जिला प्रशासन और एम डी डी ए में तालमेल के
अभाव में हुए अतिक्रमण, राजनेताओं ने दिया संरक्षणपछुवा दून में कांग्रेस शासन काल में जमकर हुआ सरकारी जमीन कब्जाने का खेल
देहरादून: घंटा घर से हिमांचल बॉर्डर तक सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण करके मस्जिद मदरसे ईदगाह खड़े कर दिए गए और प्रशासन कुम्भ करणी नींद सोता रहा. जिला प्रशासन ने अवैध निर्माण को एम डी डी ए की लापरवाही माना, एम डी डी ए ने इसे सरकारी भूमि पर कब्ज़ा बता कर हाथ झाड़ लिए। कब्जे करने वालो को सफेदपोश नेताओं ने संरक्षण दिया।
पहले जो नेता कांग्रेस और अन्य दलों से थे वो अब बीजेपी में हैं और अवैध कब्जेदारो को संरक्षण देते आ रहे हैं.।
पिछले दिनों प्रशासनिक जांच में खुलासा हुआ है कि देहरादून जिले में एक दो नहीं दर्जनों मस्जिदें मदरसे ऐसे है जोकि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे करके बना दिए गए है। इस मामले की जिला प्रशासन ने अपने स्तर पर और पुलिस की खुफिया टीम के द्वारा भी जांच पड़ताल रिपोर्ट मंगवा ली है। यानि दोनों रिपोर्ट्स की क्रॉस चेक रिपोर्ट भी सही पाई गई है।
जानकारी के मुताबिक पछुवा दून विकास नगर परगना क्षेत्र में आइशा मस्जिद ग्राम कुल्हाल 6 बिस्वा ग्राम समाज की भूमि पर,कूबा मस्जिद धौला तप्पड़ 5 बिस्वा वन भूमि, जामा मस्जिद ग्राम मटक माजरी 1 बीघा सिंचाई विभाग की भूमि पर, श्रहीमी मस्जिद ,6 बिस्वा सिंचाई विभाग की भूमि पर, ईद गाह मस्जिद ग्राम कुंजा5 बिस्वा सिंचाई विभाग के नाले पर,मोमिनी मस्जिद ग्राम ढकरानी 04 बिस्वा बज्जू खाना सिंचाई विभाग की भूमि पर, मस्जिद मदरसा अस्लामिया अरबिया मसीहूल उलूम ग्राम ढकरानी 12 बिस्वा ग्राम सिंचाई विभाग की भूमि पर अवैध का कब्जे करके बनाई गई।
ऐसे ही मस्जिद फातिमा बरोटीवाला ,ग्राम बरोटीवाला, 03 बिस्वा सरकारी ग्राम समाज की भूमि पर अवैध रूप से बनाई गई।
बड़ी ईदगाह ढकरानी,ईदगाह बाबूगढ़,ईदगाह लाइन जीवन गढ़,ईद गाह हरबर्टपुर,ईदगाह कुंजा, ईदगाह डाक्टरगंज नवाबगढ़ भी सरकारी भूमि पर कब्जे करके बनाए गए, इसके लिए न तो सरकार से कोई लीज अनुमति, निर्माण अनुमति ली गई।
खास बात ये है कि ये सभी अवैध निर्माण या तो नारायण दत्त तिवारी या फिर हरीश रावत के कांग्रेस शासन काल में हुए है।
विकास नगर परगना में 84 मस्जिदें मदरसे ईदगाह आदि इस्लामिक संरचनाएं प्रकाश में आई है,खास बात ये कि उत्तराखंड राज्य बनने से पहले इनकी संख्या केवल 14 थी। यानि इस क्षेत्र का तेजी से इस्लामीकरण हुआ और यहां के 29 ग्राम जोकि कभी हिंदू बाहुल्य थे वो अब मुस्लिम बाहुल्य हो गए है।
स्मरण करने का विषय ये भी है कि इस क्षेत्र में धामी सरकार द्वारा सरकारी भूमि से तकरीबन 85 अवैध मजारे भी हटाई गई है।
हिमांचल बॉर्डर और यूपी से लगा हुआ ये क्षेत्र डेमोग्राफी चेंज के असंतुलन की गाथा भी सुनाता रहा है।
एक जानकारी ये भी मिली हैं कि कुछ इस्लामिक सम्पत्तियां ऐसी भी हैं जोकि पहली नज़र में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे कर बनायी गयी प्रतीत होती हैं और उसे वक्फ सम्पप्ति बताया जा रहा हैं., रेंजर्स परिसर में बनी मजार, वन विभाग कि सम्पत्ति होनी चाहिए लेकिन उसे वक्फ का बताया जा रहा हैं.। फारेस्ट कि भूमि कब वक्फ में दर्ज हो गयी ये कोई बता नहीं पर रहा हैं।
ऐसे ही कई और सम्पत्तिया हैं जोकि वकफ कि हैं किन्तु भारत सरकार के उम्मीद पोर्टल पर दर्ज नहीं हो पायी हैं ऐसा इस लिए हुआ हैं क्यूंकि उनके पास भूमि संबंधो दस्तावेज ही नहीं हैं।
बरहाल तुष्टिकरण कि राजनीति की वजह से देहरादून जिले की डेमोग्राफी भी चेंज होती दिखाई दे रही है। मलिन बस्तियों में अवैध कब्जो के बीच मस्जिद ईदगाह दिखाई दे रहे हैं.
वक्फ सम्पतियों पर हैं अवैध कब्जे

उत्तराखण्ड वक्फ बोर्ड ने देहरादून जिला प्रशासन को पत्र लिख कर वक्फ सम्पत्तियों पर बाहरी राज्यों से आये मुस्लिमो द्वारा कब्जे कर लिए जाने की जानकारी दी हैं. बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स का कहना है कि कब्जेदारो ने क़ब्रस्तान की भूमि पर भी अवैध अतिक्रमण कर लिया है और मुस्लिम समुदाय को मरहूम लोगो को दफनाने के लिए भी जगह नहीं मिल पा रही है।
डीएम आशीष चौहान का कहना है कि वक्फ बोर्ड के पत्र पर कार्रवाई की जा रही हैं, हमने नोटिस और मार्किंग कर दी हैं. लोग अपना अतिक्रमण स्वयं हटा लेंगे तो बेहतर होगा।