क्योंकि आजादी की लड़ाई में कलम के सिपाहियों ने ही खैवनहार बन कर काम किया था उसी तरह हम भी समाज का सजग प्रहरी बनकर हिन्दी पत्रकारिता को जिंदा रखते हुए स्वच्छ सुंदर निष्पक्ष निर्भीक पत्रकारिता करते हुए चौथे स्तंभ की गरिमा को खंडित होने से बचा सकें यही आज हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाने का असली मकसद पूरा होता है।                                                       महताब ख़ान चांद