रुद्रपुर। उत्तराखंड में निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ‘अनसुनी आवाज़’ (Ansuni Awaaz) के संपादक एवं निडर, प्रखर पत्रकार रूपेश कुमार पर बीती रात हुए हमले ने पत्रकार जगत में आक्रोश पैदा कर दिया है। घटना के विरोध में बुधवार को बड़ी संख्या में पत्रकारों ने कोतवाली पहुंचकर धरना-प्रदर्शन किया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार देर रात करीब 11:30 बजे रूपेश कुमार रुद्रपुर से अपने घर दिनेशपुर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में बोलेरो सवार कुछ लोगों ने उनकी कार को पीछे से टक्कर मार दी। आरोप है कि इसके बाद बोलेरो सवार लोगों ने उनके साथ मारपीट की। अचानक हुए इस हमले से पत्रकार रूपेश कुमार को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

घटना के बाद मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब आरोप लगाया गया कि हमले का शिकार हुए पत्रकार के खिलाफ ही आपराधिक मुकदमा दर्ज कर दिया गया, जबकि उनकी ओर से दी गई शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। इस कार्रवाई को लेकर पत्रकारों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और आरोपियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच एवं सख्त कार्रवाई की मांग की।
मामले की जानकारी मिलने पर विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री तिलक राज बेहड़, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल तथा संदीप जुनेजा भी कोतवाली पहुंचे। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और पत्रकारों के साथ खड़े होकर मामले में उचित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
धरना-प्रदर्शन कर रहे पत्रकारों का कहना था कि लोकतंत्र में पत्रकार जनता की आवाज बनकर काम करते हैं। यदि सच दिखाने और सत्ता से सवाल पूछने वाले पत्रकार ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो स्वतंत्र पत्रकारिता कैसे संभव होगी? पत्रकारों ने मांग की कि रूपेश कुमार की शिकायत तत्काल दर्ज की जाए, हमले में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
पत्रकारों ने स्पष्ट किया कि किसी भी पत्रकार के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना था कि पत्रकार पर हमला केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर चोट है।
अब निगाहें पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। पत्रकारों ने चेतावनी दी कि जब तक पीड़ित पत्रकार को न्याय नहीं मिलता और मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।