किसान मेले के कवि सम्मेलन में वंदना शर्मा की गजल ने बांधा समां, ‘है कर्म भूमि यह देव भूमि’ का हुआ विमोचन
पंतनगर। “देखा हमने प्यार तुम्हारी आंखों में, चाहत का संसार तुम्हारी आंखों में…” नैनीताल की कवयित्री वंदना शर्मा की इन खूबसूरत पंक्तियों ने पंतनगर किसान मेले के तीसरे दिन गांधी हाल में आयोजित कवि सम्मेलन की महफिल में प्रेम और संवेदनाओं के रंग भर दिए। वंदना शर्मा ने अपनी गजल की प्रभावशाली प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और देर तक तालियां बटोरीं।
गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के किसान मेले के तीसरे दिन आयोजित इस कवि सम्मेलन में साहित्य और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। इसी अवसर पर विश्वविद्यालय के कवि के.पी. सिंह ‘विकल’ द्वारा रचित काव्य संग्रह ‘है कर्म भूमि यह देव भूमि’ का विमोचन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने किया। यह के.पी. सिंह ‘विकल’ का दूसरा काव्य संग्रह है। इससे पूर्व उनका गजल संग्रह ‘कजा आएगी इक दिन’ प्रकाशित हो चुका है।

कवि सम्मेलन का संयोजन एवं संचालन के.पी. सिंह ‘विकल’ ने किया। कार्यक्रम में वंदना शर्मा की गजल विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उनकी प्रस्तुति में प्रेम, चाहत और भावनाओं की खूबसूरत अभिव्यक्ति ने पूरे सभागार को साहित्यिक रंग से सराबोर कर दिया।
काशीपुर के विवेक व्योम ने ओजस्वी कविता प्रस्तुत कर श्रोताओं में जोश भरा और खूब तालियां बटोरीं। विवेक बादल बाजपुरी ने किसानों के जीवन और उनके योगदान पर आधारित पंक्तियां प्रस्तुत कर किसान मेले की विषयवस्तु से साहित्य को जोड़ा।
कवयित्री सीमा मौर्या और बरेली की नेहा मिश्रा ने बेटियों पर भावपूर्ण कविताएं प्रस्तुत कीं, जिन्हें सुनकर श्रोताओं की आंखें नम हो गईं। डॉ. बृजेश सिंह, संयुक्त निदेशक श्रम कल्याण, ने ‘समय’ विषय पर विशेष कविता प्रस्तुत की। वहीं डॉ. ओम शंकर मिश्रा ने गजल के माध्यम से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
पूनम त्रिपाठी, डॉ. गीता चौहान और डॉ. भूपेश सिंह ने भी काव्य पाठ कर कार्यक्रम को ऊंचाई दी। उनकी प्रस्तुतियों पर सभागार तालियों से गूंज उठा।
इस अवसर पर डॉ. विपिन ध्यानी, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, डॉ. घोष, डॉ. पूनम त्यागी, डॉ. आशा शुक्ला, डॉ. किरण आर्य, सहायक सुरक्षा अधिकारी रविंद्र मिश्र, ईश्वरपाल सिंह और त्रिलोकी शंकर सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, कर्मचारी एवं साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।
कवि सम्मेलन में जहां विभिन्न रचनाओं ने श्रोताओं को कभी भावुक तो कभी उत्साहित किया, वहीं वंदना शर्मा की गजल “देखा हमने प्यार तुम्हारी आंखों में…” कार्यक्रम की यादगार प्रस्तुतियों में शामिल रही।